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'चुनाव आचार संहिता' लागू है, Social Media पर पोस्ट ही नहीं, ये काम भी करने के पहले पढ़ ले ये खबर

Election Code of Conduct: मोबाइल पर अंगुलियों की ऐसी आदत हो गई हैं, जब तक न चले तो दिनचर्या खाली-खाली सी लगने लगती हैं। वाट्सएप, फेसबुक समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का बेजा इस्तेमाल करने वाले चुनावी राज्यों के लोगों के लिए ये काम की खबर हैं।

आप किसी मुगालते में न रहे, कि अपने राज्य-शहर में लागू आचार संहिता के दौरान जो जी में आया वह पोस्ट कर दिया और कोई दिक्कत नहीं होगी। यह ओवर कॉन्फिडेंस आपको जेल भी भिजवा सकता हैं। लिहाजा इस आर्टिकल को पूरा ध्यान से बढ़ ले। आप जानेंगे कि चुनाव खत्म होने तक किस तरह की पोस्ट-मैसेज से आपको परहेज करना हैं।

मध्य प्रदेश समेत 5 राज्यों मिजोरम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान में चुनाव का ऐलान होते ही आचार संहिता प्रभावशील हैं। इसके साथ ही धार्मिक त्यौहारों का भी मौसम हैं। लिहाजा हर राज्य में प्रशासन ने धारा 144 के प्रावधानों के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं।

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मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी जिला दण्डाधिकारी एवं कलेक्टर सौरभ कुमार सुमन ने स्पष्ट किया है कि व्हाट्सएप, फेसबुक, हाईक, एक्स, इंस्टाग्राम, एसएमएस जैसे सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का दुरुपयोग कर धार्मिक, सामाजिक, जातिगत भावनाओं विद्वेष को भड़काते हुए यदि कोई पाया जाएगा, तो उसके खिलाफ सख्त क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आदेश में कहा है कि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर ऐसे आपत्तिजनक एवं उन्माद फैलाने वाले संदेश, फोटो, ऑडियो-वीडियो प्रसारित या फारवर्ड नहीं कर सकेगा जिनसे धार्मिक, सामाजिक, जातिगत भावनायें भड़क सकती हैं या सांप्रदायिक विद्वेष पैदा हो सकता है।

ग्रुप एडमिन जिम्मेदार
आदेश के मुताबिक कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर ऐसी किसी भी पोस्ट को कमेंट, लाइक, शेयर या फॉरवर्ड नहीं कर सकेगा, जिनसे धार्मिक, जातिगत एवं सामाजिक विद्वेष की भावनायें भड़क सकती हों। आदेश में कहा गया है ग्रुप एडमिन की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वह ग्रुप में इस प्रकार के संदेशों को रोके। इसका उल्लंघन करने होने पर ग्रुप एडमिन भी उतना ही जिम्मेदार माना जाएगा, जितना उस ग्रुप में जुड़ा दोषी व्यक्ति। ऐसा विघ्नसंतोषी तत्वों की कोई भी प्रशासन को शिकायत भी कर सकता हैं।

10 बार सोच लेना लाइक, शेयर करने के पहले
कोई भी व्यक्ति अफवाह या तथ्यों को तोड़ मरोड़कर भड़काने अथवा उन्माद पैदा करने वाले संदेश प्रसारित नहीं कर सकेगा जिनसे लोगों या समुदाय विशेष में हिंसा या गैर कानूनी गतिविधियां उत्पन्न हो सकती हों। ऐसे सन्देश लाइक, शेयर या फॉरवर्ड भी नहीं किये जा सकेंगे। न हीं ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित किया जा सकेगा। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने जारी यह प्रतिबंधात्मक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। यह आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा। इस आदेश का उल्लंघन करने की दशा में संबंधित के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 188, साइबर विधि तथा अन्य अधिनियम के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कोई भी व्यक्ति या समुदाय ऐसे संदेशों को प्रसारित नहीं कर सकेगा जिसे किसी व्यक्ति संगठन समुदाय को एक स्थान पर एक राय होकर जमा होने या कोई विशेष कार्य गैर कानूनी गतिविधियों को करने के लिए कहा गया हो तथा जिससे कानून-शांति व्यवस्था भंग होने की प्रबल संभावना विद्यमान हो।

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