Mahakal Lok: उज्जैन महाकाल में नर्मदा जल होगा विसर्जित, जबलपुर से कलश लेकर शिव भक्तों का पहुंचा जत्था
(Mahakal Lok Ujjain) बाबा महाकाल की नगरी रूप में विख्यात मप्र का उज्जैन शहर कुछ ही घंटों बाद नए इतिहास का साक्षी बनने जा रहा हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाले 'महाकाल लोक' के लोकार्पण को लेकर शिवभक्तों में गजब का उत्साह है। संस्कारधानी जबलपुर से पहुंचे शिव भक्त और देवाचार्य भी आयोजन में साक्षी बनेंगे। पवित्र नर्मदा का जल का कलश लेकर जत्था रवाना हुआ।

ऐतिहासिक पलों का दीदार करने का इंतजार खत्म
देश के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक मप्र में उज्जैन बाबा महाकाल के दर्शन नए स्वरुप में होने जा रहे है। धर्म के गौरवशाली इतिहास को समेटे उज्जैन के इस आयोजन का साक्षी बनने भक्तों में भी गजब का उत्साह है। संस्कारधानी जबलपुर से भी एक जत्था रवाना हुआ। जिसमें महिलाएं पुरुष बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए आयोजन स्थल पहुंचेंगे।

पवित्र नर्मदा का जल कलश में लिया
जत्थे ने रवानगी के पहले जबलपुर के नर्मदा तट ग्वारीघाट से भक्तों ने कलश में नर्मदा जल लिया। इस कलश की पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे है। इस जल को उज्जैन की क्षिप्रा नदी में विसर्जित कर शहर और प्रदेश में सुख सम्रद्धि की कामना करेंगे। ख़ास बात यह है कि क्षिप्रा में यह जल विसर्जित करने पहले कलश को कही भी रखा नहीं गया, लगातार भक्त इसे हाथ में ही धारण करते हुए उज्जैन तक पहुंचे।

रवाना होने के पहले कचनार शिव मंदिर में अभिषेक
जबलपुर से भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के साथ उज्जैन रवाना होने के पहले जत्था प्रसिद्द कचनार सिटी स्थित शिव मंदिर पहुंचा। यहां भोलेनाथ का आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने महाकाल शिवलिंग की प्रतिकृति की गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा भी निकाली। जिसे सिर पर धारण कर कई मार्गों का भ्रमण किया।

अभिषेक के लिए जबलपुर के देवाचार्य भी आमंत्रित
11 अक्टूबर को होने वाले इस भव्य आयोजन में शास्त्र वेदों के विद्वान आचार्यों को भी आमंत्रित किया गया है। जबलपुर से स्वामी राघव देवाचार्य को भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आमंत्रण भेजा है। देवाचार्य बाबा महाकाल के अभिषेक पूजन अर्चन करते हुए इस ऐतिहासिक दिन के साक्षी बनेंगे।

350 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है कॉरिडोर
आपको बता दें नए स्वरुप में पहले चरण का उज्जैन में जो कॉरिडोर तैयार हुआ है, उसमें 350 करोड़ रुपए लागत आई है। रात वक्त यहां के नज़ारे में 7000 आकर्षक लाइट खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। पहले किसी बड़े पर्व पर जहां 50 हजार श्रधालुओं की क्षमता होती थी, वही अब एक साथ चार गुना ज्यादा भक्त पहुंच सकते है।












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