कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव तक राजस्थान में भाजपा ने सभी फैसले टाले, सियासी गतिविधियों पर ऐसे लगा विराम
जयपुर, 23 सितंबर। राजस्थान में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव के लिहाज से होने वाले सभी फैसलों को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव के चलते फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। पार्टी में प्रदेश नेतृत्व को लेकर चल रही उठापटक भी थम गई है। वही प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का इसी महीने कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में विधानसभा चुनाव पूनिया के नेतृत्व में ही होंगे या पार्टी कोई नया अध्यक्ष देगी। इसका फैसला भी होना है। पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है। चर्चा है कि कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव सभी फैसलों पर विराम लगा दिया गया है।


पार्टी अध्यक्ष को लेकर होना था फैसला
राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का इसी महीने कार्यकाल पूरा हुआ है। राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव है। भाजपा के भीतर प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की भी चर्चाएं हैं। भाजपा अध्यक्ष के लिए कई नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी ओबीसी या ब्राह्मण नेता पर दांव खेल सकती है। चर्चा तो इस बात की भी है कि सतीश पूनिया को ही विधानसभा चुनाव तक रिपीट किया जा सकता है। लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के चलते इस तरह की तमाम शर्तों पर विराम लग गया है। अशोक गहलोत का कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर ही भाजपा अपनी रणनीति तय करेगी।

विधानसभा चुनाव को लेकर केंद्रीय नेताओं के दौरे
राजस्थान में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में केंद्रीय नेताओं के दौरे भी तेज हो गए थे। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राजस्थान दौरे पर आए थे। आने वाले समय में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में कई बड़ी सभाओं की तैयारी है। लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान दो दिवसीय राजस्थान दौरे पर रहे। नितिन गडकरी 25 को राजस्थान आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पार्टी अपनी रणनीति कैसे तैयार करेगी। जब राजस्थान कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है।

वसुंधरा राजे की रणनीति में भी होगा बदलाव
कांग्रेस में होने वाले बदलाव को लेकर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की रणनीति में भी परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि अशोक गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित संगठन में बड़े फेरबदल होने की संभावना है। ऐसे में वसुंधरा राजे प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार कर सकती है। अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री रहते हुए जो जनकल्याणकारी योजनाएं प्रदेश में लागू की है। वह भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उनसे गहलोत को बड़ी लोकप्रियता हांसिल हुई है। वही अशोक गहलोत कांग्रेस के बेहतरीन रणनीतिकार भी हैं। ऐसे में गहलोत जब राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कार्य करेंगे तो निश्चित तौर पर इससे कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। भाजपा को भी अब नए सिरे से रणनीति तैयार करनी पड़ेगी।

गुटबाजी खत्म कर देना होगा एकजुटता का संदेश
राजस्थान भाजपा में सीएम फेस को लेकर जो गुटबाजी है। उससे निश्चित तौर पर आने वाले समय में पार्टी को नुकसान होने की संभावना है। केंद्रीय नेतृत्व को यह तय करना होगा कि पार्टी के तमाम नेताओं को एकजुटता का संदेश जाए। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के बीच तकरार है। पार्टी की प्रदेश इकाई और प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर असमंजस की स्थिति है। ऐसे में पार्टी को कार्यकर्ताओं के भीतर संदेश देना होगा कि राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव में पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इसे लेकर रणनीति तैयार भी कर रहा है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के फैसले के बाद भाजपा ने सभी फैसलों को फिलहाल टाल दिया है। राजस्थान में कांग्रेस में आने वाले समय में होने वाले बड़े बदलावों के मद्देनजर ही भाजपा अपनी रणनीति तैयार करेगी।












Click it and Unblock the Notifications