MP News: हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत का खुलासा, एक घोड़े की ग्लैंडर पॉजिटिव रिपोर्ट, जांच तेज
MP News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में हैदराबाद से लाए गए 57 घोड़ों में से 10 की मौत का मामला सुर्खियों में है। ताजा जानकारी के अनुसार, एक घोड़े की जांच रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव आई है, जिसने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
हालांकि, पशु चिकित्सा विभाग का कहना है कि यह ग्लैंडर जीरो पॉजिटिव है, जिसका अर्थ है कि इस घोड़े को कोई तत्काल खतरा नहीं था। फिर भी, यह अन्य घोड़ों और उनके संपर्क में आने वालों के लिए चिंता का विषय है। इस घटना ने पशु कल्याण और अवैध गतिविधियों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

ग्लैंडर पॉजिटिव रिपोर्ट और जांच
पशु चिकित्सा विभाग ने बताया कि दो घोड़ों के सैंपल दोबारा जांच के लिए हरियाणा के हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र भेजे गए थे। इनमें से एक घोड़े की मौत हो चुकी है, और उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि दूसरे घोड़े की रिपोर्ट ग्लैंडर पॉजिटिव पाई गई है। इस खुलासे के बाद विभाग ने अलर्ट जारी किया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। संभावना है कि भोपाल से पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम जल्द ही जबलपुर पहुंचेगी।
27 अप्रैल से 5 मई 2025 के बीच हैदराबाद से जबलपुर के रैपुरा गांव में 57 घोड़े ट्रक के जरिए लाए गए थे। इनमें से 7 से 13 मई के बीच 8 घोड़ों की मौत हो गई थी, जिसके बाद जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग सतर्क हो गया। सभी घोड़ों के सैंपल ग्लैंडर जांच के लिए हिसार भेजे गए थे, जिसमें 55 घोड़ों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अब 10वीं मौत और एक ग्लैंडर पॉजिटिव रिपोर्ट ने मामले को और जटिल कर दिया है।
ग्लैंडर: एक संक्रामक और खतरनाक बीमारी
ग्लैंडर एक संक्रामक जीवाणुजन्य रोग है, जो 'बर्कहोल्डरिया मैलेई' नामक जीवाणु के कारण होता है। यह मुख्य रूप से घोड़ों, गधों और खच्चरों को प्रभावित करता है, लेकिन यह मनुष्यों और अन्य जानवरों में भी फैल सकता है। इसके लक्षणों में नाक से स्राव, खांसी, तेज बुखार, त्वचा के नीचे गांठें और अल्सर शामिल हैं, जो सांस लेने में कठिनाई का कारण बनते हैं। यह बीमारी दूषित भोजन या पानी के माध्यम से फैलती है। ग्लैंडर की संभावना को देखते हुए, जिला प्रशासन ने सभी घोड़ों को आइसोलेट करने और उनकी देखरेख के लिए डॉक्टरों की एक टीम तैनात करने के निर्देश दिए थे।
घोड़ों की मौत का रहस्य और HPSL कनेक्शन
यह मामला तब और विवादास्पद हो गया, जब पशु कल्याण संगठन पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) ने दावा किया कि ये घोड़े हैदराबाद में हॉर्स पावर सुपर लीग (HPSL) चलाने वाले सुरेश पलादुगू और उनके सहयोगियों के हैं। PETA की कार्यकर्ता सिमरन ईशर और जयपुर की लवान्या शेखावत ने बताया कि हैदराबाद रेसकोर्स में इन घोड़ों का उपयोग ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए किया जा रहा था, जिसमें फिलीपींस में बैठे लोग लाखों-करोड़ों रुपये का दांव लगाते थे।
लवान्या शेखावत ने पिछली जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि 20 दिनों में तैयार की गई 300 पन्नों की रिपोर्ट की विश्वसनीयता संदिग्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तेलंगाना सरकार द्वारा HPSL पर छापेमारी के बाद सबूत मिटाने के लिए इन घोड़ों को अवैध रूप से जबलपुर भेजा गया। लवान्या ने मेनका गांधी के साथ इस मामले पर चर्चा की और दोबारा जांच की मांग की है।
अवैध परिवहन और लापरवाही
जांच में सामने आया कि घोड़ों को हैदराबाद से जबलपुर लाने के लिए आवश्यक मेडिकल क्लीयरेंस और अंतर्राज्यीय परमिट नहीं लिए गए थे। रैपुरा गांव में इन्हें एक निजी अस्तबल में रखा गया, जहां देखरेख की स्थिति बेहद खराब थी। टीन शेड के नीचे गर्मी, अपर्याप्त खानपान और देखभाल की कमी ने घोड़ों की हालत बिगाड़ दी। PETA ने यह भी आरोप लगाया कि इन घोड़ों को स्टेरॉयड और ड्रग्स दिए जाते थे ताकि वे रेस में तेज दौड़ सकें, जिसने उनकी सेहत को और नुकसान पहुंचाया।
जबलपुर के रैपुरा गांव निवासी सचिन तिवारी, जिन्हें इन घोड़ों का केयरटेकर बताया जा रहा है, ने दावा किया कि वे एक हॉर्स ट्रेनिंग और ब्रीडिंग सेंटर खोलना चाहते थे। हालांकि, उनके पास घोड़ों को लाने की मेडिकल स्वीकृति या अन्य दस्तावेज नहीं थे।
जांच और कानूनी कार्रवाई
जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने 13 मई को पशु चिकित्सा विभाग को जांच का जिम्मा सौंपा था। तीन सदस्यीय टीम (डॉ. मनोज वैश्य, डॉ. विष्णु गुप्ता, और डॉ. संजय गुप्ता) ने 20 दिनों में 300 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की, जिसे राज्य सरकार को भेजा गया। मेनका गांधी की सूचना पर जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया। 23 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सिमरन ईशर ने जनहित याचिका दायर की, जिसमें इस मामले की गहन जांच की मांग की गई। समर वेकेशन के बाद इस पर सुनवाई होगी।
पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रफुल्ल मून ने बताया कि ग्लैंडर की संभावना को देखते हुए सभी घोड़ों और उनके संपर्क में आए 8 व्यक्तियों के ब्लड सैंपल हिसार भेजे गए थे। अब तक 44 घोड़ों की रिपोर्ट निगेटिव आई है, और शेष की प्रतीक्षा है। मृत घोड़ों का पोस्टमॉर्टम ग्लैंडर प्रोटोकॉल के कारण नहीं किया गया।
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