इकलौते बेटे की मौत के बाद बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर दी चिता को मुखाग्नि
जयपुर। भगवान सहाय अग्रवाल ने मंगलवार सुबह चार बजे बेटी अंजू के घर अंतिम सांस ली। फिर जो देखने को मिला। उसने सबकी आंखें नम कर दी। पिता ने बेटियों के कंधे पर दुनिया से विदाई ली। बेटी ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो हर कोई आंसू नहीं रोक पाया। पिता-बेटी के रिश्ते का दर्दभरा वाक्या राजस्थान के हिंडौन सिटी का है।

पांच बेटियां व एक बेटा
हुआ यूं कि हिंडौन सिटी की मोहननगर की रूप कॉलोनी निवासी भगवान सहाय अग्रवाल के पांच बेटियां हैं। एक बेटा था, जिसका एक दशक पहले सड़क हादसे में निधन हो गया। भगवान सहाय ने अपनी बेटियों को बेटों की तरह ही पाला। खूब पढ़ाया-लिखाया और जब दुनिया से रुख्सत हुए तो इनकी पांचों बेटियों हर रस्में बेटों की निभाती दिखीं।
बता दें कि भगवान सहाय अग्रवाल लम्बे समय से बीमार चल रहे थे। भगवान सहाय 21 मार्च को पत्नी प्रेमी देवी के साथ अपनी तीसरे नंबर की बेटी अंजू के घर गंगापुरसिटी आए थे। तीन बाद ही कोरोना संकट के चलते देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन घोषित हो जाने पर माता-पिता को बेटी ने ही अपने घर रोक लिया।
पिता की अंतिम इच्छा पूरी की
मंगलवार सुबह 4 बजे गंगापुरसिटी में ही भगवान सहाय की मौत हो गई। भगवान पूर्व में अक्सर अपनी बेटियों के सामने अंतिम इच्छा जता चुके थे कि उनके निधन पर अंतिम विदाई खुद के घर से हो। ऐसे में पांच बेटी अंजू, माया, सीमा, गुडिया और मिथलेश पिता का शव लेकर रूपकॉलोनी स्थित अपने घर पहुंची।
बड़ी बेटी ने दी चिता को मुखाग्नि दी
फिर बेटियों ने ही पिता की अर्थी तैयार की और कंधा देकर शवयात्रा निकाली। कुछ दूरी तक चल चलने के बाद शव को पुष्पक विमान में रख करौली रोड स्थित मोक्षधाम पहुंचाया। जहां बड़ी बेटी माया देवी ने पुत्र के समान रस्में पूरी कर पिता की चिता को मुखाग्नि दे अंतिम संस्कार किया।
भाई की मौत के बाद बेटियों ने संभाला
भगवान सहाय के इकलौते बेटे की एक दशक पहले मौत हो गई। इसके बाद से पांचों बेटियों ने माता-पिता को संभाला। पांचों बहनों की शादी गंगापुरसिटी में ही हुई है। 19 दिसम्बर को सबसे छोटी पुत्री मिथलेश की शादी होने के बाद से भगवान व उनकी पत्नी प्रेम देवी अकेले ही रह रहे थे।












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