मां-बाप ने अपशकुन मानकर छोड़ा अनाथ, आज बनी दुनिया की टॉप मॉडल
ज्वेली एबिन जब बहुत छोटी थी तो एक खतरनाक बीमारी की शिकार बन गई। उस बीमारी का नाम था एब्लिनिज्म। इस बीमारी से डरकर ज्वेली एबिन को उनके मां-बाप ने हमेशा के लिए छोड़ दिया।
नई दिल्ली, मई 08: जब ज्वेली एबिन बहुत छोटी थी तभी उसके माता-पिता ने उसका त्याग कर दिया। ज्वेली एबिन को एक अनाथालय में छोड़कर उसके माता-पिता चले गये और ज्वेली एबिन एक अनाथ की तरह अनाथालय में रहने लगी। लेकिन, कहते हैं ना नसीब किसी का नहीं छीना जा सकता है, ज्वेली एबिन के साथ भी यही हुआ। ज्वेली एबिन एक दिन जाकर दुनिया की टॉप मॉडल्स में से एक होगी, किसी ने सोचा नहीं था। आज ज्वेली एबिन इस दुनिया की टॉप मॉडल्स में से एक मानी जाती है।

मां-बाप ने अनाथालय में छोड़ा
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेली एबिन जब बहुत छोटी थी तो एक खतरनाक बीमारी की शिकार बन गई। उस बीमारी का नाम था एब्लिनिज्म। इस बीमारी से डरकर ज्वेली एबिन को उनके मां-बाप ने हमेशा के लिए छोड़ दिया और एक अनाथालय के दरवाजे पर छोड़ दिया और फिर अनाथालय ही ज्वेली एबिन का घर बन गया। अनाथालय में ही ज्वेली एबिन का बचपन बीतने लगा। लेकिन, अब ज्वेली एबिन विश्व प्रिसिद्ध मॉडल बन चुकी हैं। कुछ दिन पहले विश्व प्रिसिद्ध प्रितिष्ठित मैग्जीन 'वोग' में ज्वेली एबिन नजर आई थीं। इतना ही नहीं, अनाथालय में किसी तरह पलने वाली मॉडल ज्वेली एबिन आज दर्जनों बड़े बड़े ब्रांड्स की ब्रांड एंबेसडर हैं और अब उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है।
नहीं पता है जन्म की तारीख
ज्वेली एबिन आज पूरी दुनिया में मशहूर हो चुकी हैं और विश्व के बड़े बड़े ब्रांड को रिप्रजेंट करती हैं। कई डिजाइनर्स की वो पहली पसंद हैं लेकिन ज्वेली एबिन को अपने जन्म की तारीख नहीं पता है। अंदाजा लगाया जाता है कि ज्वेली एबिन अभी करीब 16 साल की हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक बीमारी से पीड़ित होने के बाद ज्वेली एबिन को उनके माता-पिता ने चीन के अनाथालय में छोड़ दिया। जहां कुछ दिन रहने के बाद नीदरलैंड के एक कपल ने उन्हें गोल ले लिया और फिर वो अपने नये परिवार के साथ नीदरलैंड आ गईं और फिर धीरे धीरे ज्वेली एबिन की जिंदगी बदलने लगी।
मॉडलिंग में बनाया मुकाम
ज्वेली एबिन के मुताबिक अनाथालय से निकलकर वो नीदरलैंड आ गईं और फिर उनकी जिंदगी ने करवट ले लिया। सबसे पहले उनका संपर्क हांगकांग के एक डिजाइनर से हुआ और फिर उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कैरियर बनाने की ठानी और फिर वक्त बीतने के साथ वो काफी मशहूर हो गईं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेली एबिन बताती हैं कि उन्हें उनका नाम अनाथालय में ही दिया गया और उनके नाम का मतलब होता है 'बर्फ जैसी खूबसूरत'।

'एल्बिनिज्म' को माना जाता है अभिषाप
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक ज्वेली एबिन ने जब जन्म लिया था उसके कुछ समय बाद ही डॉक्टरों ने बताया कि वो एल्बिनिज्म बीमारी से पीड़ित हैं। जैसे ही उनके मां-बाप को अपनी बेटी के इस बीमारी से पीड़ित होने की बात पता चली. उन्होंने एक अनाथालय के दरवाजे पर अपनी बेटी को छोड़ दिया। दरअसल, चीन में एल्बिनिज्म बीमारी से पीड़ित बच्चे को अभिषाप माना जाता है और इसीलिए ज्वेली एबिन को उनके असली मां-बाप ने बचपन में छोड़ दिया। अपनी बीमारी को लेकर ज्वेली एबिन बताती हैं कि जब उनका जन्म हुआ था उस वक्त चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी थी, लिहाजा उनके जैसे बच्चे को उस वक्त चीन में या तो मार दिया जाता था या फिर अनाथ छोड़ दिया जाता था। उनका रंग अलग है और इसे वो अभिषाप नहीं बल्कि अपने लिए वरदान मानती हैं। ज्वेली एबिन ने बीबीसी को कहा कि वो मॉडलिंग के जरिए एल्बिनिज्म बीमारी के बारे में लोगों को जागरूत करती हैं।

क्या होता है एल्बिनिज्म ?
एल्बिनिज्म एक तरह का स्किन से जुड़ी हुई बीमारी यानि ये एक चर्मरोग होता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे की स्किन और बालों का रंग बदलकर सफेद या फिर पीला पड़ जाता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे के शरीर की त्वचा काफी सेंसेटिव होती है वहीं आंखें भी काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती हैं। लिहाजा इस बीमारी से पीड़ित बच्चे को चीन में अपशकुन माना जाता है और अगर कोई ऐसे लक्षणों के साथ बच्चा जन्म लेता है तो घरवाले उसे अनाथालय छोड़ आते हैं वहीं इस बीमारी से पीड़ित बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो उनके बालों को रंगना पड़ता है ताकि किसी को इस बीमारी के बारे में पता नहीं चल सके। ज्वेली एबिन अब इस बीमारी के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रही हैं और इसमें उनके परिवार का पूरा साथ उन्हें मिलता है।












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