विरोधियों का खात्मा, सेना पर नियंत्रण, जानिए कैसे शी जिनपिंग ने किया देश पर कब्जा? मिले डरावने संकेत
शी जिनपिंग को अब चीन के अंदर घरेलू राजनीति में चुनौती देने वाला कोई नहीं बचा है, जिसका मतलब ये हुआ, कि अपने तानाशाही फैसलों की रफ्तार अब वो और तेजी के साथ बढ़ाएंगे।
हांगकांग, नवंबर 15: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने 8-11 नवंबर को अपनी छठी पूर्ण बैठक आयोजित की और अनुमान के मुताबिक ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रास्ते में जितने भी कांटे थे, उन सभी कांटों को अब हटा दिया गया है। इस बैठक के बाद अब यह तय हो गया है कि, अगले साल चीन में शी जिनपिंग तीसरी बार देश के राष्ट्रपति चुने जाएंगे और पार्टी के अंदर अब उन्हें चुनौती देने वाला कोई नहीं बचा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की इस बैठक के खत्म होने तक शी जिनपिंग का कद चीन के संस्थापक माओत्से तुंग से ऊंचा किया जा चुका था और चीन में 'हर चीज' का राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बनाया जा चुका था। तो फिर सवाल ये है कि, इस फैसले का असर क्या होगा और खुद चीन के लिए शी जिनपिंग का तानाशाह होना, कितना बड़ा खतरा है।

अनिश्चितकाल के राष्ट्रपति बने
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास में ये सिर्फ तीसरा ऐतिहासिक प्रस्ताव है, इससे पहले के दो प्रस्ताव माओत्से तुंग और देंग शियाओपिंग के तहत 1945 और 1981 में पेश किए गए थे। इसने अनिवार्य रूप से शी जिनपिंग को उन दोनों नेताओं के समकक्ष रखा गया है। प्रस्ताव के साथ संबद्ध यह था कि, क्या शी जिनपिंग अनिश्चित काल तक सत्ता में बने रहेंगे? तो इसका जवाब था, निश्चित रूप से हां। विज्ञप्ति में शी के जीवन भर के लिए नेता होने का कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन केंद्रीय समिति की मंजूरी निश्चित रूप से शी जिनपिंग को पद पर बने रहने की अनुमति देती है। यानि, अब शी जिनपिंग निश्चित तौर पर अनिश्चितकाल के लिए चीन के हर एक विभाग के राष्ट्रपति बन गये हैं। इसके साथ ही कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में शी जिनपिंग को हर एक अधिकार दे दिए गये हैं, यानि, चीन के अंदर अब उनका विरोध करने वाला कोई नहीं बचा है, जिसका मतलब ये हुआ, कि आने वाले वक्त में चीन और अमेरिका, चीन और भारत के बीच का विवाद काफी ज्यादा बढ़ना वाला है।

भारत-अमेरिका के लिए टेंशन
शी जिनपिंग को अब चीन के अंदर घरेलू राजनीति में चुनौती देने वाला कोई नहीं बचा है, जिसका मतलब ये हुआ, कि अपने तानाशाही फैसलों की रफ्तार अब वो और तेजी के साथ बढ़ाएंगे, यानि, भारत और अमेरिका के साथ चीन का तनाव और भी ज्यादा बढ़ने वाला है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की प्लेनम में 197 पूर्ण केन्द्रीय समिति के सदस्य और 151 वैकल्पिक सदस्य शामिल हुए थे और इस बैठक को कम्युनिस्ट पार्टी के 100 साल पूरा होने पर शताब्दी वर्ष के तौर पर चिन्हित किया गया था। इस दौरान पिछले 100 सालों के इतिहास को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया। जिसमें माओत्से तुंग ने 1949-76 तक समाजवादी नींव रखी, देंग शियाओपिंग ने सुधार और चीन के बाजार को दुनिया के लिए खोला और तीसरे हिस्से को शी जिनपिंग का हिस्सा बताया गया। और शी जिनपिंग के खाते में "चीनी राष्ट्र के महान पुनर्जागरण" का अध्याय जोड़ा गया। इसमें कहा गया है कि, चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद पर शी जिनपिंग ने नये विचार की शुरुआत की है।

