Blind Folded Walk में सूरदास बनकर निकले लोग, नेत्रहीनता का अहसास, जबलपुर में अनूठा अभियान
अंधत्व निवारण के लिए कई तरह के प्रयास हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक अनूठा कार्यक्रम हुआ, जिसमें सामजिक संस्थाओं ने ब्लाइंड फोल्डेड वॉक किया।

Blind Folded Walk: जिनके पास दृष्टि है वो भी जिन्दगी में कई बार जरुरी चीजों को अनदेखा करते हैं। जो दृष्टिबाधित है वो जिन्दगी के रास्ते खुद तय कर रहे हैं। ऐसी ही स्थितियों का अहसास कर यदि जरुरतमंदों को मदद दिलाने जबलपुर में कई संस्थाएं आगे आ रही हैं।
इसी मकसद से एक अभियान शुरू हुआ है। 'अंधत्व की अनुभूति' नाम से जबलपुर में सूरदास जयंती पर ब्लाइंड फोल्डेड वॉक भी हुआ। देखने में सक्षम लोगों ने आंखो में काली पट्टी बांधी और लगभग एक किलोमीटर पैदल चले। ख़ास बात थी इन लोगों को दृष्टिबाधित लोगों ने रास्ता दिखाया।

ब्लाइंड फोल्डेड वॉक अभियान नया नहीं है, लेकिन एमपी के जबलपुर में जिस उद्देश्य को लेकर कई संस्थाओं ने एक साथ कदमताल किया, उसकी भावनाएं पीड़ित कई लोगों की जिन्दगी को रोशनी से भरने वाली हैं। दादा वीरेंद्रपुरी नेत्र संस्थान यही कार्य कर रहा हैं।
संस्थान के प्रमुख सदस्य और प्रसिद्द नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन स्थापक ने बताया कि दुनिया में नेत्रहीनों की संख्या में एक चौथाई नेत्रहीनों की संख्या भारत में हैं। नेत्रदान का संकल्प हर साल सैकड़ों लोगों की जिंदगी संवार सकता हैं। इसके लिए जरुरी हैं, हम अंधत्व के अहसास को समझे।

जिनकी आंखों में रोशनी नहीं है, वह कैसा अनुभव करते हैं? यह बताने के लिए कुछ संस्थाओं के लोगों ने ब्लाइंड फोल्डेड वॉक में हिस्सा लिया। करीब घंटे भर आंखो में काली पट्टी बांधकर जब कुछ लोग सड़क पर चले, तो उनको आंखों की कीमत भी समझ आई।
इसमें शामिल हुई सामाजिक संस्थाएं भी लोगों को जागरूक कर रही हैं। आंखों से संबंधित रोग और उनकी देखभाल संबंध में भी जानकारी दी जा रही हैं। संयुक्त प्रयासों से निर्धन, बेसहारा पीड़ित लोगों की आंखों के निशुल्क ऑपरेशन भी किए जा रहे हैं। कोशिश है कि अंधत्व का शिकार हो रहे लोगों के बढ़ते ग्राफ में कमी आ सकें।












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