Indian Railways: अमरकंटक एक्सप्रेस में जर्मन तकनीक के होंगे 12 स्लीपर और 6 AC कोच, मिलेगा शताब्दी जैसा मजा
दुर्ग-भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस से छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश की सफ़र करने वाले यात्रियों का इंतजार अब खत्म होने वाला हैं। 15 दिसंबर से LHB कोच के साथ ट्रेन फर्राटे भरेगी।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग से बाया जबलपुर-इटारसी के रास्ते भोपाल तक चलने वाली अमरकंटक एक्सप्रेस ट्रेन की रंगत बदलने वाली है। 15 दिसंबर से जिन एलबीएच हाईतकनीक के कोच इसमें लगाए जा रहे है, उसमें यात्रियों को 12 आरक्षित स्लीपर और 6 एसी कोच की सुविधा मिलेगी। ख़ास बात यह हैं कि पुरानी व्यवस्थाओं वाले कोच से चलने वाली इस ट्रेन के मुसाफिरों को जिन समस्याओं से जूझना पड़ता था, उन्हें अब ऐसा एहसास होगा, जैसे शताब्दी एक्सप्रेस में सफ़र कर रहे हैं।

15 अक्टूबर से बदल रही अमरकंटक एक्सप्रेस की रंगत
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली यात्रियों के लिए बेहद उपयोगी अमरकंटक एक्सप्रेस नई रंगत के साथ चलाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। 15 अक्टूबर से इसके कोच बदल जाएंगे। जबलपुर के रास्ते दुर्ग से भोपाल जाने वाली यह एक मात्र ट्रेन हैं। जो हर रोज पैक जाती है। रेलवे ने नए कोच के साथ इस ट्रेन को चलाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली है।

12 स्लीपर और 6 AC एलएचबी कोच
रेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना चलने वाली यह ट्रेन नए रूप में चलाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया था। इसमें जर्मन आधुनिक तकनीक के LHB कोच लगाए जाएंगे और पुराने कोच हटा लिए जाएंगे। दोनों दुर्ग-भोपाल दोनों तरफ से चलने वाले रैक में यह कोच लगेंगे। जिसमें यात्रियों की सुविधा के लिए 12 स्लीपर और 6 एसी कोच में आरक्षण की व्यवस्था रहेगी।

LHB कोच की ये है खासियत
अमरकंटक सुपर फ़ास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में लगाए जा रहे LHB कोच की कई विशेषताएं हैं। जबलपुर रेल मंडल के सीनियर DCM विश्वरंजन ने बताया कि वर्तमान में ट्रेन में लगे कोच के मुकाबले नए LHB कोच की लंबाई ज्यादा है। इस वजह से आरक्षित कोचों में बर्थ की संख्या भी बढ़ जाएगी। इससे यात्रियों लगभग 56 यात्रियों को और कन्फर्म टिकट मिल सकेगी। साथ ही इन नए कोच में जर्क भी कम कम लगेंगे।

शताब्दी एक्सप्रेस जैसा होगा AC कोच में फील
बताया गया कि सामान्य तौर पुराने कोच से चल रही ट्रेन जब स्पीड में होती हैं, तो AC कोच में नॉइज़ कई लोगों को परेशान करता हैं। लेकिन LHB कोच की जर्मन तकनीक की वजह से पटरियों और कोच के पहियों के बीच की आवाज कम रहेगी। AC कोच में सफ़र करने वाले मुसाफिरों को चलती ट्रेन में नॉइज़ महसूस तो होगी लेकिन पहले की तरह नहीं। साथ ही कंपन का भी ज्यादा अहसास नहीं होगा।

जबलपुर के यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा
यह ट्रेन सबसे ज्यादा जबलपुर और उसके आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी है। एक तो रायपुर-दुर्ग के लिए जबलपुर से एक मात्र यही ट्रेन है, दूसरी तरफ रात भर के सफ़र में यह ट्रेन अगली सुबह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और फिर भिलाई-दुर्ग पहुंचा देती हैं। इस रूट पर सफ़र करने वाले यात्रियों की भी बड़ी तादात हैं। इस वजह से यह ट्रेन डिमांडफुल है। इस रूट पर अक्सर सफ़र करने वाले यात्रियों को जब से यह खबर लगी कि अमरकंटक एक्सप्रेस में नए LHB कोच लगाए जा रहे है, वे बेहद खुश हैं। नए कोच में अब उन्हें टॉयलेट भी गंदे नजर नहीं आएंगे।









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