Bitcoin, आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस बदल देंगे दुनिया, खत्म हो जाएगा नेतृत्व, US एजेंसी का दावा

वाशिंगटन। बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी मेनस्ट्रीम मार्केट में अपनी पैठ जमाने के लिए पूरी कोशिश कर रही हैं और वो शायद वो दिन दूर नहीं जब ये पेमेंट सिस्टम का हिस्सा हों। लेकिन इसके साथ ही डिजिटल करेंसी की बढ़त दुनिया में एक बड़े परिवर्तन की आहट भी दे रही हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की मानें तो आने वाले दशकों में क्रिप्टोकरेंसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी चीजें वैश्विक परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख देंगी।

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नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल ने ग्लोबल ट्रेंड्स 2040: ए मोर कंटेस्टेड वर्ल्ड में कहा गया है कि आने वाले दशकों में वैश्विक चुनौतियों और इसे लेकर संस्थानों और सिस्टम की प्रतिक्रिया की क्षमता के बीच भारी अंतर पैदा हो जाएगा। इसके चलते दुनिया में नेतृत्व की कमी होगी। रिपोर्ट में तो यहां तक कहां गया है कि दुनिया नेतृत्व विहीन हो सकती है। रिपोर्ट की खास बातें इस तरह हैं

डिजिटल मुद्रा यानि क्रिप्टोकरेंसी
अमेरिकी डॉलर और यूरो को बिटकॉइन जैसी डिजिटल मुद्राओं से खतरों का सामना करना पड़ेगा। डिजिटल करेंसी के प्रचलन में आने राज्य का मुद्दा पर नियंत्रण कमजोर होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, "डिजटल करेंसी मुद्रा विनिमय दरों और मुद्रा आपूर्ति पर देशों के नियंत्रण को कम करके मौद्रिक नीति के संचालन में जटिलता को बढ़ावा दे सकती है।"

कर्ज का दबाव
राष्ट्रीय सरकारों के पास बढ़ते ऋण बोझ और तेजी से विविध व्यापारिक नियमों के सामने जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए "कम लचीलापन" होगा।

जलवायु दबाव
जलवायु परिवर्तन राज्यों के भीतर सामाजिक विभाजन को बढ़ाएगा और अंतर्राष्ट्रीय तनावों को बढ़ाएगा। यह पानी की असुरक्षा के साथ-साथ पलायन के लिए दबाव बढ़ाएगा।

युद्ध के नए तरीके
राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी जिसके नतीजे में दुनिया में परमाणु प्रसार और अंतरराज्यीय संघर्ष का खतरा बढ़ेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस "मौजूदा हथियारों, सुरक्षा और प्रणालियों के प्रदर्शन को बढ़ाएगा।"

अंतरिक्ष की रेस
2040 तक चीन अंतरिक्ष में अमेरिका का सबसे कठिन प्रतिद्वंद्वी होगा। अनुमान लगाया गया है कि उस समय तक दुनिया के दूसरे देश चीन के नेतृत्व वाली अंतरिक्ष गतिविधियों का हिस्सा होंगे। वहीं चीन का बाईडू उपग्रह का नेविगेशन सिस्टम वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे पेंटागन समर्थित जीपीएस की जगह ले लेगा।

स्थायी लोकलुभावनवाद
जातीय, धार्मिक और विचारधाराओं के स्तर पर ध्रुवीकरण और मजबूत होगा। यह राजनीतिक शिथिलता को मजबूत करने और अस्थिरता के खतरे को बढ़ाएगा।

आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस प्रोपेगैंडा
रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल तकनीकों का प्रसार और आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस का विकास स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर दोनों के लिए "आबादी को प्रभावित करने, सोच में परिवर्तन करना और सामाजिक ध्रुवीकरण करने के लिए" दरवाजा खोलेगा।

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