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Hindenburg: डोनाल्ड ट्रंप के सांसद की एक चिट्ठी और खेल खत्म, अडानी पर बुरी नजर डालने वाला हिंडनबर्ग कैसे डूबा?

Hindenburg: करीब दो साल पहले गौतम अडानी, संपत्ति के मामले में दुनिया के टॉप-5 अमीरों में शामिल हो गये थे, लेकिन फिर हिंडनबर्ग ने 'प्रोपेगेंडा' फैलाया और उसकी वजह से अडानी को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को आधार बनाकर भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस जैसे लोग एक्टिव हुए और अडानी मामले को मोदी सरकार से जोड़ते हुए, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए।

लेकिन, अब उसी हिंडनबर्ग का बोरिया-बिस्तर बंध गया है। अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च, जिसके आरोपों ने भारत में अडानी समूह सहित दुनिया भर की कई कंपनियों के भाग्य पर कहर ढाया है, उसने फर्म को "भंग" करने की घोषणा कर दी है।

hindenburg research

हिंडनबर्ग का क्यों बंधा बोरिया-बिस्तर? (Why Hindenburg founder announce to shut down firm?)

हिंडनबर्ग के संस्थापक नाथन एंडरसन ने शोध फर्म की आधिकारिक वेबसाइट पर एक व्यक्तिगत नोट में लिखा है, कि "जैसा कि मैंने पिछले साल के अंत से परिवार, दोस्तों और हमारी टीम के साथ शेयर किया है, मैंने हिंडनबर्ग रिसर्च को भंग करने का फैसला लिया है। योजना यह थी, कि हम जिन विचारों पर काम कर रहे थे, उनकी पाइपलाइन पूरी होने के बाद इसे बंद कर देंगे। और पिछले पोंजी केस के बाद, जिसे हमने अभी पूरा किया है और नियामकों के साथ शेयर कर रहे हैं, वह दिन आज है।"

जनवरी 2023 में, न्यूयॉर्क स्थित हिंडनबर्ग रिसर्च ने गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह पर 'स्टॉक हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी' का आरोप लगाया था, जिसने भारत में राजनीकित तूफान खड़ा कर दिया था। हालांकि, अडानी समूह ने तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

अगस्त 2024 में हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था, कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच और उनके पति दावल बुच के पास अडानी मनी साइफनिंग घोटाले में इस्तेमाल किए गए ऑफशोर फंड में हिस्सेदारी है। बुच ने इन आरोपों का खंडन किया था और इन्हें "दुर्भावनापूर्ण, शरारती और चालाकीपूर्ण" करार दिया था।

यानि, हिंडनबर्ग की कोशिश ना सिर्फ अडानी समूह को बर्बाद करना था, बल्कि भारत में भी उथल-पुथल लाना था।

अडानी से पंगा लेने का अंजाम? (Lance Gooden's letter to US Department of Justice for Gautam Adani)

दरअसल, कुछ दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद लांस गुडेन ने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के अटॉर्नी जनरल मेरिक बी गारलैंड को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अडानी के खिलाफ शिकायत दर्ज किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए थे और पूछा था, कि "अमेरिका से बाहर हुए किसी मामले का मुकदमा दर्ज कर आखिर वो क्या हासिल करना चाहते हैं?"

लांस गुडेन ने चिट्ठी में स्पष्टीकरण मांगा था, कि "जस्टिस डिपार्टमेंट, भारत में स्थित अडानी समूह के खिलाफ मामला क्यों चला रहा है?"

पिछले साल नवंबर में, न्यूयॉर्क में अमेरिकी प्रॉसीक्यूटर्स ने गौतम एस अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और छह अन्य पर राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों के साथ "आकर्षक सौर ऊर्जा आपूर्ति कॉन्ट्रैक्ट" हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर 2,029 करोड़ रुपये (265 मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने का आरोप लगाया था।

रिपब्लिकन सांसद गुडेन ने 7 जनवरी को लिखे एक पत्र में लिखा, "घरेलू स्तर पर बढ़ते हिंसक अपराधों के बारे में सार्वजनिक आक्रोश को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए, जस्टिस डिपार्टमेंट विदेशों में कथित अन्याय के लिए व्यवसायों को निशाना बनाने के लिए नए अभियान चला रहा है। इसका एक उदाहरण हाल ही में यूनाइटेड स्टेट्स बनाम अडानी (अडानी मामला) में भारत में किए गए कथित कृत्यों के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क के सामने एक भारतीय कंपनी के अधिकारियों पर अभियोग लगाना है।"

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा था, कि "अगर भारत प्रत्यर्पण से इनकार कर दे, तो किसकी प्रतिष्ठा पर कलंक लगेगा?"

