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Burkina Faso: दुनिया का सबसे खतरनाक देश क्यों बना बुर्किना फासो, कीड़ों की तरह लोगों को मारते जिहादी

बुर्किना फासो पश्चिम अफ्रीकी देश है, जिसकी सीमाएं उत्तर में माली, पूर्व में नाइजर, उत्तर पूर्व में बेनिन, दक्षिण में टोगो और घाना और दक्षिण पश्चिम में कोट द' आईवोर से मिलती हैं। यहा कई बार सैन्य तख्तापलट हो चुका है।

Burkina Faso

Burkina Faso Terrorist Attack: पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो, जो दशकों से पेट भरने के लिए रोटी की व्यवस्था नहीं कर पाया, उस देश के चंद लोग पूरी दुनिया में अलकायदा और इस्लामिक स्टेट के इस्लाम को लागू करने किए लोगों की हत्याएं कर रहे हैं।

बुर्किना फासो का ये दुर्भाग्य ही है, कि 'ईमानदार लोगों की भूमि' कहे जाने वाले इस देश में कभी भी राजनीतिक स्थिरता नहीं रही और 1983 में पहली बार सैन्य अधिकारी थॉमस शंकरा ने सैन्य तख्तापलट किया था, जिनकी सरकार को 1987 में गिरा दिया गया।

आजादी हासिल करने के बाद से ही बुर्किना फासो मे 1966, 1980, 1982, 1983, 1987, 1989, 2015 और 2022 में सैन्य तख्तापलट हो चुका है या तख्तापलट की कोशिश की गई है। आखिरी सैन्य तख्तापलट 2022 में हुआ था, जब कैप्टन इब्राहिम ट्रैरे ने देश का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया।

लेकिन, असली संकट 2015 के बाद से शुरू हुआ, जब कुछ सिरफिरे लोगों ने पूरी दुनिया में इस्लाम की स्थापना करने के लिए हथियार हाथों में ले लिया। इन सिरफिरे लोगों ने इस्लामिक स्टेट नाम का संगठन तैयार किया।

हालांकि, बड़े देशों में तो इस्लामिक स्टेट की घुसने की हिम्मत नहीं हुई, लेकिन छोटे इस्लामिक देशों में इसकी जिहादी कोशिशें कामयाब होनी शुरू हुईं और 2015 में माली के रास्ते बुर्किना फासो में भी इस्लामिक स्टेट का जिहाद आ पहुंचा।

हालांकि, सीरिया और इराक में भी अब इस्लामिक स्टेट के पैर उखड़ चुके हैं, लेकिन माली और बुर्किना फासो जैसे देशों के इस्लामिक चरमपंथियों के मन से अभी भी जिहाद का कीड़ा नहीं मरा है।

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बुर्किना फासो में हजारों की गई जान

बुर्किना फासो में फरवरी 2016 में औगाडौगौ के केंद्र में स्प्लेंडिड होटल और कैपुचिनो कैफे-बार में भीषण आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 30 लोग मारे गये थे। ये हमला अलकायदा, इस्लामिक मघरेब (AQIM) और अल-मौराबितौन ने मिलकर किया था। इनके ज्यादातर आतंकी माली से आए थे।

2016 के बाद से बुर्किना फासो लगातार आतंकियों का शिकार बनने लगा और देश में लगातार छिटपुट हमले होते रहे।

11 अक्टूबर 2019 को माली की सीमा के पास सटे बुर्किना फासो के सल्मोसी गांव की एक मस्जिद को आतंकियों ने निशाना बनाया और 16 नमाजियों को मौत के घाट उतार दिया।

8 जुलाई 2020 की ह्यूमन राइट वाच की रिपोर्ट में बताया गया, कि उत्तरी बुर्किना फासो में, जहां देश के सैनिक इस्लामिक आतंकियों से लड़ रहे थे, वहां 180 लोगों का सामूहिक कब्र मिला। खुलासा हुआ, कि आतंकियों ने लोगों को मारकर एक सामूहिक कब्र में फेंक दिया था।

वहीं, 4 जून 2021 को, एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि बुर्किना फासो की सरकार के मुताबिक, नाइजर सीमा के पास उत्तरी बुर्किना फासो के सोलहन गांव में जिहादियों ने कम से कम 100 लोगों की हत्या कर दी।

आर्म्ड कंफ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट के वरिष्ठ शोधकर्ता हेनी न्सैबिया ने कहा, कि लगभग पांच साल पहले अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े जिहादियों ने पश्चिम अफ्रीकी देश पर कब्जा कर लेने के बाद से बुर्किना फासो को तबाह कर दिया है।

पिछले साल सितंबर में बुर्किना फासो में सैन्य तख्तापलट के बाद कैप्टन इब्राहिम ट्रैरे ने सत्ता पर कब्जा जमा लिया है और उनके शासन में आने के बाद ये सबसे घातक आतंकी हमला है। इससे पहले पिछले ही साल फरवरी महीने में बुर्किना फासो के सुदूर उत्तर में देउ पर आतंकी हमला किया गया था, जिसमें 51 सैनिक मारे गए थे।

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ईसाइयों को निशाना बनाकर हमला

