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Jabalpur: होटल में किडनी हॉस्पिटल का धंधा, आयुष्मान योजना के भर्ती मिले मरीज, फर्जीवाड़े की आशंका

जबलपुर, 26 अगस्त: एमपी के जबलपुर में हॉस्पिटल के नाम पर बड़ा खुलासा हुआ है। होटल में किडनी हॉस्पिटल संचालित होते मिला, जिसमें आयुष्मान योजना कार्डधारी करीब 70 मरीज भर्ती मिले। होटल के बाजू में सेन्ट्रल किडनी हॉस्पिटल भी हैं। पुलिस के इस भंडाफोड़ के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना के तहत यहां फर्जी तरीके से कई मरीजों को भर्ती किया गया। साथ ही अस्पताल संचालन के नियमों की धज्जियाँ भी उड़ाई गई।

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    होटल में हॉस्पिटल, आयुष्मान योजना फर्जीवाड़ा !

    होटल में किडनी अस्पताल

    होटल में किडनी अस्पताल

    अस्पताल के नाम पर धंधेबाजी करने वाले लोगों की इस देश में कमी नहीं है। ताजा मामला मप्र के जबलपुर का है, जहां सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल का धंधा एक होटल में फलफूल रहा था। पुलिस ने इस मामले का भंडाफोड़ किया, जहां तीन मंजिल होटल की इमारत में करीब 75 कथित मरीज भर्ती मिले। अस्पताल के प्राइवेट वार्ड की तरह होटल के कमरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। बरामदे और हॉल को जनरल वार्ड बना दिया गया।

    पलंग पर एक नहीं, दो-दो मरीज

    पलंग पर एक नहीं, दो-दो मरीज

    पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम, जब मौके पर पहुंची तो इस कथित अस्पताल का फर्जीवाड़ा देखकर उसकी आँखे भी फटी रह गई। हॉस्पिटल में पलंग पर एक ही मरीज भर्ती रहता है, लेकिन यहां कई पलंग पर एक साथ दो-दो मरीज आराम फरमाते मिले। भर्ती कुछ लोगों का हुलिया मरीजों जैसा लगे, उसका भी भरपूर इंतजाम था।

    सभी भर्ती मरीज आयुष्मान कार्डधारक

    सभी भर्ती मरीज आयुष्मान कार्डधारक

    जानकारी के मुताबिक हॉस्पिटल बने इस होटल में लगभग 77 लोग मिले, जिनके मरीज होने का दावा किया जा रहा है। जांच करने पहुंची टीम ने जब उनसे पूछताछ की, तो पता लगा सभी के पास आयुष्मान योजना के कार्ड है। सरकारी स्कीम के लाभ के तहत इलाज के लिए भर्ती हुए। बाकायदा यहां ICU वार्ड भी देखने को मिला। ICU वार्ड में गंभीर मरीज भर्ती रहते है, लेकिन यहां भर्ती कथित मरीज तो ऐसे लगे, जैसे होटल में आराम करने आए है।

    कोविड काल से चालू है यह धंधा

    कोविड काल से चालू है यह धंधा

    कोरोनाकाल के वक्त सरकार ने विशेष परिस्थितियों में कुछ अस्पतालों को अनुमति दी थी कि वह होटल, लॉज या अन्य स्थानों पर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था कर सकते है। सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल को भी अनुमति दी गई थी । कोरोना मरीजों के नाम शुरू हुआ धंधा तब से अभी तक यहां बेधड़क चलता रहा। कथित मरीजों को देखने के लिए नर्सिंग स्टाफ भी रखा गया, जो छापे के वक्त मौजूद था ।

    होटल के बाजू में है मूल अस्पताल

    होटल के बाजू में है मूल अस्पताल

    सेन्ट्रल इण्डिया किडनी हॉस्पिटल से बाजू में ही वेगा होटल है। किडनी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अश्विनी पाठक है। बेहद चालाकी से सजाए गए फर्जी अस्पताल के इस कारोबार की अब पुलिस भी जांच कर रही है। होटल के ग्राउंड फ्लोर में CT स्केन सेंटर भी खोला गया। एएसपी गोपाल खान्डेल का कहना है कि जिस ढंग से होटल को अस्पताल का रूप देकर सिर्फ आयुष्मान कार्डधारी कथित मरीजों को भर्ती कराया गया, उससे बड़े फर्जीवाड़े की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग भी कार्डधारी लोगों और अस्पताल से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहा है। जिसके बाद FIR दर्ज होगी।

    ये भी पढ़े-हॉस्पिटल अग्निकांड मामले की जांच पर HC की फटकार, ये आखिरी मौका, अब करेंगे स्वतंत्र एजेंसी पर विचार

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