उन्होंने लिखा था, कि "अडानी मामले में आरोप, भले ही सही साबित हो जाएं, फिर भी हम इस मुद्दे पर उचित और अंतिम मध्यस्थ नहीं बन पाएंगे। ये "रिश्वत" कथित तौर पर भारत में एक भारतीय कंपनी के भारतीय अधिकारियों द्वारा भारतीय राज्य सरकार के अधिकारियों को दी गई थी, जिसमें किसी भी अमेरिकी पक्ष की कोई ठोस संलिप्तता या नुकसान शामिल नहीं था।"

गुडेन ने सुझाव दिया, कि "जस्टिस डिपार्टमेंट के लिए उन मामलों को आगे बढ़ाना बुद्धिमानी होगी, जहां उचित और निर्णायक क्षेत्राधिकार होना निश्चित है।"

हिंडनबर्ग के फाउंडर की चिट्ठी में क्या है? (What's in the letter from the founder of Hindenburg?)

वहीं, हिंडनबर्ग के फाउंडर नाथन एंडरसन ने लिखा है, कि करीब 100 लोगों पर कम से कम आंशिक रूप से उनकी फर्म के काम के माध्यम से विनियामकों द्वारा दीवानी या आपराधिक आरोप लगाए गए हैं, जिनमें अरबपति और कुलीन वर्ग शामिल हैं। उन्होंने लिखा है, कि "हमने कुछ साम्राज्यों को हिला दिया, जिन्हें हिलाने की हमें जरूरत महसूस हुई।"

आपको बता दें, कि हिंडनबर्ग ने जिन समूहों के खिलाफ आरोप लगाए, उनमें फिनटेक कंपनी एबिक्स, इंक., वैग्स कैपिटल, निजी निवेश फर्म नानबन वेंचर्स और एक अफ्रीकी फिनटेक समूह टिंगो ग्रुप शामिल हैं।

जब दुनिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी बन गये थे गौतम अडानी? (Gautam Adani Net Worth)

दरअसल, कहा जाता है कि हिंडनबर्ग ने गौतम अडानी के खिलाफ प्रोपेगेंडा इसलिए चलाया, क्योंकि उनका उत्थान पश्चिमी देशों को पसंद नहीं आया और अडानी के जरिए असल में वो मोदी सरकार को अस्थिर करना चाहते थे।

सितंबर 2022 में गौतम अडानी दुनिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी बन गये थे और पश्चिमी देशों को भला ये कैसे बर्दाश्त होता। सितंबर 2022 में अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर 155.5 अरब डॉलर यानि करीब 12. 37 लाख करोड़ रुपये हो गई थी। फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, वह फ्रांसीसी टाइकून बर्नार्ड अरनॉल्ट और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस से काफी आगे निकल गये हैं। टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क अमीरों की सूची में उस वक्त भी शीर्ष स्थान पर काबिज थे। गौतम अडानी 30 अगस्त 2022 को लुइस विटॉन के बॉस अरनॉल्ट को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बने थे। और वह पहला मौका था, जब किसी एशियाई दिग्गज को शीर्ष तीन अरबपतियों में स्थान दिया गया था।

लेकिन, इसके बाद ही टूलकिट गैंग्स ने अपना प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू किया।

जिस वक्त दूसरो को डूबोने वाला हिंडनबर्ग खुद डूब चुका है, उस वक्त गौतम अडानी एक बार फिर से आगे बढ़ चुके हैं और आज की तारीख में उनकी कुल संपत्ति 74.8 अरब डॉलर (ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक) हो चुका है। यानि, हिंडनबर्ग ने भले ही गौतम अडानी को हिलाया हो, लेकिन उन्हें गिरा नहीं पाया।

इस बीच अडानी ग्रुप के शेयर एक बार फिर से आसमान छू रहे हैं और अडानी पावर के शेयर आज की तारीख में 599 तक पहुंच चुका है, जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर 1126 रुपये पर पहुंच चुका है। अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर 2569 और अडाणी टोटल गैस के शेयर 708 पर थे। यानि, अडानी समूह के शेयर्स एक बार फिर उछाल भर रहे हैं, जबकि हिंडनबर्ग का दुकान बंद हो चुकी है।

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