बुर्किना फासो में ईसाइयों को कई मौकों पर विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। कैथोलिक पादरी जोएल यूगबरे का 2019 में अपहरण कर लिया गया था और अभी तक उनकी कोई खबर नहीं है। अप्रैल 2022 में अमेरिका की दो लड़कियों को अगवा कर लिया गया था, जिन्हें अगस्त में छोड़ दिया गया।

हालांकि, अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बुर्किना फासो की मदद जरूर की है, लेकिन उस स्तर की मदद नहीं की गई है।

इसकी सबसे बड़ी वजह देश में बार बार सैन्य तख्तापलट का होना है। बुर्किना फासो के सैन्स शासक, आतंकियों के खिलाफ लड़ाई में पड़ोसी देश माली को फॉलो करते हैं, जिनसे उन्हें उल्टा नुकसान होता है। अमेरिका चाहता है, कि 2024 में बुर्किना फासो में चुनाव हो और इसके लिए जिहादियों को पीछे धकेलना होगा।

बुर्किना के कितने हिस्से पर आतंकियों का कब्जा?

अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है, कि बुर्किना फासो के करीब 60 प्रतिशत हिस्से पर इस्लामिक जिहादियों का कब्जा है और करीब 2 करोड़ लोग इस क्षेत्र में रहते हैं। ये क्षेत्र अफ्रीका के सबसे बड़े रेगिस्तान सहारा के ठीक दक्षिण में स्थित है, जो खुद एक अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 की शुरुआत और पिछले साल के अंत के बीच, अल कायदा और इस्लामिक स्टेट के जिहादियों ने बुर्किना फासो के साहेल में 21,138 लोगों को मार डाला, उनमें से ज्यादातर बुर्किना फासो, माली और नाइजर के नागरिक हैं। पिछले साल जिहदियों ने बुर्किना फासो में 1,470 हमले किए, जिसमें 3,600 लोग मारे गए।

वहीं, आतंकी समूहों ने अब घाना को धमकी दी है, जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने पिछले सप्ताह आइवरी कोस्ट, बेनिन और गिनी तट की खाड़ी पर टोगो के साथ दौरा किया था।

अत्यधिक गरीबी से सरकार अस्थिर

युद्ध के मैदान की असफलताओं से निराश, बुर्किनाबे के अधिकारियों ने पिछले साल जनवरी में देश की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका। पिछले साल देश में दूसरा तख्तापलट सितंबर में हुआ था।

लिहाजा, अमेरिका ने बुर्किना फासो पर प्रतिबंध लगा दिए, जिसके बाद बुर्किना को और नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है, कि हथियारों से लैस इस्लामिकर आतंकवादी गांवों पर हमला करने के बाद सिर्फ लूटपाट नहीं करते हैं, बल्कि वो लड़कियों और महिलाओं से बलात्कार करते हैं और बड़े पैमाने पर लोगों की हत्याएं करते हैं।

इतना ही नहीं, ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा, कि सुरक्षा बलों ने भी सैकड़ों नागरिकों को मार डाला है। हालांकि, अब सरकार ने सशस्त्र बलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की है और उनको लेकर नया कानून बनाया है।

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अफ्रीका में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

अफ्रीकी देशों की बदहाल स्थिति के पीछे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति भी काफी हावी रही है। अफ्रीकी देशों में सोना के साथ साथ कई बहुमूल्य प्राकृतिक संपत्तियों की खदानें हैं, जिनको लूटने को लेकर रूस और चीन में भी होड़ मची है।

रूसी वैगनर ग्रुप (भाड़े के लड़ाके) भी माली, बुर्किना फासो समेत दूसरे अफ्रीकी देशों में सक्रिय हैं, जो सोने की खदान को कंट्रोल करते हैं और सोन भरकर वापस रूस भेजते हैं। सूडान और माली सरकारों ने रूसी वैगनर समूह के भाड़े के सैनिकों को काम पर रखा है, जिन पर यूरोपीय संघ और यू.एस. ने मानवाधिकारों का हनन करने और सोने और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का आरोप लगाया है।

हालांकि, वैगनर के संस्थापक येवगेनी प्रिगोझिन ने इस बात से इनकार किया है कि वैगनर के लड़ाके अफ्रीका में नरसंहार और अन्य दुर्व्यवहारों में शामिल थे।

इसके साथ ही, फ्रांसीसी सैनिक, जिन्होंने बुर्किना फासो को 2016 तक इस्लामिक जिहादियों से बचा रखा था, उन्हें वहां के सैन्य शासकों ने देश से बाहर निकल जाने को कहा। जिसके बाद घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो-एडो ने पिछले साल सार्वजनिक रूप से बुर्किनाबे शासन पर उग्रवादी समूहों से लड़ने के लिए वैगनर भाड़े के सैनिकों का उपयोग करने का आरोप लगाया।

कुल मिलाकर स्थिति ये है, कि बुर्किना फासो में जनता त्रस्त है। उन्हें कभी वहां के सैन्य शासक मारते हैं, तो कभी इस्लामिक आतंकवादी। इन सबके बीच देश की स्थिति अब पूरी तरह से खराब और बर्बाद हो चुकी है।

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