आखिर जेल में क्यों बंद थीं सऊदी की विद्रोही शहजादी बास्मा? शाही परिवार क्यों करता है बेटी से 'नफरत'?
सऊदी अरब अधिकारियों ने शाही परिवार की राजकुमारी बास्मा और उनकी बेटी को जेल से रिहा कर दिया है, जिन्हें पिछले तीन सालों से सऊदी की राजधानी की जेल में बगैर किसी आरोप के बंद रखा गया था।
रियाद, जनवरी 09: सऊदी अरब की शहजादी प्रिंसेस बास्मा बिंत अल सऊद आखिरकार तीन सालों के बाद जेल से रिहा हो गई हैं और प्रिंसेस बास्मा बिंत अल सऊद के साथ साथ उनकी बेटी को भी जेल से आजाद कर दिया गया है। सऊदी की शहजादी पिछले तीन सालों से किन आरोपों में जेल में बंद थी, ये अभी तक किसी को पता नहीं चल पाया है, लेकिन सऊदी रॉयल फैमिली अपनी बेटी से सख्त नफरत करता है और उनकी जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में आइये जानते हैं, कि आखिर प्रिंसेस बास्मा बिंत अल सऊद कौन हैं और शाही परिवार आखिर अपनी बेटी से इतनी नफरत क्यों करता है?

जेल से रिहा हुईं शहजादी
सऊदी अरब अधिकारियों ने शाही परिवार की राजकुमारी बास्मा और उनकी बेटी को जेल से रिहा कर दिया है, जिन्हें पिछले तीन सालों से सऊदी की राजधानी की जेल में बगैर किसी आरोप के बंद रखा गया था। एक मानवाधिकार संगठन ने सऊदी शहजादी की जेल से रिहाई की पुष्टि की है। प्रिंसेस बास्मा अपनी बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं और उन्होंने बिना डरे अपने ही परिवार को कई बार अपने बयानों से मुश्किलों में खड़ा कर दिया था। इसके साथ ही शहजादी बास्मा मानवाधिकार की प्रबल कार्यकर्ता के तौर पर भी जानी जाती हैं और अपनी खूबसूरती के लिए अमेरिका में काफी प्रसिद्ध हैं।

57 साल की हैं शहजादी बास्मा
सऊदी की शहजादी बास्मा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की चचेरी बहन हैं और उनका पूरा नाम बास्मा बिंत सउद बिन अब्दुलाजिज अल-सउद है और वो मानवाधिकारों के लिए लड़ने के लिए जानी जाती हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने एक ट्वीट में दावा किया था कि, उन्हें बिना किसी आरोप के रियाद स्थिति अल-हायर जेल में उनकी बेटी के साथ कैद कर लिया गया है और कई बार अपील करने के बाद भी उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है। सऊदी शहजादी ने गिरफ्तारी के बाद सऊदी रॉयल कोर्ट और अपने चाचा किंग सलमान के बाद कई बार अपनी रिहाई की अर्जी दी थी और अपनी गिरफ्तारी की वजह बताने की अपील की थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया।

किंग सउद बिन की हैं बेटी
शहजादी बास्मा सऊदी अरब के पूर्व किंग सउद बिन की सबसे छोटी बेटी हैं और जेल में उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी। हालांकि, अभी तक पता नहीं चल पाया है कि उन्हें क्या हुआ है। जब प्रिंसेस बास्मा को गिरफ्तार किया था, उस वक्त उन्होंने जेल के अंदर से ट्वीट किा था कि, वो अपनी बेटी के साथ स्विटजरलैंड इलाज के लिए जा रही थीं और इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, ये भी पता नहीं चल पाया कि, उन्होंने जेल के अंदर से कैसे ट्वीट किया था। उन्होंने दावा किया था, उनके प्राइवेट जेट को उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी गई। वहीं, बाद में ये भी पता चला था कि, प्रिंसेस बास्मा की गिरफ्तारी की जानकारी सऊदी परिवार के सदस्यों को नहीं थी। परिवार के दो सदस्यों ने कहा था कि, एक साल से उन्होंने प्रिंसेस बास्मा को नहीं देखा है और उन्हें जानकारी नहीं है, कि वो कहां हैं।

प्रिंसेस बास्मा से क्यों खफा किंग?
सऊदी राजकुमारी प्रिंसेस बास्मा मानवाधिकार के लिए प्रमुखता से आवाज उठाती रही हैं और उन्हें सऊदी की राजशाही कानून व्यवस्था पर कई बार आवाज उठाया था। इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरह में राजशाही प्रथा का जमकर विरोध करना शुरू कर दिया था और उन्होंने इंग्लैंड जैसी शासन प्रणाली की मांग की थी, जिसमें देश की जनता के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाने की मांग की थी। शहजादी बास्मा ने कहा था कि, देश में राजतंत्र की जगह लोकतंत्र होना चाहिए और जिस तरह से ब्रिटेन में संवैधानिक राजतंत्र है, वही सऊदी अरब में भी होना चाहिए।

राजतंत्र की प्रखर विरोधी
प्रिंसेस बास्मा महिलाओं के अधिकार को लेकर लंबे अर्से से आवाज उठाती रही हैं और उन्होंने मीडिया में भी कई सालों तक काम किया है और लंदन में कई सालों तक रहने के दौरान उन्होंने अपना कारोबार भी शुरू किया था। हालांकि, साल 2015 में वो ब्रिटेन से मानवाधिकारों की मांग को लेकर सऊदी अरब लौट आईं थीं और उन्होंने अपने देश में संवैधानिक राजतंत्र की स्थापना की मांग करने लगी थीं, जिसके तहत देश का शाही परिवार, देश की शासन व्यवस्था से बिल्कुल अलग होता। लेकिन, प्रिंसेस बास्मा की ये मांग सऊदी शासन को पसंद नहीं आया और साल 2019 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

'विद्रोही राजकुमारी' के तौर पर पहचान
सऊदी शाही परिवार के खिलाफ ही आवाज उठाने के लिए प्रिंसेस बास्मा को सऊदी अरब की 'विद्रोही राजकुमारी' भी कहा जाता है। सऊदी अरब की दूसरी शहजादियां जहां अपनी शांत स्वभाव के लिए जानी जाती हैं, वहीं प्रिंसेस बास्मा अपने तीखे तेवर के लिए विख्यात रही हैं और उन्होंने लंदन के स्कूल में पढ़ाई-लिखाई की है, लिहाजा उनके जीवन पर ब्रिटिश समाज का काफी प्रभाव देखा जाता है और उन्होंने इस्लामिक रूढ़िवाद की भी आलोचना की है।

राजपरिवार की सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी महिला
प्रिंसेस बास्मा ने स्विटजरलैंड में आगे की पढ़ाई-लिखाई की है और उन्होंने सामाजिर अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएट किया है और कई तरह की उच्च शिक्षा हासिल करने वाली सऊदी शाही परिवार की पहली महिला हैं।












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