इजराइल से युद्ध करने पर हिज्बुल्लाह के मुखिया के नहीं फूटे बोल, जानिए बड़बोले की क्यों निकली हवा?

Hezbollah Israel-Hamas War: हमास के लिए जीने-मरने की कसमें खाने वाले हिज्बुल्लाह के तेवर ढीले पड़ गये हैं और अब वो इजराइल के साथ जंग में नहीं उलझेगा। शुक्रवार को हिजबुल्लाह के मुखिया सैय्यद हसन नसरल्लाह ने इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार अपने समर्थकों को संबोधित किया।

नसरल्लाह ने एक रहस्यमय जगह से बोलते हुए, इज़राइल में युद्ध के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया और दावा किया, कि वाशिंगटन युद्धविराम को रोक रहा है। हिज्बुल्लाह के मुखिया ने यह भी दावा किया, कि हमास का हमला पूरी तरह से फिलिस्तीनी ऑपरेशन था और इसके परिणामस्वरूप 'इजराइल में भूकंप' आया।

Hezbollah Israel-Hamas War

आशंका जताई जा रही थी, कि शुक्रवार के संबोधन में हिज्बुल्लाह का मुखिया नसरल्लाह हमास का साथ देने और इजराइल के खिलाफ नया फ्रंट खोलने का ऐलान कर सकता है, लेकिन नसरल्लाह भाषण देता गया और बीतते वक्त के साथ लगने लगा, कि हिज्बुल्लाह नेता सिर्फ बकवास कर रहा है, वो इजराइल के खिलाफ जंग में हमास का साथ नहीं देगा।

यानि, हिज्बुल्लाह ने हमास को बहुत बड़ा धोखा दे दिया है। हमास को उम्मीद थी, कि इजराइल के खिलाफ हिज्बुल्लाह के फ्रंट खोलने के बाद इजराइल दो मोर्चों पर लड़ाई में फंस जाएगा, लेकिन ऐसा लगता है, कि गाजा पर जिस तरह से इजराइल ने कहर बरपाया है, उससे हिज्बुल्लाह की हवा निकल गई है।

आइये जानते हैं, कि आखिर हिज्बुल्लाह की हवा क्यों निकली, हिज्बुल्लाह का मुखिया सिर्फ बयानबाजी कर क्यों निकल गया?

संघर्ष शुरू होने के बाद से हिज्बुल्लाह की भूमिका

हिजबुल्लाह ने दावा किया था, कि वह 7 अक्टूबर को "फिलिस्तीनी प्रतिरोध के नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क में है", जिस दिन हमास ने इज़राइल पर हमला किया था। यानि, हिजबुल्लाह के दावे के मुताबिक, वो लगातार हमास के नेताओं से संपर्क में था।

वहीं, हमले के बाद से, हिज्बुल्लाह के आतंकवादी लेबनान सीमा पर इजरायली बलों के साथ गोलीबारी कर रहे हैं। लेकिन, हिज्बुल्लाह ने इजराइली सेना में युद्ध के 25 दिन बीत जाने के बाद भी ना को युद्ध की घोषणा को और ना ही इजराइली सीमा में कदम रखने का दुस्साहस किया है।

संघर्ष के शुरुआती दिनों में, हिज्बुल्लाह ने इज़राइल पर गोले दागे थे।

हिज्बुल्लाह ने कहा, कि उसने फिलिस्तीनी लोगों के साथ 'एकजुटता' के कारण ऐसा किया, हालांकि हमलों से इजराइल को कोई नुकसान नहीं हुआ। हिजबुल्लाह का गाजा पर नियंत्रण रखने वाले हमास और ईरान समर्थित एक अन्य फिलिस्तीनी गुट इस्लामिक जिहाद से गहरा संबंध है।

हिज्बुल्लाह ने कहा, कि "इस्लामिक प्रतिरोध (हिज्बुल्लाह) ने...कब्जे वाले लेबनानी शेबा खेतों में ज़ायोनी दुश्मन के तीन ठिकानों पर बड़ी संख्या में तोपखाने के गोले और गाइडेड मिसाइलों से हमला किया।" हालांकि, इजराइल ने इन तमाम मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया।

हिज्बुल्लाह के वरिष्ठ अधिकारी हाशेम सफ़ीद्दीन ने कहा, कि उनके समूह की "बंदूकें और रॉकेट" फ़िलिस्तीनी हमास के साथ हैं। उसने कहा, कि "हमारा इतिहास, हमारी बंदूकें और हमारे रॉकेट आपके साथ हैं। हमारे पास जो कुछ भी है, वह आपके साथ है।" सफ़ीद्दीन ने फिलिस्तीनी लड़ाकों के साथ एकजुटता दिखाते हुए बेरूत के बाहरी इलाके में हिज़्बुल्लाह के गढ़ दहिह में एक कार्यक्रम में उग्र बयानबाजी की थी, लेकिन बात सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित रही।

लेकिन, 7 अक्टूबर के बाद से इजराइल की जवाबी कार्रवाई में हिज्बुल्लाह ने अपने कम से कम 55 लड़ाके खो दिए हैं।

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हिट एंड रन की रणनीति

इजराइल के खिलाफ हिज्बुल्लाह ने हमेशा से हिट एंड रन की नीति अपनाई है और उसने कभी भी इजराइल के खिलाफ आमने-सामने की लड़ाई लड़ने का दुस्साहस नहीं किया है।

अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजराइल में हनीता किबुत्ज़ के पास एक हमले की ज़िम्मेदारी ली थी। हिज्बुल्लाह ने दावा किया था, कि इसने कई सैनिकों को मार डाला या घायल कर दिया और दो टैंक और एक अन्य सैन्य वाहन को नष्ट कर दिया। कुछ दिन पहले हिज्बुल्लाह ने कहा था, कि उसने पहली बार किसी इजरायली ड्रोन के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया है।

हिज्बुल्लाह ने गुरुवार को इजरायली सेना के ठिकानों पर कई हमले किए, जिसमें विस्फोटक ड्रोन का उपयोग करके किया गया पहला हमला भी शामिल है।

भारी हथियारों से लैस शिया इस्लामवादी समूह ने एक बयान में कहा, कि उसके लड़ाकों ने गाइडेड मिसाइलों, तोपखाने और अन्य हथियारों का उपयोग करके इजराइल में इजरायली सेना के ठिकानों पर एक साथ 19 हमले किए।

हिज्बुल्लाह ने कहा, कि विस्फोटकों से भरे दो ड्रोनों ने सीमा पर विवादित शीबा फार्म्स क्षेत्र में इजरायली सेना के कमांड स्थान पर हमला किया। जिसके जवाब में इजराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकाने पर बम बरसाए, जिससे कई हिज्बुल्लाह मारे गये हैं।

इजराइल ने चेतावनी दे रखी है, कि अगर हिज्बुल्लाह नया फ्रंट खोलता है, तो लेबनान को जो नुकसान होगा, उसका अंदाजा वो सपने में भी नहीं लगा सकता है।

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गीदड़भभकी देने वाला नसरल्लाह कौन है?

बीबीसी के मुताबिक, नसरल्लाह कहां रहता है, किसी को उसकी खबर नहीं होती है और शुक्रवार को भी उसने कहां से अपने समर्थकों को संबोधित किया, उसकी जानकारी किसी को नहीं है।

हिजबुल्लाह के महासचिव नसरल्लाह ने 1992 से आतंकवादी समूह का नेतृत्व किया है। हिज़्बुल्लाह आज जो है उसे राजनीतिक और सैन्य रूप से बनाने में नसरल्लाह की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता है।

नसरल्लाह के ईरान से गहरे रिश्ते हैं। 1981 में ईरान के पहले सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला रूहुल्लाह खुमैनी ने नसरल्लाह को लेबनान में अपना निजी प्रतिनिधि नामित किया था। नसरल्ला सार्वजनिक रूप से नज़रों से दूर रहता है, क्योंकि उसके बारे में कहा जाता है, कि अगर उसका ठिकाने का पता चल गया, तो फिर इजराइली खुफिया एजेंसी उसे छोड़ेंगी नहीं।

हालांकि, वह हर हफ्ते टेलीविजन के जरिए अपने समर्थकों को संबोधित करता रहता है। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, नसरल्ला ने अपने भाषण में इज़राइल को चेतावनी दी, लेबनना पर इजराइल का पहला हमला उसकी "मूर्खतापूर्ण गलती" होगी। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि नसरल्लाह अपने समर्थकों को बेवकूफ बना रहा है, क्योंकि इजराइल भला आगे बढ़कर क्यों लेबनान पर हमला करेगा।

नसरल्लाह ने दावा किया, ''हमारे सामने सभी विकल्प खुले हैं।''

उसने कहा, कि "हमारे लिए सभी विकल्प खुले हैं, और हमने सभी विकल्पों का अध्ययन किया है। हमें तैयार रहना चाहिए और भविष्य में होने वाले सभी विकल्पों के लिए तैयार रहना चाहिए।"

अल जज़ीरा ने नसरल्लाह के हवाले से यह भी कहा, कि जो लोग क्षेत्रीय संघर्ष को रोकना चाहते हैं, उन्हें गाजा पट्टी पर युद्ध रोकना होगा।

हिजबुल्लाह प्रमुख ने यमन और इराक में उन समूहों को धन्यवाद दिया, जिन्हें "प्रतिरोध की धुरी" के रूप में जाना जाता है। इसमें शिया मुस्लिम इराकी मिलिशिया शामिल हैं, जो सीरिया और इराक में अमेरिकी सेना पर गोलीबारी कर रहे हैं, इनमें यमन के हूती विद्रोही प्रमुख हैं। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि हिजबुल्लाह सिर्फ गीदड़भभकी देता रहेगा, असल में वो युद्ध में प्रत्यक्ष तौर पर शामिल नहीं होगा, क्योंकि उसे इजराइल के पूर्ण आक्रमण का डर है।

अगर इजराइल जवाबी कार्रवाई करता है, तो फिर हिजबुल्लाह को जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई वो नहीं कर पाएगा। इसके अलावा, हिजबुल्लाह के हमले के बाद इजराइल और अमेरिका मिलकर, सीधे उसके आका ईरान पर हमला कर सकते हैं और ईरान ये बिल्कुल भी नहीं चाहता है और यही वजह है, कि इजराइल पर हमला करने वाला हमास अब अकेला ही अपने दुस्साहस का सजा भुगत रहा है।

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