Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

खुब लड़ी 'मर्दानी': अकेली महिला सलीमा मजारी ने कर रखा था तालिबान की नाक में दम, अब बनाई गई बंदी

कुछ साल पहले सलीमा मजारी अफगानिस्तान में अब तक बनने वाली सिर्फ तीन महिला राज्यपालों में से एक हैं और अब तक उन्होंने अपने किले को मजबूत कर रखा था।

काबुल, अगस्त 18: तालिबान को ललकारने वाली अफगानिस्तानी की पहली महिला राज्यपालों में से एक सलीमा मजारी को तालिबान ने गिरफ्तार कर लिया है। सलीमा मजारी ने तालिबान को रोकने के लिए हथियार उठा रखा था और उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर तालिबान का काफी प्रतिरोध किया था, लेकिन अब खबर आ रही है कि उनके इलाके पर भी तालिबान ने कब्जा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सलीमा मजारी ने तालिबान को काफी दिनों से अपने इलाके में आने से रोककर रखा था, लेकिन अब तालिबान ने सलीमा को बंदी बना लिया है।

Recommended Video

    Afghanistan: Taliban ने महिला गवर्नर Salima Mazari को पकड़ा, जानिए कौन हैं ये? | वनइंडिया हिंदी
    सलीमा मजारी बनाई गई बंदी

    सलीमा मजारी बनाई गई बंदी

    अफगानिस्तान में पहली महिला राज्यपालों में से एक, सलीमा मजारी, जिन्होंने तालिबान की नाक में दम कर रखा था, उन्हें अब पकड़ लिया गया है। तालिबान ने उन्हें पकड़ने के बाद उनके साथ क्या सलूक किया है और वो कहां है, इसकी कोई खबर अभी तक नहीं मिल पाई है। ऐसे समय में जब कई अफगान राजनीतिक नेता देश छोड़कर भाग गए थे, सलीमा मजारी बल्ख प्रांत में लगातार लड़ती रहीं और उन्होंने तालिबान के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया, लेकिन अब जाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिला चाहर किंट में तालिबान ने कब्जा करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सलीमा मजारी ने तालिबान के आगे आत्मसर्पण करने से इनकार कर दिया था।

    अफगानिस्तान की महिला राज्यपाल

    अफगानिस्तान की महिला राज्यपाल

    कुछ साल पहले सलीमा मजारी अफगानिस्तान में अब तक बनने वाली सिर्फ तीन महिला राज्यपालों में से एक हैं और जब एक के बाद एक अफगानिस्तान के इलाकों पर तालिबान का कब्जा होता जा रहा था, तभी भी सलीमा मजारी ने अपने किले को मजबूत कर रखा था। सलीमा मजारी ने बल्ख प्रांत में चाहर किंट को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कोशिश की। सलीमा मजारी ने लोगों के नेता के तौर पर चाहर किंट जिले में तालिबान के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई का आगाज किया था और उन्होंने गिरफ्तार होने तक अपने लोगों का साथ नहीं छोड़ा। चाहर किंट एकमात्र ऐसा जिला था, जिसपर अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने कब्जा नहीं किया था। गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सलीमा मजारी ने पिछले साल 100 से ज्यादा तालिबानी आतंकियों को सरेंडर कराकर उन्हें मुख्य धारा में लाने का काम किया था और उसके बाद से ही वो तालिबान की हिट लिस्ट में थीं।

    कौन हैं सलमा मजारी ?

    कौन हैं सलमा मजारी ?

    जिस वक्त पूरे अफगानिस्तान में अशांति की आग फैली हुई है और तालिबान ने महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर मनाही लगा दी है, उस वक्त उन तालिबानी लड़ाकों के खिलाफ मिशन पर निकलने वाली महिला सलीमा मजारी, अफगानिस्तान में एक महिला जिला गवर्नर हैं, जो अपनी आर्मी के लिए युवाओं को भर्ती कर रही थीं। सलीमा मजारी युवाओं से अपील करती थीं कि अफगानिस्तान आपकी धरती है और इस धरती के लिए बलिदान देना गर्व की बात है। ऐसा ही एक गीत लाउडस्पीकर पर बजता रहता था। मई की शुरुआत से जब तालिबान ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में अपनी पहुंच बनाने में लग गया और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जब 31 अगस्त तक अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से बाहर निकलने की आखिरी तारीख मुकर्रर कर दी, उसी वक्त से अफगानिस्तान में सलीमा मजारी ने तालिबान का मुकाबला करना शुरू कर दिया था।

    हजारा समुदाय से तालिबान की दुश्मनी

    हजारा समुदाय से तालिबान की दुश्मनी

    वैसे तो तालिबान हर उस शख्स को, हर उस समुदाय को खत्म कर देना चाहता है, जो उसका विरोध कर रहा हो, लेकिन हजारा समुदाय से तालिबान खास तौर पर नफरत करता रहा है। हजारा समुदाय ने हमेशा से तालिबान को काफी बड़ी चुनौती दी है। सलीमा मजारी भी हजारा समुदाय से भी आती हैं, जिनमें ज्यादातर शिया मुसलमान हैं और तालिबान सुन्नियों का संगठन है, जो शियाओं को 'विधर्मी संप्रदाय' का मानते हैं। हजारा समुदाय को तालिबान और इस्लामिक स्टेट के आतंकी लगातार निशाना बनाते रहे हैं। इसी साल मई में राजधानी काबुल के एक स्कूल पर हमला तालिबान ने किया था, जिसमें 80 से ज्यादा लड़कियों की मौत हो गई थी। लेकिन, अब स्थिति बदल गई है, और अब अफगानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित हो चुका है, लिहाजा सलीमा मजारी के लिए तालिबान से लड़ना असंभव हो गया था और अब उन्हें बंदी बना लिया गया है।

    मजारी की सेना में थे 600 लोग

    मजारी की सेना में थे 600 लोग

    सलीमा मजारी की सेना में करीब 600 लोग शामिल थे, जिनमें कोई किसान था तो कोई चरवाहा। मजारी की सेना में शामिल रहे 53 साल के सैयद मुनव्वर भी पेशे से किसान हैं, जिन्होंने 20 सालों से हल चलाया है और सलीमा मजारी के कहने पर उन्होंने तालिबान के खिलाफ हथियार उठा लिया था, लेकिन अंजाम खौफनाक ही निकला। सैयद मुनव्वर ने पिछले महीने कहा था कि, जब तक वे (तालिबान) हमारे गांवों पर हमला नहीं करते, तब तक हम कारीगर और कामगार हुआ करते थे।" "उन्होंने पास के एक गांव को हथिया लिया है और उनके सामान लूट लिए हैं, उन्होंने हमें गोला बारूद और हथियार खरीदने के लिए मजबूर किया है'' (फाइल फोटो)

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+