MP High Court: नहीं रोकी जा सकती प्रोविजनल पेंशन, पटवारी को मिलेगा बीते 6 सालों का लाभ
लोकायुक्त ट्रेप में फंसे पटवारी कन्हैयालाल दामले को दोषी मानते मानते हुए होशंगाबाद की ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाई थी। लोकायुक्त विभाग द्वारा दामले को सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पूर्व ट्रेप किया गया था। MP High Court: Provisi
जबलपुर, 08 जुलाई: मध्यप्रदेश में अपराधी घोषित होने के बाद यदि रिटायर सजायाफ्ता कर्मचारी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करता है और निर्णय स्थगित हो जाए, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को प्रोविजनल पेंशन से वंचित नही जा सकता है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High court) ने एक रिटायर पटवारी कन्हैयालाल दामले के मामले में यह बड़ा फैसला सुनाया है। दामले की ओर से पेंशन नियम 64 में प्रोविजन पेंशन प्रावधान का हवाला देते हुए दलील पेश की गई थी।

दरअसल लोकायुक्त ट्रेप में फंसे पटवारी कन्हैयालाल दामले को दोषी मानते मानते हुए होशंगाबाद की ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाई थी। लोकायुक्त विभाग द्वारा दामले को सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पूर्व ट्रेप किया गया था। जिसके बाद नियमानुसार ही रिटायर कर्मचारी की पेंशन बंद करने का प्रावधान है। तो पेशन का 6 साल तक दामले को लाभ नहीं मिला। दामले ने अपने पूरे मामले के खिलाफ हाईकोर्ट में एक अपील दायर की थी, जिसमें कहा गया कि उसे बड़ी साजिश के तहत फंसाया गया था, बाद में ट्रायल कोर्ट ने उसे दंड भी दिया। लेकिन बाद में ऊपरी अदालत में जब ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई, तो फैसला दामले के पक्ष में आया। ट्रायल कोर्ट के फैसले के स्थगन का आदेश पारित हुआ।

अब पूरी मिलेगी पेंशन
ऊपरी अदालत से बरी होने के बाद कन्हैयालाल दामले ने पेंशन को लेकर हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने सभी तथ्यों को गौर से सुनने के बाद कहा कि अपराधी घोषित होने बाद यदि निर्णय के खिलाफ ऊपरी अदालत से स्थंगन आदेश हो तो किसी भी सेवानिवृत कर्मचारी की पेंशन को रोका नही जा सकता। याचिकाकर्ता को पिछले 6 सालों तक प्रोविजनल पेंशन के लाभ से वंचित रखा गया है। लेकिन अब पेंशन नियम 64 में प्रोविजन पेंशन प्रावधान के तहत दामले को 6 सालों की पेंशन का भी लाभ देने के अदालत ने निर्देश दिए है।












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