Joshimath: आपदा की स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने की थी भविष्यवाणी ! शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का बड़ा बयान
जोशीमठ में भू-धंसाव जैसी आपदा की भविष्यवाणी 10-12 साल पहले ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद ने की थी। उन्होंने आज बन रहे हालातों पर पहले ही चिंता जताई थी। यह बात शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने जबलपुर में कही।

Joshimath sinking:उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धंसाव की घटना फिर बने हालातों पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। एमपी के जबलपुर पहुंचे शंकराचार्य बोले कि आज के इन हालातों के बारे में उनके ब्रह्मलीन गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने 10-12 साल पहले ही चेतावनी जारी की थी। अंधाधुंध प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जताई गई थी। अभी भी वक्त है कि आज के हालातों से सबक लेकर भूल सुधार की जाए।
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जोशीमठ में बने आपदा के हालतों पर कोहराम मचा है। घर छोड़कर जाने मजबूर लोगों के सामने रोजाना कई चुनौतियां खड़ी हो रही है। इसी बीच एमपी के जबलपुर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने भी चिंता जताते हुए बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि ज्योतिर्मठ में आज जो हालात बने है, उसके बारे में 10-12 साल पहले ही उनके ब्रह्मलीन सद्गुरु और तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भविष्यवाणी कर दी थी। उस वक्त भी जोशीमठ और उसके आसपास चल रहे बड़े प्रोजेक्ट को रोकने की मांग की गई थी। लेकिन जिम्मेदारों ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।

शंकराचार्य बोले कि नैसर्गिक धरोहर पर्वत, पहाड़, झरना, नदियों से ही देश की संस्कृति श्रेष्ठ हैं। इनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। अंग्रेजों के वक्त की योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, जिस पर किसी भी तरह का विचार नहीं किया गया। नतीजतन उसके नतीजे सामने आ रहे हैं। वर्तमान में जो स्थिति बनी है, उसकी सही वजह क्या है यह तो भू-गर्भ वैज्ञानिक ही बता सकते है। लेकिन अभी भी वक्त है कि सबक लिया जाए और जरुरी कदम उठाये जाए।

ये है मामला
आपको बता दें कि जोशीमठ में भू-धंसाव का दायरा बढ़ता जा रहा हैं। दिसंबर के महीने में यहां कई मकानों और इमारतों में दरारे आई। खेत से लेकर सड़क तक कई फीट चौड़ी दरारें देखने को मिली। जनवरी में धंसाव और बढ़ा तो चिंता भी बढ़ती गई। जोतेश्वर मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र भी जब इस घटना की जद में आए और बहुमंजिला होटल माउंट व्यू, मलारी धंसने से तिरछे हुए तो हड़कंप मच गया। सरकार भी एक्टिव हुई और अब राहत बचाव के साथ कई ठोस कदम उठाये जा रहे हैं।












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