MP में कौन है अटल विचारधारा के धीरज पटैरिया? जिसकी चुनावी साल में भाजपा को पड़ी जरुरत
चुनावी साल में मध्य प्रदेश में भाजपा हो या कांग्रेस उनके नेताओं की 'घर वापसी' तेज हो गई हैं। चंबल के प्रीतम लोधी, दमोह के पूर्व मंत्री पुत्र सिद्धार्थ मलैया के बाद अब जबलपुर के दिग्गज नेता धीरज पटैरिया की वापसी हुई।

Dheeraj pateriya jabalpur: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की घड़ी जैसे-जैसे करीब आ रही है, सियासी दलों के दिग्गजों की धड़कन बढ़ना शुरू हो गई। एंटी-इनकम्बेंसी का जोर है तो मौके की नजाकत को भांपकर बीजेपी ने भी उन अपनों के लिए दरवाजे खोल दिए है, जिनकी बदौलत 2018 में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
अब महाकौशल की राजनीति की धुरी कहे जाने वाले जबलपुर के दिग्गज नेता धीरज पटैरिया को हाथ पकड़कर वापस बीजेपी में लाया गया हैं। पटैरिया को पार्टी ने 6 साल के लिए निष्कासित किया तो उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। लेकिन वहां पहुंचते ही पटैरिया का दिल कचोटता रहा।
साल 2018 के चुनाव में टिकट न मिलने से खफा कई ऐसे भाजपाई थे, जिन्होंने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा फिर नतीजे में सत्ता की कुर्सी लुढ़क गई। बीजेपी का गढ़ माने जाने वाली जबलपुर की उत्तर मध्य विधानसभा सीट का भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ था।
| MP विधानसभा चुनाव 2018 जबलपुर उत्तर मध्य विधानसभा सीट किसे कितने वोट मिले |
| विनय सक्सेना | इंडियन नेशनल कांग्रेस | 50045 |
| शरद जैन | भारतीय जनता पार्टी | 49467 |
| पं. धीरज पटैरिया | निर्दलीय | 29479 |
बीजेपी नेता धीरज पटैरिया को जब टिकट नहीं मिली तो वह खफा होकर निर्दलीय मैदान में उतर गए। ब्राह्मण-जैन वोट बाहुल्य इस सीट पर पटैरिया ने 29479 वोट हासिल किए। जो सबसे ज्यादा बीजेपी के खाते के थे। इन वोटों की सेंध से यहां के बीजेपी प्रत्याशी शरद जैन जीतते-जीतते बाउंड्री से हार गए।

जानिए कौन है धीरज पटैरिया?
धीरज ने संघ की कट्टर विचारधारा के सहारे करीब 30 साल की राजनीति का सफर किया हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी इनके आदर्श है। उनकी राजनीतिक शैली के धीरज कायल है। पार्टी से निष्काषित फिर कांग्रेस से जुड़ने के बावजूद भी धीरज, अटल बिहारी बाजपेयी को नहीं भूले। बीच में उन्होंने बिना भाजपा के झंडे के एक यूथ अभियान भी शुरू किया। बीजेपी के एक छोटे से कार्यकर्ता के रूप में सियासी सफ़र शुरू करते हुए बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। फिर प्रदेश कार्यसमिति में भी उनको जगह मिली थी।

बीजेपी से क्यों भंग हुआ था मोह?
युवा मोर्चा में प्रदेश अध्यक्ष के तौर यूथ की बड़ी लॉबी खड़ी करने वाले पटैरिया अपनी उपेक्षा से खफा रहे। यही तक कि स्थानीय नेताओं का भी उनको उस वक्त सहारा नहीं मिला, जब पार्टी प्रदेश अध्यक्ष की कमान यहां के स्थानीय सांसद को मिली। चुनाव में टिकट की बारी आई तो फिर चौथी बार शरद जैन को ही टिकट दे दी गई।

बज गया है युद्ध का नगाड़ा
अब बीजेपी में धीरज की वापसी होने के बाद सीएम शिवराज ने भी कहा कि कार्यकर्ताओं को परिश्रम की पराकाष्ठा कर जबलपुर जिले की सभी विधानसभा सीटों को जीतना हमारा संकल्प हैं। युद्ध का नगाड़ा बज गया है। सेनाएं आमने-सामने है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा बोले कि परिस्थितिवश पटैरिया पार्टी से दूर हुए लेकिन फिर पार्टी ज्वाइन की है। जबलपुर में हारी हुई सीटों पर विजयश्री दिलाने में मददगार साबित होंगे।

टिकट की शर्त वापसी!
धीरज के वापस बीजेपी ज्वाइन करने पर सियासी गलियारों में अब इस बात की चर्चा जोर-शोर से हो रही है कि चुनाव में टिकट की शर्त पर उनकी वापसी हुई है। जबलपुर में कभी आठों सीट बीजेपी की झोली में थी लेकिन पिछले चुनाव में ग्रामीण की एक सीट समेत चार सीट का बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा। राज्य की हर सीट बीजेपी को जीतने के लिए कांटो की राह पर चलने से कम नहीं।












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