बैठक के तीन प्रस्ताव
चाइना नेइकन न्यूजलेटर के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में जारी प्रस्ताव के तीन उद्देश्य हैं, पहला उद्येश्य चीन के अतीत के बारे में एक व्यापक वर्णन और चीन के भविष्य के लिए एक उद्येश्य प्राप्त करना और फिर शी जिनपिंग के नेतृत्व में अपने लक्ष्य को प्राप्त करना, दूसरा उद्येश्य सीसीपी में शी जिनपिंग की भूमिका को मजबूत करना और उन्हें अगले साल की पार्टी कांग्रेस में अपना सर्वोपरि स्थान बनाए रखने में सक्षम बनाना, और तीसरा, भविष्य के लिए एक विजन तैयार करना, जिसमें घर में समान समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ताकत को बढ़ाना शामिल है। कम्युनिस्ट पार्टी के इस संकल्प का पचास फीसदी हिस्सा शी जिनपिंग की प्रशंसा से भरा था और कॉमरेड शी जिनपिंग के हाथों में पूरी पार्टी को सौंप दिया गया और इसके साथ ही जो कम्युनिस्ट विचारधारा समाजवाद और स्वराज की बात करती है, उसे चीन में तिलांजलि दी दी गई।

डराने वाली चाटुकारिता
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी की इस तरह की चाटुकारिता डराने वाली है। निश्चित तौर पर शी जिनपिंग को चीन पर पूर्ण प्रभुत्व की स्थिति में ले आया गया है। शी जिनपिंग को एक ऐसे कोकून में छिपाया जा सकता है जो परस्पर विरोधी तथ्यों की अनदेखी करता है और आसानी से गलत अनुमान और संघर्ष का कारण बन सकता है। जैसा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में द जेम्सटाउन फाउंडेशन के एक वरिष्ठ फेलो विली वो-लैप लैम ने कहा, "छठी प्लेनम ने स्पष्ट रूप से वह हासिल कर लिया है जो उसने करने के लिए निर्धारित किया गया था, जो शी जिनपिंग की भूमिका को पार्टी, सरकार के लिए एकमात्र मार्गदर्शक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है और जो उन्हें 21वीं सदी में चीन का सर्वशक्तिशाली नेता और हर संस्थान, हर व्यक्ति का प्रमुख नियुक्त करता है"

चीन के एकमात्र सर्वशक्तिशाली नेता
कम्युनिस्ट पार्टी की इस बैठक के अंदर शी जिनपिंग की शानदार उपलब्धियों का वर्णन किया गया है और उन्हें भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, अत्यधिक गरीबी का उन्मूलन, एक "मध्यम रूप से समृद्ध समाज" की प्राप्ति, देंग की ओपन-डोर नीति का विकास, "चीन की प्रणाली का आधुनिकीकरण और शासन की क्षमता" और सुधार शामिल हैं, उनकी लिस्ट में ये काम दर्ज किए गये हैं। ऐसी उपलब्धियां बहस का विषय हैं। क्या शी जिनपिंह ने वास्तव में शासन प्रणाली और संस्थानों में सुधार किया है, या उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सभी अधिकार ग्रहण कर लिए हैं? शी उस ढेर में सबसे ऊपर हैं और सभी निर्णय लेते हैं। शी जिनपिंग को पहले से ही "सब कुछ का अध्यक्ष" उपनाम दिया गया है, क्योंकि उनके पास हर पाई में एक उंगली है। जैक मा को पिछले साल के अंत में हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज में एंट कॉरपोरेशन को सूचीबद्ध करने से रोकने और जुलाई में सभी निजी ट्यूटोरियल स्कूलों को गैर-लाभकारी संगठन बनने के लिए मजबूर करने वाले फैसले शामिल हैं तो शी जिनपिंग कोई भी फैसला अब किसी दूसरे से परामर्श कर या सलाह कर नहीं लेते हैं, जिसपर कोई चर्चा नहीं हुई।

