विश्व के मुकाबले कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा क्यों मरते हैं पाकिस्तानी? ओमिक्रॉन से और बढ़ा टेंशन
पाकिस्तानी स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े अपनी ही सरकार के दावों की पोल खोलते हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री देश की हालात को दुनिया में सबसे बेहतर बताते हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में पाकिस्तान अव्वल नंबर पर है।
इस्लामाबाद, दिसंबर 19: एक तरफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार दावा कर रहे हैं कि, एशियाई देशों में कोरोना वायरस संक्रमण की रफ्तार भले ही ज्यादा हो, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण से मृत्यु दर की रफ्तार कम है और कोरोना वायरस एशियाई देशों में कम घातक साबित हुआ है, लेकिन वैश्विक आंकड़ों से जब पाकिस्तान की तुलना की गई, तो पता चला है कि, पाकिस्तान में मृत्युदर काफी ज्यादा है।
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पाकिस्तान में मृत्युदर काफी ज्यादा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के दावे से इतर पाकिस्तान अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में कोरोना वायरस संक्रमण से होने वाली मृत्युदर वैश्विक मृत्युदर के मुकाबले काफी ज्यादा है। जिसको लेकर पाकिस्तान के मेंबर ऑफ साइंटिफिक टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. जावेद अकरम ने कहा कि, ''पाकिस्तान में काफी ज्यादा मरीज ऐसे होते हैं, जो अस्पतालों में काफी सीरियस हालात में भर्ती होने के लिए आते हैं, लिहाजा उनकी जान बचाना काफी मुश्किल हो जाता है।'' इसके साथ ही डॉक्टर अकरम ने कहा कि, ''पाकिस्तान में अस्पतालों की हालात पहले से ही काफी खराब रहे हैं और कोविड 19 संक्रमण के दरम्यां अस्पतालों पर बोझ काफी ज्यादा पड़ा है, जिसकी वजह से ज्यादातर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है''।

कोरोना से सबसे ज्यादा मरते पाकिस्तानी
पाकिस्तानी अखबार डॉन के पास उपलब्ध नेशनल कमांड एंड ऑपरेशन सेंटर (एनसीओसी) के एक दस्तावेज में कहा गया है कि, पाकिस्तान में कोरोना वायरस की वजह से होने वाली मृत्युदर 2.24 है, जबकि वैश्विक स्तर पर होने वाली मृत्युदर सिर्फ 1.97 है। यानि, दुनिया के ज्यादातर हिस्सों के मुकाबले पाकिस्तान में काफी ज्यादा मौते होती हैं। रिपोर्ट में आगे दिखाया गया है कि, पाकिस्तान में कोरोना वायरस की वजह से महिलाओं की काफी मौतें हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में अब तक कोरोना वायरस की वजह से 28 हजार 870 लोगों की जान गई है, जिनमें 39 प्रतिशत महिलाओं की मौत इस जानलेवा वायरस की वजह से हुई हैं।

पाकिस्तान में कोरोना का गणित
पाकिस्तान सरकार के स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तान में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से 2 महीने के बच्चे से लेकर 100 साल की उम्र तक के पाकिस्तानी की मौत हुई है। जबकि, पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की औसत उम्र 62 वर्ष है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में मरने वालों की कुल संख्या में से 78 प्रतिशत लोगों की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा था, जिनमें से 69 प्रतिशत लोग पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। वहीं, 91 प्रतिशत जान गंवाले वाले मरीज कम से कम 6.6 दिनों तक अस्पताल में भर्ती थे। इसी तरह, अस्पताल में भर्ती मरीजों में से 45 प्रतिशत औसतन 3.2 दिनों (एक दिन से लेकर 42 दिनों तक) तक वेंटिलेटर पर रहे।

स्वास्थ्य कर्मचारियों की भी हुई मौतें
दस्तावेज से पता चला कि पाकिस्तान में मरीजों की देखभाल में लगे 172 स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हुई हैं। मरीजों का इलाज करते हुए जान गंवाने वालों में 103 डॉक्टर शामिल हैं, जबकि, एक मेडिकल छात्रा, चार नर्स और 64 पैरामेडिक्स थे। डॉन से बात करते हुए, डॉ अकरम ने स्वीकार किया कि वैश्विक प्रतिशत मौतों की तुलना में पाकिस्तान में कहीं अधिक रोगियों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि, ''दुर्भाग्य से पाकिस्तान में लोग कोविड -19 संक्रमित होने के बाद जब तक सीरियस नहीं हो जाते, तब तक वो अस्पताल नहीं जाते हैं। लेकिन जब समस्याएं काफी जटिल हो जाती हैं, तो डॉक्टर्स के पास कुछ बचता नहीं है। इसके अलावा, हमारे पास अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है, देश में वेंटिलेटर्स की काफी कमी है, लिहाजा अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था दम तोड़ देती हैं''।

आंकड़ों के विपरीत सरकार का दावा
जब पाकिस्तानी अखबार ने डॉक्टर अकरम से पूछा कि, पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि, पाकिस्तान में कभी भी सौ प्रतिशत वेंटिलेटर्स भरे नहीं थे, तो डॉक्टर अकरम ने कहा कि, ''इटली और फ्रांस में एक ही तरह के लोग और उनकी आर्थिक स्थिति भी एक जैसी ही है, लेकिन इटली में फ्रांस की तुलना में ज्यादा लोगों की मौत हुई हैं।'' डॉक्टर अकरम, जो स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर भी हैं, उन्होंने कहा कि, सर्दियों में दुनिया भर में स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि ठंड के मौसम में हर साल 25 लाख लोग निमोनिया से मर जाते हैं। इस बीच, एनसीओसी के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस से सात लोगों की मौत हो गई और 357 और लोगों ने कोविड पॉजिटिव पाए गये हैं, वहीं देशभर के अस्पतालों में 728 मरीजों को भर्ती किया गया है।

ओमिक्रॉन से टेंशन और बढ़ा
एक तरफ पाकिस्तान में मृत्युदर वैश्विक मृत्युदर से काफी ज्यादा है, तो दूसरी तरफ ओमिक्रॉन वेरिंएंट ने स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान में वैक्सीनेशन की रफ्तार काफी कम है, लिहाजा आशंका जताई जा रही है कि, अगले साल फरवरी और मार्च महीने में पाकिस्तान की स्थिति बिगड़ सकती है। खासकर वैक्सीनेशन के बावजूद ब्रिटेन, अमेरिका और डेनमार्क जैसे देशों की जो हालात है, वो एशियाई देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। खासकर पाकिस्तान और भारत जैसे देशों में लोग कोविड नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाते हैं, लिहाजा एक्सपर्ट्स मानते हैं कि, ओमिक्रॉन का प्रभाव पाकिस्तान पर काफी गहरा पड़ने वाला है।












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