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भाई की हुई मौत तो भयभीत हुआ इस देश का पीएम, डर से बदल डाली अपनी जन्मतिथि

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नामपेन्ह, 19 मईः कंबोडिया के प्रधान मंत्री हुन सेन ने अपनी जन्मतिथि को बदलने का फैसला किया है। ऐसा निर्णय उन्होंने अपने भाई की मृत्यु के बाद लिया है। चीनी राष्ट्रपति हुन सेन ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने कुछ दशकों तक गलत दिन का इस्तेमाल किया है। लेकिन अब वह अपनी आधिकारिक जन्म तिथि को उस दिन में स्थानांतरित करने का फैसला कर रहे हैं, जब वह वास्तव में पैदा हुए थे।

भाई की मौत के बाद किया फैसला

भाई की मौत के बाद किया फैसला

कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने कहा कि उन्होंने नाम बदलने पर विचार 5 मई को अपने बड़े भाई की मृत्यु के बाद किया। प्रधानमंत्री हुन सेन के बड़े भाई की बीते 5 मई को हृद्य गति रूकने से तब मौत हो गई थी, जब वे अपना सिंगापुर से अपना इलाज करा कर लौट रहे थे। उन्हें संदेह है कि गलत जन्मतिथि होने की वजह से उनके भाई की मौत हुई। उनका अंदेशा है कि गलत जन्मतिथि होने के कारण चीनी राशि कैलेंडर में संघर्ष हुआ जिससे ऐसा हादसा हुआ।

चीनी राशिफल को अनदेखा करना भूल

चीनी राशिफल को अनदेखा करना भूल


हुन सेन ने कहा कि उनकी दो जन्म तिथियां थीं। एक 4 अप्रैल, 1951 को और दूसरी 5 अगस्त, 1952 को। उनका अनुमान है कि बाद वाली जन्मतिथि ही सही है। उनका कहना है कि गलत जन्मतिथि का उपयोग करने के पीछे की वजह एक प्रशासनिक त्रुटि थी। उन्होंने कहा कि चीनी राशिफल को अनदेखा करना भूल होगी। हुन सेन ने कहा कि उन्होंने कानून मंत्री को पहले ही इस बारे में बता दिया है और अब वह अपनी जन्मतिथि में बदलाव करने जा रहे हैं।

जल्द ही होगा जन्मतिथि में बदलाव

जल्द ही होगा जन्मतिथि में बदलाव

प्रधानमंत्री हुन सेन ने कहा कि जब कागजी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और उनकी जन्मतिथि में बदलाव हो जाएगा तो वे जनता को इसके बारे में सूचित करेंगे और इसके साथ ही वह बाकी देशों को भी इसके बारे जानकारी देंगे। बतादें कि कंबोडिया में लोगों के लिए दो जन्मदिन होना आम बात है। वहां 50 वर्ष या उसके अधिक उम्र के अधिकांश लोगों के 2 जन्मदिन होते हैं। इसकी वजह खमेर रूज का सैन्य शासन है। खमेर रूज शासन के वर्षों के दौरान 1975 से 1979 तक कई लोगों ने अपने आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र खो दिए थे।

खमेर रूज क्या था

खमेर रूज क्या था


खमेर रूज कम्बोडियाई साम्यवादी आंदोलन था। इसके नेता का नाम सलोथ सार था जिसे लोग पोल पॉट के नाम से जानते थे। सलोथ सार द्वारा देश को शुद्ध करने के प्रयास के परिणामस्वरूप अनुमानत: 17 से 25 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। सलोथ सार 1975 में कंबोडिया की सत्ता हासिल की थी। मार्क्सवादी नेता सलोथ सार कंबोडिया को ग्रामीण यूटोपिया बनाना चाहता था। उसने शहरों से हटाकर लोगों को गांवों में बसाना शुरू किया। धन और निजी संपत्ति रखना बंद कर दिया गया। उसके शासन में किसी भी धर्म को मानने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

लाखों लोगों ने गंवाई जान

लाखों लोगों ने गंवाई जान


सलोथ सार ने नई शुरुआत के लिए 'शून्य वर्ष' घोषित कर दिया और अपने नागरिकों को दुनिया से अलग-थलग कर दिया। शहर खाली कराए जाने लगे। लोगों को गांवों में बसाया जाने लगा। खुद को बुद्धिजीवी मानने वालों को मार दिया गया। इस दास श्रम, कुपोषण, खराब चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त प्रभाव और मृत्युदंड के चलते कम्बोडिया की लगभग 21% जनसंख्या असमय मौत के मुंह में समा गई थी। 1979 में जब पड़ोसी वियतनाम ने कंबोडिया पर आक्रमण किया तो सलोथ सार दक्षिण पश्चिम कंबोडिया के जंगलों में भाग गया। जिसके बाद खमेर रूज सरकार का पतन हो गया।

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English summary
Cambodian Prime Minister Hun Sen said Tuesday that he has decided to shift his official date of birth to the day he was actually born
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