'दुश्मनों' को मिटाने के लिए अभियान
चीन के पूर्व कद्दावर नेता जियांग और हू के कई अनुयायी अब शी जिनपिंग के सरकार में मंत्री स्तर पर या उससे ऊपर के पदों पर हैं, इसलिए यह समावेश उन नेताओं के लिए एक रियायत के तौर पर है, जिन्होंने मुंह बंद कर रखा है। विश्लेषक लैम ने निष्कर्ष निकाला है कि, "शी ने वास्तविक और संभावित दुश्मनों को मिटाने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना जारी रखा है, विशेष रूप से संवेदनशील राजनीतिक-कानूनी तंत्र में।'' लेकिन, उनका उनका ये भी मानना है कि, शी जिनपिंग का नेतृत्व का भविष्य अच्छी तरह से इस बात पर भी निर्भर हो सकता है, कि क्या वह चीन को परेशान करने वाली बहुआयामी समस्याओं को हल कर सकते हैं।" वहीं, न्यूज़ीलैंड में कैंटरबरी विश्वविद्यालय के एक राजनीतिक वैज्ञानिक, प्रोफेसर ऐनी-मैरी ब्रैडी मानती हैं कि, "शी जिनपिंग का को माओ/डेंग के बराबर खुद को ऊपर उठाते हुए देखना और शी जिनपिंग के विचार को माओत्से तुंग के विचार के समान ऊपर उठाना अविश्वसनीय है।'' उनका मानना है कि, ''घरेलू और विदेश नीति में 2012 से पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना पिछड़ गया है और शी जिनपिंग की यही प्राथमिक उपलब्धि है और देश में दमन बढ़ता जा रहा है।"

शी जिनपिंग कैसे बनाते हैं देश पर नियंत्रण?
दरअसल, सख्त नियंत्रण बनाए रखने के लिए शी जिनपिंग भी देश की सेना, पुलिस और कानूनी तंत्र पर निर्भर हैं। राजनीतिक-कानूनी व्यवस्था में चल रहे 'शुद्धिकरण' सुधार अभियान ने अकेले फरवरी-जुलाई 2021 से जांच और सजा के नाम पर देश में एक लाख 78 हजार 431 कर्मियों को हटा दिया गया है। इनमें से 1258 अधिकारी अलग अलग विभागों के प्रमुख हैं। जिनमें सार्वजनिक सुरक्षा उप मंत्री मेंग किंगफेंग, मेंग होंगवेई और सन लिजुन भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया था कि, 'षटयंत्र' के तहत ऐसा किया गया है और ज्यादा अधिकारी जिआंगसु प्रांत के थे और ये बताता है कि, शी जिनपिंग के प्रति हर अधिकारी आसक्त भी नहीं है।

दुनिया को युद्ध में धकेलेंगे शी जिनपिंग?
शी जिनपिंग के विचार में चीन बढ़ रहा है, जबकि पश्चिमी देशों के विकास में गिरावट आ रही है। शी जिनपिंग का मानना है कि, "समय और गति" उनके पक्ष में है, लेकिन आने वाले वर्षों में ताइवान एक महत्वपूर्ण फ्लैशपॉइंट बना हुआ है। ताइवान के लिए चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के दृष्टिकोण काफी भिन्न हैं, और निश्चित रूप से ज्यादातर ताइवान के लोग सीसीपी की कठोर एड़ी के नीचे नहीं आना चाहते हैं। चीन लगातार सैन्य कार्रवाइयों सहित ताइवान की ओर युद्ध के संकेत भेजना जारी रखे हुआ है। इसके अलावा, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच का विवाद भी चरम पर है, तो शी जिनपिंग ने भारत के खिलाफ भी मोर्चा खोल रखा है। यानि, घरेलू राजनीति को प्रभावित करने के लिए शी जिनपिंग विश्व को युद्ध के विध्वंस में घसीटने से भी बाज नहीं आएंगे, लिहाजा अब इस बात की उम्मीद कम ही है, कि शी जिनपिंग के रहते हुए चीन की आक्रामकता कम होगी और चीन शांति के रास्ते पर चलने की कोशिश भी करेगा।












Click it and Unblock the Notifications