खतरनाक राह पर चीन! क्या शी जिनपिंग की सोच 'ड्रैगन' को बर्बाद कर देगा?

शी जिनपिंग चीन के पहले नेता हैं जिनका जन्म 1949 के बाद हुआ था, जब माओ की कम्युनिस्ट शक्तियों ने एक लंबे गृहयुद्ध के बाद सत्ता संभाली थी।

चीन में शी जिनपिंग (xi jinping) ने जब से सत्ता संभाली है तब से लेकर अब तक देश में गहरा आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन हुआ है। देश में बाजारों, अर्थव्यवस्था का आधार चीन को मौलिक रूप से बदल कर रख दिया है। पिछले दशकों से आज की तुलना करें तो चीन का बड़े पैमाने पर अर्थव्यवस्था और सामाजिक क्षेत्र में भारी परिवर्तन हुआ है। 1978 में अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद से चीन में पर कैपिटा इनकम 34 तक जा पहुंची है। देश में 10 करोड़ लोग मध्यमवर्ग परिवार से आते हैं। इन कुछ वर्षों में देखे तो शिक्षा नीति और शहरीकरण ने देश का चेहरा अलग तरह से बदल कर रख दिया। लोगों का मानना है कि शी की नीतियों की वजह से चीन में आर्थिक गैरबराबरी की खाई और ज्यादा गहरी होती चली गई।

पूंजीपतियों से शी को डर

पूंजीपतियों से शी को डर

शी जिनपिंग चीन के पहले नेता हैं जिनका जन्म 1949 के बाद हुआ था, जब माओ की कम्युनिस्ट शक्तियों ने एक लंबे गृहयुद्ध के बाद सत्ता संभाली थी। शी जिनपिंग ने जब चीन की सत्ता संभाली तो उन्हें लगा कि आर्थिक उदारीकरण चीन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। उनका मानना था कि कम्युनिस्ट पार्टी पुंजीवाद, उपभोक्तावाद की प्रभुत्व वाले समाज के जाल में फंसकर रह जाएगा। इससे कम्युनिस्ट का वजूद न के बराबर होगा। इसलिए उन्होंने आर्थिक क्षेत्र से जुड़े सभी क्षेत्रों पर प्रहार किया। प्राइवेट सेक्टर और करोड़पतियों को परेशान किया जाने लगा।

शी के विरोध से कम्युनिस्ट मजबूत

शी के विरोध से कम्युनिस्ट मजबूत

शी की सरकार ने कम्युनिस्ट विचारधारा को पुनर्जीवित करते हुए और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए पश्चिमी विरोधी विचारों को आगे किया। उन्होंने अपनी सत्ता को बरकरार और मजबूत करने के लिए जो भी कड़े फैसले लेने पड़े, उन्होंने लिए। उनके उदारीकरण की नीतियों से सबसे अधिक लाभ मध्यमवर्गी परिवारों को मिला।

माओ और शी के विचार

माओ और शी के विचार

माओ देश में पूंजीवाद का कम से कम भूमिका देखना चाहते थे। यह सोचा गया था कि मज़दूर देश का ढांचा संभालेंगे। किसान और मजदूर कम्युनिस्ट पार्टी के आधार थे। आज उन्हीं को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। न्यू मिडिल क्लास नाम का तबका उभरा है, जिसके पास पैसा है और उपभोक्तावाद में यकीन रखता है। ये सभी बातें माओ से दूर-दूर तक मेल नहीं खातीं।

चीन परेशान, दुनिया हैरान

चीन परेशान, दुनिया हैरान

वहीं, चीन में बढ़ते टेक्नोलॉजी का बाजर के कारण बच्चे आलसी होते जा रहे हैं। वे अपना समय वीडियो गेम खेलने में बर्बाद कर रहे हैं। इससे शी की सरकार भी काफी परेशान है। दूसरी तरफ चीन के आर्थिक विकास और प्रगति से पूरी दुनिया हैरान है। बीते साल अक्टूबर में जब कम्युनिस्ट पार्टी का अधिवेशन हुआ था, उसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग की विचारधारा को संविधान में शामिल करते हुए उन्हें चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता और संस्थापक माओत्से तुंग के बराबर दर्जा दिया गया था।

जिनपिंग थॉट

जिनपिंग थॉट

चीन की वर्तमान अर्थव्यवस्था 'चीनी विशेषताओं वाले समाजवाद' पर आधारित है, जिसे 'जिनपिंग थॉट' भी कहा जाता है। लेकिन इसका मतलब क्या है और क्या यह कितना सफल रहा है यह सोचने क विषय है। चीन आज एक socialist economy with chinese characteristics के नाम से जानना चाहता है। यानी जिसमें मार्केट में एक सीमित आजादी के साथ सरकार का कड़ा नियम है।

शी के विचारों से मध्यमवर्गों को फायदा हुआ

शी के विचारों से मध्यमवर्गों को फायदा हुआ

वैसे चीन तकनीकी तौर पर एक साम्यवादी देश के तौर पर जाना जाता है। लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अर्थव्यवस्था के उस मॉडल पर भरोसा जताया जिसमें अमीर उद्योगपतियों को इस उम्मीद से प्रोत्साहित किया जाता है ताकि उसका फ़ायदा समाज के मध्य वर्ग और निचले तबकों तक पहुंचे। ड्रैगन को लगा कि अमीर लोगों को और पैसा वाला होने की इजाजत देने से समाज के सभी तबकों का फायदा होगा। काफी हद तक चीन की ये सोच कामयाब भी रही। देश में एक बड़ा मध्य वर्ग उभरा और समाज के सभी तबकों के लोगों के जीवन स्तर में पहले की तुलना में काफी सुधार देखा गया।

गैरबराबरी की खाई गहरी हो गई

गैरबराबरी की खाई गहरी हो गई

सत्तर के दशक की आर्थिक तंगी के दौर से निकल कर चीन उस मुकाम पर पहुंच गया, जहां वो सबसे ताकतवर देश अमेरिका को चुनौती दे रहा है। लेकिन इसके लिए उसे भारी कीमत भी चुकानी पड़ी। चीन में आर्थिक गैरबराबरी की खाई गहरी होती चली गई।

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