इटली के बाद फिलीपींस भी चीन के BRI प्रोजेक्ट से निकला, क्यों एक-एक कर ड्रैगन का साथ छोड़ रहे देश?
2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पूरी दुनिया में देश का आर्थिक प्रभाव जमाने की कोशिशों के बीच बेल्ट एंड रोड परियोजना की शुरूआत की। हालांकि एक दशक तक इस परियोजना में खरबों डॉलर बहाने के बाद ये अब खटाई में पड़ती दिख रही है। दरअसल कई देश इस परियोजना से हटना शुरू हो गए हैं। बीते दिनों इटली ने बीआरआई से बाहर होने का एलान किया था।
अब खबर आई है कि फिलीपींस ने भी चीन की बीआरआई परियोजना से अलग होने की घोषणा कर दी है। फिलीपींस ने फैसला किया है कि अब उन तीन रेलवे प्रोजेक्ट्स के लिए चीन से वित्तीय मदद नहीं ली जाएगी जो पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे के प्रशासन के तहत साइन हुए थे।

आपको बता दें कि पिछले चीन ने बीजिंग में बेल्ट एंड रोड फोरम की 10वीं वर्षगांठ का आयोजन किया था। इस आयोजन में 23 देशों के प्रमुख शामिल हुए थे। इनमें फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर भी शामिल थे। इस दौरान शी जिनपिंग ने इस परियोजना के लिए 100 बिलियन डॉलर देने की घोषणा की।
लेकिन इस आयोजन के कुछ ही दिन बाद अब फिलीपींस ने इस परियोजना से बाहर होने के फैसले ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। फिलीपींस में बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत चीन 4.9 बिलियन डॉलर का निवेश करने का एलान किया था।
चीनी पैसे की मदद से फिलीपींस में में लूजोन में दो रेलवे परियोजनाएं और पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो डुटर्टे के गृह द्वीप मिंडानाओ में एक और परियोजना का निर्माण किया जाना था। लेकिन फिलीपीन परिवहन सचिव जैमे बतिस्ता ने चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के खत्म होने की घोषणा कर दी।
मनीला में यूरोपीय निवेशकों द्वारा आयोजित एक फोरम के दौरान बतिस्ता ने कहा, "हमारे पास तीन परियोजनाएं हैं जिन्हें अब चीनी सरकार द्वारा वित्त पोषित नहीं किया जाएगा। हम हमेशा इंतजार नहीं कर सकते हैं, और ऐसा लगता है कि चीन की अब इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है।"
दरअसल चीन ने फिलीपींस की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भारी राशि कर्ज के रूप में देने का वादा तो किया था, लेकिन चीन ने अभी तक इसके लिए कोई राशि वितरित नहीं की थी।
फिलीपींस ने ये भी कहा कि देश में चीन की लगभग सभी प्रमुख निवेश पहल आर्थिक और राजनीतिक दोनों कारकों के कारण संदेह में हैं। बतिस्ता ने ये भी कहा कि फिलीपींस ने अब जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के निवेश को मंजूरी देने पर विचार किया है।
आपको बता दें कि फिलीपींस और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर भी विवाद चल रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसी वजह से फिलीपींस ने चीन की परियोजना से अलग होने का फैसला किया है।
इससे पहले चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस की पेट्रोलिंग के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया था, जिस पर फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्दीनांद मार्कोस जूनियर ने चिंता जाहिर की थी।
कुछ हफ्ते पहले इटली जो एकमात्र G7 देश था जो BRI का हिस्सा था, ने कहा कि वह इस साल के अंत तक अपनी भागीदारी वापस ले लेगा क्योंकि परियोजना उसकी अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रही।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में आर्थिक संकट और बीआरई सदस्य देशों के ऋण संकट के कारण परियोजना की समग्र गतिविधि में 2018 के शिखर से 40 फीसदी की भारी गिरावट आई है।
ऐसे में माना जा रहा है कि चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट अब फेल हो चुका है। यानी कि गरीब तथा कम विकसित देशों को बीआरआई का लालच दिखाकर उन्हें कर्ज के जाल में फंसाने का चीनी प्लान उल्टा साबित हो गया है।












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