डिंडौरी की वन भूमि बनी अखाड़ा, बैगा आदिवासियों और वन कर्मियों के बीच खिंची तलवार
डिंडौरी, 15 सितंबर: जिले के सिमरधा गांव के बैगा आदिवासी और वन कर्मियों के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। वन भूमि पर लहलहाती फसलों के मालिक आदिवासियों को वन विभाग अतिक्रमणकारी मान रहा है, दूसरी तरफ आदिवासी संबंधित भूमि को पट्टों के आधार पर मालिकाना हक़ जता रहे हैं। दोनों के बीच उस वक्त तनाव बढ़ गया, जब वन कर्मियों ने सैकड़ों मवेशियों को यहां की फसलों को चरने के लिए छोड़ दिया। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

फसल चरा रहे वन कर्मियों से भिड़े आदिवासी
मप्र के डिंडौरी जिले में सिमरधा गांव है। करीब 15 हेक्टेयर जमीन को लेकर यहां लम्बे वक्त से विवाद चला रहा है। जिसमें से आधी भूमि से बैगा आदिवासियों को बेदखल कर दिया गया, लेकिन बाकी बची भूमि पर आदिवासी अभी भी मालिकाना हक़ जताते हुए कृषि कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में यहां की इस भूमि पर धान, कोदो, कुटकी की फसल बोई गई थी। बैगा आदिवासियों और वन कर्मियों में उस वक्त विवाद बढ़ गया, जब लहलहाती फसलों को चरने के लिए यहां वन कर्मियों ने मवेशियों को छोड़ दिया। दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ।

वन विभाग आदिवासियों को मानता है अतिक्रमणकारी
जिस भूमि पर फसलों को बोया गया है, उसे वन विभाग अपनी होने का दावा कर रहा है। उसका कहना है कि जिले के राजस्व रिकॉर्ड में जमीन वन विभाग के नाम दर्ज हैं। वर्षों से बैगा आदिवासियों ने उस पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। कई बार समझाइश देने के बाबजूद आदिवासी उक्त भूमि पर फासले बो रहे है। कई बार जगह खाली करने के लिए नोटिस भी दिए गए, लेकिन वह आज भी डटे हैं।

आदिवासियों की दलील पट्टे पर मिली जमीन
इधर बैगा आदिवासी संबंधित भूमि पर अपना मालिकाना हक़ जता रहे हैं। गांव के भादू सिंह, बलवीर, माहू, तिह सिंह बैगा का कहना है कि वे यहां पिछले 40 साल से खेती करते आ रहे है। उनके पास संबंधित जमीनों के पट्टे है। लेकिन वन विभाग लगातार ज्यादती कर रहा हैं। मेहनत से बोई गई लाखों की खड़ी फसल को मवेशियों से चरवा दिया गया। जब इस बात का विरोध किया गया तो वन कर्मियों ने उनके साथ मारपीट भी की। अब ये लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

SDM से की शिकायत, मुआवजे की मांग
वन कर्मियों के साथ बैगा आदिवासियों की झड़प होने के बाद मामला शांत नहीं हुआ। पीड़ित किसान एसडीएम दफ्तर पहुंचे और वन विभाग की शिकायत की। इन लोगों ने दोषी वन कर्मी जिन्होंने मारपीट की और विरोध करने की बाबजूद मवेशियों को फसलों के बीच छोड़ दिया, उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। साथ ही पीड़ितों ने फसलों के नुकसान का मुआवजा भी माँगा है।

2019 में खारिज कर दिया था पट्टे का दावा
बताया जाता है कि यहां करीब तीन पहले भी इसी तरह विवाद की स्थितियां बनी थी। अदालत ने आदिवासियों के पट्टे खारिज करने के निर्देश दिए थे। लगभग 2.59 लाख आदिवासियों को ऐसी भूमियों से बेदखल करने कहा गया था। उस वक्त सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए सर्वे कराने की बात कही थी। लगभग तीन साल का वक्त बीतने को है, लेकिन इस मामले में कोई निर्णय नहीं निकल पाया। जिसका खामियाजा इन गरीब किसान आदिवासियों को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन वन विभाग से विवाद के हालात बन रहे हैं।












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