The Lady Of Heaven फिल्म में ऐसा क्या है जिसे पूरी दुनिया के मुस्लिम बैन करवाना चाहते हैं
ब्रिटिश फिल्म द लेडी ऑफ हेवेन रिलीज के बाद से ही लगातार विवादों में है। पैगंबर मोहम्मद की बेटी की कहानी कहती इस फिल्म के बैन करने को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
लंदन, 13 जूनः ब्रिटिश फिल्म द लेडी ऑफ हेवेन रिलीज के बाद से ही लगातार विवादों में है। पैगंबर मोहम्मद की बेटी की कहानी कहती इस फिल्म के बैन करने को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ब्रिटेन की सरकार ने द लेडी ऑफ हेवन फिल्म को बैन करने के लिए चलाए जा रहे अभियान का समर्थन करने के लिए इमाम कारी आसिम को सलाहकार के पद से हटा दिया है। इमाम कारी आसिम सरकार के इस्लामोफोबिया सलाहकार थे और मुस्लिमों के प्रति घृणा रोकने के लिए बनी वर्कफोर्स के उपाध्यक्ष भी थे।

कई देशों में हो रहा प्रदर्शन
द लेडी ऑफ हेवन को लेकर इस्लामिक देशों के साथ-साथ कई अन्य देशों में बवाल मचा हुआ है। इस फिल्म को मिस्र, मोरक्को और पाकिस्तान में प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि ईरान में मौलवियों ने इसे देखने वालों के खिलाफ फतवा जारी किया है। कई लोगों ने इस फिल्म को ईशनिंदा बताया है। उनका मानना है कि यह फिल्म इस्लाम पर गलत जानकारी फैला रही है।

फिल्म की स्क्रीनिंग हुई रद्द
शिया मुस्लिम समुदाय से आने वाले कुवैत के यासिर अल-हबीब द्वारा लिखित यह फिल्म 3 जून को ब्रिटेन में रिलीज हुई थी। इसके रिलीज होते ही ब्रिटेन के कई इलाकों में इसे लेकर प्रदर्शन होने लेग। बर्मिंघम, बोल्टन, ब्रैडफोर्ड और शेफील्ड में प्रदर्शनों के चलते वहां के सिनेमाघरों ने फिल्म की स्क्रीनिंग रद्द कर दी।

पैगंबर की बेटी की है कहानी
इस फिल्म को पैगंबर मोहम्मद के बेटी की कहानी कहने वाले पहली फिल्म के तौर पर पेश किया गया है। यह फिल्म दो अलग-अलग कहानियों को दिखाती है और लगभग 1400 साल बाद आधुनिक समय में एक युवा इराकी बच्चे की कहानी से जुड़ी हुई है। फिल्म की कहानी के मुताबिक लेडी फातिमा को 'आतंकवाद की पहली शिकार' के रूप में वर्णित किया गया है।

लेडी फातिमा के संघर्ष की है कहानी
द लेडी ऑफ हेवेन के निर्माता मलिक श्लिबक ने स्काई न्यूज को बताया कि यह फिल्म लेडी फातिमा के जीवन, उनके संघर्ष और जिस यात्रा से वह गुजरी हैं उसकी कहानी कहती है। मलिक ने कहा, "जैसा कि मुझे लगता है कि लेडी फातिमा हमारे इतिहास में सबसे अच्छी शख्सियत हैं, जिससे हम सीख सकते हैं। हम उनसे सीख सकते हैं कि कैसे चरमपंथ, कट्टरता और भ्रष्टाचार जैसी चीजों से निपटा जाए। और हमें लगा कि इस कहानी को दुनिया के सामने कहना बेहद जरूरी है।"

मुसलमानों की भावनाएं हुईं आहत
यासर अल-हबीब पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने सुन्नियों के कुछ शुरुआती प्रमुख श्रद्धेय शख्सियतों को गलत तरीके से चित्रित किया है। माना जा रहा है कि उनके कार्यों की तुलना इराक में इस्लामिक स्टेट समूह से की गई है। मोरक्को की सुप्रीम उलेमा काउंसिल ने कहा है कि यह फिल्म इस्लाम के स्थापित तथ्यों का घोर मिथ्याकरण है। काउंसिल ने फिल्म पर घृणित पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि फिल्म निर्माताओं ने प्रसिद्धि पाने और सनसनीखेज बनाने के लिए मुसलमानों की भावनाओं को आहत किया है तथा धार्मिक संवेदनाओं को भड़काने की कोशिश की है।












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