दुनिया की सबसे महंगी दवाई को US में मिली मंजूरी, जानिए किस बीमारी की है दवा, क्या है कीमत?
Hemgenix से पहले स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी वाले शिशुओं के लिए नोवार्टिस एजी के ज़ोलगेन्स्मा दवा बनाई गई थी, जो अभी तक विश्व की सबसे ज्यादा कीमती दवाओं में शुमार थी।
World's most expensive drug: विश्व की सबसे महंगी दवाई को आखिरकार अमेरिका में मंजूरी दे दी गई है और अमेरिकी ड्रग कंट्रोलर विभाग ने सीएसएल बेहरिंग की हीमोफिलिया बी जीन थेरेपी को मंजूरी दे दी है। जिस दवा को मंजूरी दी गई है, वो विश्व की सबसे महंगी दवा की लिस्ट में सबसे आगे आ गई है और ये दवाई सूई के जरिए शरीर में इंजेक्ट की जाती है और इस दवाई के इस्तेमाल से हेमोफिलिया के रोगियों को नियमित उपचार से मुक्ति मिलती है, लेकिन इस दवा की कीमत इतनी ज्यादा है, कि हर किसी के लिए इस दवा का सेवन करना संभव नहीं है।

दुनिया की सबसे महंगी दवाई
अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग ने हीमोफिलिया का इलाज करने वाली दवा Hemgenix को मंजूरी दे दी है, जिसकी कीमत 3.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानि 28 करोड़ 64 लाख 33 हजार भारतीय रुपये है। यानि, इस दवा की एक खुराक के लिए मरीज को करीब 29 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, लिहाजा यह दुनिया की सबसे ज्यादा महंगी दवा बन जाती है। इस दवा के साथ दावा किया गया है, कि इस दवा के एक बार के इस्तेमाल के बाद फिर हीमोफिलिया के लिए कोई भी दूसरी दवा इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीएसएल बेहरिंग के हेमजेनिक्स दवा के इस्तेमाल के बाद यह रक्तस्त्राव की घटनाएं 54 प्रतिशत खत्म कर देता है, जो इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। इसने 94% रोगियों को फैक्टर IX के समय लेने वाले और महंगे इंजेक्शन से मुक्त कर दिया है, जो वर्तमान में संभावित घातक स्थिति, जिसमें रोगी के मौत तक पहुंचने की स्थिति भी शामिल है, उसे नियंत्रित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

इतनी महंगी दवा कौन इस्तेमाल करेगा?
अमेरिका के बायोटेक्नोलॉजी डायरेक्टर और लोनकार इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रैड लोनकर ने कहा कि, "हालांकि कीमत उम्मीद से थोड़ी ज्यादा है, लेकिन मुझे लगता है कि इस दवा के बिकने की काफी संभावना है, क्योंकि 1) मौजूदा दवाएं भी अच्छी खासी महंगी आती हैं, और 2) हीमोफीलिया के मरीज लगातार रक्तस्राव होने के डर में जीते हैं।" उन्होंने कहा कि, "ये एक जीन थेरेपी प्रोडक्ट है, जो कुछ लोगों को आकर्षित करेगा।" उन्होंने कहा कि, जीन थेरेपी से कोई मरीज, जो क्रिटिकल कंडीशन पर पहुंच गया है और जिसकी अब मौत हो सकती है, उस वक्त उसे नाटकीय परिस्थितियों में बचाया जा सकता है और उसकी स्थिति में सुधार किया जा सकता है।

और कौन कौन सी महंगी दवाइयां
आपको बता दें कि, इससे पहले स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी वाले शिशुओं के लिए नोवार्टिस एजी के ज़ोलगेन्स्मा दवा बनाई गई थी, जो अभी तक विश्व की सबसे ज्यादा कीमती दवाओं में शुमार थी। इस दवा को साल 2019 में ब्रिटेन में मंजूरी दी गई थी और इसकी कीमत भारतीय रुपये के हिसाब से 18 करोड़ 20 लाख रुपये के करीब थी। इस दवा को लेकर भी वैज्ञानिकों का दावा है, कि सिर्फ एक डोज लेने के बाद ये दवा बीमारी की पूरी तरह से ठीक कर देगी। हालांकि, ये दवाएं इतनी ज्यादा महंगी हैं, कि आम इंसानों के लिए इन दवाओं के बारे में सोच पाना भी दुर्लभ ही है। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी बीमारी को ठीक करने वाली इस दवा को बाद में अमेरिका ने भी मंजूरी दे दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इंग्लैंड में हर साल इस बीमारी से तकरीबन 80 बच्चे मिलते हैं और इस बीमारी की वजह से बच्चों की रीढ़ की हड्डी में लकवा मार देता है। इस बीमारी के होने के पीछे शरीर में एक खास किस्म के जीन की कमी का होना है।

एक खुराक से हीमोफिलिया ठीक
वहीं, Hemgenix दवा को लेकर यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन सेंटर फॉर बायोलॉजिक्स इवैल्यूएशन एंड रिसर्च के डायरेक्टर पीटर मार्क्स ने कहा कि, हालांकि हेमोफिलिया के इलाज में प्रगति हुई है, सेकिन रक्तस्राव को रोकने और इलाज के लिए आवश्यक उपायों से मरीजों के शरीर पर इसका काफी खराब असर पड़ता है और उसके जीवन जीने की क्षमता पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि, हेमजेनिक्स बीमारी से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए काफी महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। पारंपरिक हीमोफिलिया इलाज में गायब प्रोटीन को फिर से बनाने की कोशिश की जाती है, ताकि ये प्रोटीन शरीर से रक्तस्त्राव के वक्त खून के थक्के बनाए, जिससे खून का बहना बंद हो सके। वहीं, Hemgenix दवा शरीर के अंदर ऐसे जीन बनाता है, जो रक्तस्त्राव के वक्त खून के थक्के बनाता है और खून बहने से रोकता है।

एक्टइम्यून इलाज भी है काफी महंगा
वहीं, दुनिया में पाई जाने वाली एक और दुर्लभ बीमारी एक्टइम्यून के इलाज में भी लोगों को करोड़ों खर्च करने पड़ते हैं और इस बीमारी के इलाज में एक मरीज को हर महीने करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये सिर्फ दवा पर खर्च करने पड़ते हैं। क्रोनिक ग्रैन्यूलोमैट्स एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम कुछ खास तरह के बैक्टीरिया और फंगस के खिलाफ बेअसर हो जाता है, लिहाजा इस बीमारी को ठीक करने के लिए एक्टइम्यून दवा का इस्तेमाल किया जाता है और आम तौर पर एक हफ्ते में ये दवा तीन बार दी जाती है और मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 मिलीलीटर के एक वायल का दाम 42 लाख 60 हजार रुपये है और एक महीने में इस दवा पर करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।












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