Rahis Bharti : उज़्बेकिस्तान में Dhoad Band के साथ Diwali 2022 का जश्‍न मनाने को बेताब क्‍यों हैं NRI?

राजस्‍थान के सीकर जिला मुख्‍यालय से 20 किलोमीटर दूर एक कस्‍बा है धोद। यहां के भारती परिवार का म्‍यूजिक बैंड दुनियाभर में छाया हुआ है। नाम है धोद जिप्‍सी बैंड। उज़्बेकिस्तान में रह रहे प्रवासी भारतीय दिवाली 2022 का जश्‍न इस बार धोद बैंड के साथ मनाएंगे, जो भारत के लिए गर्व की बात है।

धोद जिप्‍सी बैंक के रहीस भारती का इंटरव्‍यू

धोद जिप्‍सी बैंक के रहीस भारती का इंटरव्‍यू

धोद जिप्‍सी बैंड के डायरेक्‍टर रहीस भारती ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में धोद बैंड से जुड़ी तमाम बातें शेयर की है। रहीस भारती कहते हैं कि उन्‍हें नाज है कि वे राजस्थानी संस्कृति से भारत को दुनिया भर में गौरवान्वित कर रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान के सैकड़ों लोक कलाकारों को इंटरनेशनल मंच मुहैया करवा पा रहे हैं।

 रहीस भारती की जीवनी

रहीस भारती की जीवनी

रहीस भारती का जन्‍म 18 अक्‍टूबर 1982 को जयपुर के एक संगीत घराने में हुआ। इनका परिवार सात पीढियों से संगीत के क्षेत्र में सक्रिय है। धोद जिप्‍सी बैंड की स्‍थापना रहीस भारती ने की थी। इनकी जड़े राजस्‍थान के सीकर के जिले धोद कस्‍बे से जुड़ी हैं। फिर परिवार धोद से जयपुर आ गया। अपने मूल कस्‍बे धोद के नाम पर ही अपने बैंड का नाम रखा है। धोंद बैंड को सांस्कृतिक राजदूत के नाम से भी जाना जाता है। रहीस भारती ने संगीत की शिक्षा अपने पिता उस्‍ताद रफीक मोहम्‍मद से ली। रहीस भारती की शिक्षा जयपुर के टैगोर स्‍कूल से हुई।

धोद बैंड के साथ दिवाली का जश्‍न

धोद बैंड के साथ दिवाली का जश्‍न

रहीस भारती ने बताया कि उज्बेकिस्तान में भारत के राजदूत ने धोद बैंक को बुखारा, समरकंद और ताशकंद स्थानों पर प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया है। वहां रह रहे भारतीय भी धोद बैंड के साथ दीपावली 2022 मनाने को बेताब हैं। यह पहली बार होगा जब राजस्‍थान के लोक कलाकारों का कोई समूह बुखारा, समरकंद व ताशकंद जैसी जगहों पर प्रस्‍तुति देगा।

 धोद बैंड के कार्यक्रम

धोद बैंड के कार्यक्रम

20 अक्‍टूबर को बुखारा में मेडिकल इंस्टीट्यूट

21 अक्‍टूबर को समरकंद में मेडिकल इंस्टीट्यूट
22 अक्‍टूबर को ताशकंद में इंटरकांटिनेंटल होटल
23 अक्‍टूबर को उज्बेकिस्तान में भारतीयों के साथ दिवाली

ये कलाकार देंगे प्रस्‍तुति

ये कलाकार देंगे प्रस्‍तुति

रहीस भारती ने बताया कि यूं तो धोद बैंड से राजस्‍थान के सैंकड़ों लोक कलाकार जुड़े हैं। उज़्बेकिस्तान में उनके बैंड के साथ राजस्थानी डांसर मंजू सपेरा, मोरू सपेरा, गायक बुंदू खान, महबूब खान लंगा, खरताल वादक पठान खान लंगा, भवई नर्तक मुंशी, ढोलक वादक पिंटू, हारमोनियम वादक, गायक मैनुद्दीन खान और तबला वादक अफरीदी प्रस्तुति देंगे।

लोक कला में फूंक रहे नई जान

लोक कला में फूंक रहे नई जान

धोद बैंड राजस्‍थानी लोक संस्कृति की छाप दुनियाभर में छोड़ने के साथ-साथ भारत के साथ दूसरे देशों के मैत्रीपूर्ण संबंध स्‍थापित करने में भी योगदान दे रहा है। वे विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही राजस्‍थान की लोक संगीत और नृत्यों में नई जान फूंक रहे हैं। इसके अलावा राजस्थान के सैकड़ों लोक कलाकारों को मौका दे रहे हैं ताकि वे लोक संगीत और नृत्य को जीवित रख सकें।

 10 से ज्‍यादा देशों में कार्यक्रम

10 से ज्‍यादा देशों में कार्यक्रम

रहीस भारती बताते हैं कि वे बीते 22 साल से इंटरनेशनल मंच पर राजस्‍थानी लोक कला को जीवित रखे हुए हैं। करीब 700 लोक कलाकारों को काम दे चुके हैं। 10 से ज्‍यादा देशों में 1500 संगीत कार्यक्रम और शो कर चुके हैं। धोद बैंड नवंबर और दिसंबर 2022 में फ्रांस, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल में भारत के दूतावास की देखरेख में फ्रांस के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन करेगा।

रहीस भारती पर लिखी पुस्‍तक

रहीस भारती पर लिखी पुस्‍तक

उल्लेखनीय है कि महान फ्रांसीसी लेखक मार्टीन ले कोज ने सीकर के रहीस भारती के जीवन और कार्य से प्रेरित और प्रभावित होकर उन पर एक पुस्तक लिखी थी। संभवतया रहीश भारती वो पहले भारतीय लोक कलाकार हैं, जिन पर किसी फ्रांसीसी लेखक ने बुक लिखी है। 200 पन्नों की यह किताब 'रहिस भारती-धोड़ हार्टबीट ऑफ राजस्थान' फ्रेंच में लिखी गई है। इस पुस्तक का विमोचन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो गोविंद प्रसाद शर्मा ने 23 अप्रैल, 2022 को प्रतिष्ठित पेरिस पुस्तक महोत्सव ने किया था।

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