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चांद का वो 'डार्क ज़ोन' जहां NASA भी हो जाता है अंधा! 40 मिनट के लिए गायब होगा Artemis II

NASA Artemis II Mission: लगभग 50 साल बाद इंसान एक बार फिर चांद की दहलीज पर खड़ा है। NASA का Artemis II मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। इस मिशन के दौरान चार अंतरिक्ष यात्री-रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टियान कोच और जेरेमी हेनसेन-ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार होकर चांद के उस हिस्से तक जाएंगे, जहां अपोलो युग के बाद से कोई नहीं पहुंचा।

इस ऐतिहासिक सफर में एक ऐसा पल भी आएगा जब पूरी दुनिया की सांसें थम जाएंगी। जब ओरियन चांद के 'दूसरी तरफ' (Far Side) पहुंचेगा, तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। यह 40 मिनट का 'ब्लैकआउट' तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की भौतिकी का एक रोमांचक हिस्सा है।

NASA Artemis II Mission

क्या है 'फ्री-रिटर्न' रास्ता और यह क्यों जरूरी है?

Artemis II एक 'फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्ट्री' पर चल रहा है। यह एक ऐसा सुरक्षित रास्ता है जिसमें अंतरिक्ष यान पृथ्वी से निकलकर चांद के चक्कर लगाता है और बिना किसी बड़े इंजन प्रपल्शन के, सिर्फ गुरुत्वाकर्षण की मदद से अपने आप पृथ्वी की ओर लौट आता है। हाल ही में किए गए 17.5 सेकंड के 'आउटबाउंड करेक्शन बर्न' ने ओरियन को इसी सटीक रास्ते पर सेट किया है। इसे अंतरिक्ष यात्रा में सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है क्योंकि अगर यान के इंजन में कोई समस्या आती भी है, तो यात्री सुरक्षित वापस घर लौट सकते हैं।

40 मिनट का मौन: क्यों टूटेगा संपर्क?

जब ओरियन अंतरिक्ष यान चांद के पीछे के हिस्से (Far Side) में प्रवेश करेगा, तो विशालकाय चंद्रमा खुद ओरियन और पृथ्वी के बीच एक दीवार बनकर खड़ा हो जाएगा। चूंकि रेडियो सिग्नल सीधे रास्ते पर चलते हैं, इसलिए चांद के ठोस द्रव्यमान को पार करना उनके लिए असंभव होगा। इस दौरान लगभग 40 मिनट तक न तो NASA मिशन कंट्रोल यात्रियों से बात कर पाएगा और न ही यान का कोई डेटा पृथ्वी तक पहुंचेगा। यह पूरी तरह से एक 'कम्युनिकेशन ब्लैकआउट' की स्थिति होगी।

रिस्क नहीं, बल्कि सामान्य प्रक्रिया

NASA के अनुसार, यह 40 मिनट का सन्नाटा कोई चिंता का विषय या जोखिम भरी स्थिति नहीं है। डीप-स्पेस मिशनों में ऐसा होना आम बात है। अपोलो मिशनों के दौरान भी हर बार जब यान चांद के पीछे जाता था, तो संपर्क टूट जाता था। भारत के मंगलयान (MOM) मिशन में भी ऐसा ही हुआ था जब यान मंगल ग्रह की ओट में चला गया था। यह ब्लैकआउट केवल यह दर्शाता है कि हमारा यान अंतरिक्ष की गहराइयों में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।

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'डार्क साइड' का रहस्य और आंखों देखा हाल

चांद के जिस हिस्से में ब्लैकआउट होगा, उसे अक्सर गलतफहमी में 'डार्क साइड' कहा जाता है, लेकिन वहां भी सूरज की रोशनी पहुंचती है। यह हिस्सा पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। इस 40 मिनट के दौरान अंतरिक्ष यात्री रोबोटिक कैमरों के भरोसे रहने के बजाय अपनी आंखों से चांद की ऊबड़-खाबड़ सतह, पुराने गड्ढों और रहस्यमयी नजारों का अवलोकन करेंगे। यह एक ऐसा दुर्लभ अवसर है जिसे दुनिया के बहुत ही कम इंसानों ने सीधे अनुभव किया है।

अंतरिक्ष से दिखाई देने वाला अनोखा सूर्य ग्रहण

इस सफर का सबसे जादुई पल तब आएगा जब ये चार यात्री एक खास 'सूर्य ग्रहण' के गवाह बनेंगे। जैसे ही ओरियन चांद की दूसरी तरफ से गुजरेगा, चंद्रमा सूर्य को यात्रियों की नजरों से पूरी तरह ढंक लेगा। अंतरिक्ष के गहरे अंधेरे के बीच उन्हें सूर्य का बाहरी वातावरण यानी 'कोरोना' चमकता हुआ दिखाई देगा। यह नजारा पृथ्वी से नहीं देखा जा सकेगा, इसे केवल वही चार यात्री देख पाएंगे जो उस समय ब्रह्मांड की उस विशेष स्थिति में मौजूद होंगे।

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अपोलो 13 का रिकॉर्ड टूटने की दहलीज

Artemis II सिर्फ चांद तक पहुंचने का मिशन नहीं है, बल्कि यह दूरी का नया रिकॉर्ड बनाने का मिशन भी है। यह यान पृथ्वी से इतनी दूर जाएगा जितना 1970 में अपोलो 13 मिशन गया था। ओरियन उस पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इंसान को अंतरिक्ष के अब तक के सबसे दूरस्थ बिंदु तक ले जाएगा। जैसे ही यान चांद के पीछे से बाहर निकलेगा और पृथ्वी फिर से दिखाई देने लगेगी, यह दूरी का नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका होगा।

भविष्य में क्या संपर्क बनाए रखना संभव होगा?

वर्तमान में हमारे पास चांद के पीछे संपर्क बनाए रखने का कोई साधन नहीं है, लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा। NASA की योजना आर्टेमिस मिशन के अगले चरणों में चांद के चारों ओर 'रिले सैटेलाइट' तैनात करने की है। ये सैटेलाइट्स सिग्नल को घुमाकर पृथ्वी तक पहुंचाएंगे, जिससे 24 घंटे संपर्क बना रहेगा। चीन पहले ही अपने लूनर मिशन के लिए ऐसा कर चुका है। आने वाले समय में, चांद के पीछे जाने पर भी यात्री अपने घर से बात कर सकेंगे।

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