Jabalpur News: अब घर बैठे मिलेगी कोर्ट केस की प्रति, जस्टिस रोहित आर्या ने की ई-कोर्ट कमेटी कार्यों की समीक्षा

मध्य प्रदेश में अब घर बैठे कोर्ट केस की कॉपी मुहैया होगी। ई-कोर्ट व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा रहा हैं। इसके लिए गठित कमेटी के कार्यों की जस्टिस रोहित आर्या ने समीक्षा की।

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Copy of court case available at home: हाई कोर्ट जस्टिस रोहित आर्या ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश की ई-कोर्ट कमेटी सभी के सहयोग से अच्छा कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि हाई कोर्ट द्वारा लागू किये गये प्रोजेक्ट ई-सर्टिफिकेट कॉपी की प्रशंसा देश में की जा रही है। प्रदेश के इन्टीग्रेटेड वीडियो सर्विलांस सिस्टम (आईवीसीएस) की भी तारीफ की जा रही है। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को आमजन को सहज तरीके से न्याय उपलब्ध कराने ई-कोर्ट संबंधी सभी पेंडिंग कार्यों को तत्परता से पूरा करने के निर्देश दिए।

ई-कोर्ट कमेटी के कार्यों की समीक्षा

ई-कोर्ट कमेटी के कार्यों की समीक्षा

जस्टिस आर्या प्रशासन अकादमी में ई-कोर्ट कमेटी के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार फसाहत काजी भी मौजूद रहे। इंटेरोपेरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) की समीक्षा में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि बेहतर इन्वेस्टीगेशन के लिये पुलिस विभाग में अधीनस्थ अधिकारियों को एक हजार टेबलेट दिये गये हैं। साथ ही 26 हजार टेबलेट और प्रदान करने की कार्यवाही चल रही है।

ICJS सिस्टम को बनाया जाएगा और प्रभावी

ICJS सिस्टम को बनाया जाएगा और प्रभावी

एडीजी एससीआरबी चंचल शेखर ने आईसीजेएस सिस्टम को प्रभावी बनाने प्रदेश में किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार को ई-विवेचना एप के लिये देश में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ई-चालान और पीओएस मशीन से 27 करोड़ रूपये से अधिक की वसूली की गई है। जस्टिस आर्या ने समय-समय पर ऑडिट करने और डाटा अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने आईसीजेएस सिस्टम को और अधिक पुख्ता बनाने एनआईसी भोपाल के अधिकारियों को पुणे के अधिकारियों से चर्चा करने भी कहा। बताया कि आवश्यकता होने पर राज्य स्तरीय ई-कोर्ट कमेटी की बैठक में लिये गये निर्णयों से उन्हें भी अवगत कराया जाए।

बढ़ाई जाए फॉरेंसिक साइंस लेब

बढ़ाई जाए फॉरेंसिक साइंस लेब

पुख्ता विवेचना के लिये फॉरेंसिक साइंस लेब की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिये गए। अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजौरा का कहना है कि ग्वालियर सहित 4 लेब कार्य कर रही है। रीवा और रतलाम में भी लेब के लिये स्वीकृति मिल गई है। वर्तमान में प्रति माह 600 सेम्पल की जाँच की जा रही है। पहले मात्र 250 की ही जाँच हो पा रही थी। जस्टिस श्री आर्या ने इसे बढ़ा कर 1000 प्रतिमाह तक करने के निर्देश दिए है। बैठक में यह बात भी सामने आई कि मानव संसाधन के अभाव में ई-कोर्ट कमेटी के निर्देशों के पालन में कठिनाई हो रही है।

प्राइमरी हेल्थ सेंटर में भी हो MLC और PM की सुविधा

प्राइमरी हेल्थ सेंटर में भी हो MLC और PM की सुविधा

जस्टिस आर्या ने एनआईसी को बेहतर विवेचना के लिये सभी संबद्ध विभागों में बेहतर समन्वय के लिये सभी विभागों को एक डेशबोर्ड पर लाने की कार्यवाही करने को कहा। इससे विवेचना बेहतर होगी और सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। जस्टिस आर्य ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक एमएलसी और पोस्ट-मार्टम की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये कार्यवाही करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी मेन पावर प्रबंधन के लिये फायनेंस से चर्चा करने को कहा गया। ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा करते हुए प्रदेश की समस्त पंचायतों में ई-सेवा केन्द्र प्रारंभ करने के निर्देश दिये गए।

अगले 6 महीने में पूरे प्रदेश में ई-सेवा केंद्र

अगले 6 महीने में पूरे प्रदेश में ई-सेवा केंद्र

संचालक पंचायत राज की ओर से बताया गया कि प्रदेश की 3 हजार 600 पंचायतों में ई-सेवा केन्द्र शुरू हो चुके हैं। उन्होंने कमेटी को आश्वस्त किया कि अगले 6 माह में शेष पंचायतों में भी ई-सेवा केन्द्र शुरू कर दिये जायेंगे। जस्टिस आर्या ने बताया कि प्रदेश के हाई कोर्ट और दोनों खण्डपीठ में 22 करोड़ और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 60 करोड़ पेज डिजिटाइज किये गये हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव विधि विनोद कुमार द्विवेदी को वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर सभी लंबित प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिये।

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