MP News: किसान संघ के नेता मोहिनी मोहन मिश्रा ने पराली जलाने पर उठाए सवाल, बोले- इससे फलस अच्छी होती है
MP News: भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए पराली जलाने से जुड़े कुछ अहम मुद्दों पर अपनी राय दी।
उन्होंने पराली जलाने को लेकर चल रहे विवाद को लेकर केंद्र सरकार की सख्त नीति पर सवाल उठाए और इसे किसानों के खिलाफ एक साजिश बताया। उनका कहना था कि "पराली जलाने से खेत की उर्वरक क्षमता पर कोई असर नहीं होता है, बल्कि इससे कीड़े-मकोड़े नष्ट हो जाते हैं और किसानों को अच्छी फसल मिलती है।"

किसानों पर साजिश का आरोप
मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि किसानों को पराली जलाने के मामले में परेशान किया जा रहा है, जबकि "पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण उतना नहीं होता जितना थर्मल पावर प्लांट से होता है"। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि थर्मल पावर प्लांट से होने वाला वायु प्रदूषण 240 गुना ज्यादा होता है, जबकि पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण उसके मुकाबले बहुत कम है।
उनके इस बयान से महज 19 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिए थे कि पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना दोगुना किया जाए। पर्यावरण मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें किसानों से जुर्माना वसूली के नए नियम तय किए गए हैं। अब, 2 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों से ₹5000, 2 से 5 एकड़ वाले किसानों से ₹10,000 और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसानों से ₹30,000 जुर्माना वसूला जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और केंद्र सरकार की नीति
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह नियम उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली राज्यों में लागू होंगे। कोर्ट ने 4 नवंबर को पंजाब और हरियाणा सरकार से 14 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा था। इसके पहले 23 अक्टूबर को कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) के तहत नियम बनाने और अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिए केंद्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया था।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और जिला प्रशासन का निर्णय विवादित
मोहिनी मोहन मिश्रा ने हाल ही में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा पराली जलाने के आरोपित किसानों का केस न लड़ने के फैसले और जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे "जल्दबाजी में लिया गया निर्णय" बताते हुए कहा कि "अगर प्रशासन और वकीलों ने किसानों से बात की होती तो शायद ऐसा निर्णय नहीं लिया जाता"।
किसान नेता ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से यह मांग की कि वे अपना निर्णय वापस लें, नहीं तो "बार काउंसिल को तुरंत बर्खास्त किया जाए"। उन्होंने यह भी कहा कि "किसानों के खिलाफ इस तरह के फैसले उचित नहीं हैं" और यह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
स्वामी रंगनाथन की रिपोर्ट का जिक्र
मोहिनी मोहन मिश्रा ने स्वामी रंगनाथन की रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि "किसानों को पराली जलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया था"। उन्होंने यह भी कहा कि "आज जितना प्रदूषण पराली जलने से हो रहा है, उससे कहीं अधिक प्रदूषण औद्योगिक कारखानों और इंडस्ट्रीज से हो रहा है"।
थर्मल पावर प्लांट से किसानों को नुकसान
किसान नेता ने थर्मल पावर प्लांट से होने वाले प्रदूषण और कोल डस्ट के प्रभावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि "थर्मल पावर प्लांट से किसानों को बिजली के बजाय कोल डस्ट मिल रही है"। इस डस्ट के कारण किसानों के खेत बंजर हो रहे हैं। उन्होंने सिंगरौली के थर्मल पावर प्लांट, कटनी के माइंस एरिया और सिवनी के पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए यह स्पष्ट किया कि इन क्षेत्रों में प्रदूषण के कारण खेती पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
मोहिनी मोहन मिश्रा का यह बयान पराली जलाने के मुद्दे पर एक नई बहस को जन्म देता है। उनका मानना है कि किसानों को निशाना बनाने की बजाय प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जैसे थर्मल पावर प्लांट और औद्योगिक प्रदूषण। उनका यह भी कहना है कि केंद्र सरकार की सख्त नीतियां और जुर्माना किसानों के खिलाफ एक साजिश के रूप में काम कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर किसानों के पक्ष में कोई कदम उठाती है या नहीं।












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