विश्व के दो सुपरपावर्स, अमेरिका और चीन, क्यों हो रहे हैं कोरोना को कंट्रोल करने में नाकाम?

चीन ने अपने देश में विश्व का सबसे सख्त लॉकडाउन लगा रखा है, तो अमेरिका के अस्पतालों में अचानक भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 200% का इजाफा आया है।

वॉशिंगटन/बीजिंग, दिसंबर 31: विश्व के दो सुपरपावर्स चीन और अमेरिका, जिनके पास संपत्ति से लेकर टेक्नोलॉजी और सुविधाओं की कोई कमी नहीं है और जो पूरी दुनिया को अपने इशारे पर नचाते हैं, वो इस वक्त कोविड महामारी के आगे घुटनों पर है। चीन नें सवा करोड़ से ज्यादा आबाजी वाले शीआन शहर में विश्व का सबसे सख्त लॉकडाउन लगा रखा है, तो अमेरिका में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 200 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में सवाल ये है, कि आखिर इन दोनों देशों ने विश्व में सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाने का दावा भी किया है, फिर भी इन दोनों देशों में कोरोना वायरस ऑउट ऑफ कंट्रोल कैसे है?

कोरोना से कराहता अमेरिका

कोरोना से कराहता अमेरिका

ये साल आशा की उस ज्वाला में डूब रहा है, कि आने वाला साल इंसानों को कोविड नाम की इस महामारी से हमेशा के लिए मुक्ति दिला दे और विश्व में सभी के लिए कोविड वैक्सीन उपलब्ध हो। अमेरिका में सिर्फ इस साल कोरोना वायरस से 3 लाख 50 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को लेकर देश से लगातार झूठ बोला और इस साल जब जो बाइडेन ने देश की सत्ता को संभाला, तो उन्होंने बहुत हद तक अमेरिका को कोविड महामारी के तूफान से बाहर निकाला, लेकिन साल खत्म होते होते अमेरिका फिर से कोविड तूफान की भयानक तूफान में फंसा हुआ है और जॉर्जिया जैसे प्रांत में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 200 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

अमेरिका के अस्पताल मरीजों से भरे

अमेरिका के अस्पताल मरीजों से भरे

आज साल का आखिरी दिन और साल के आखिरी दिन की रिपोर्ट ये है, कि ज्यादातर अमेरिकी अस्पताल कोरोना मरीजों से भरे हुए हैं और ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से पिछले 24 घंटे में अमेरिका में करीब 5 लाख मरीज मिले हैं, बताता है, कि हम इस साल भी कोविड 19 के खिलाफ लड़ाई जीत पाने में नाकाम रहे हैं। अमेरिका के लोगों के लिए साल का आखिरी महीना काफी ज्यादा घातक हो रहा है और अमेरिका में मृतकों की संख्या बढ़कर आठ लाख 20 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। वहीं, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन अगले एक महीने में करीब 44 हजार लोगों की और मौत की भविष्यवाणी की है, यानि हर दिन एक हजार से ज्यादा मौतें और ये आंकड़ा काफी निराशाजनक है। वहीं, अब व्हाइट हाउस में ही ओमिक्रॉन वेरिएंट पर कमला हैरिस बनाम जो बाइडेन हो चुका है।

अमेरिका में नई त्रासदी की शुरूआत

अमेरिका में नई त्रासदी की शुरूआत

एक्सपर्ट्स साफ तौर पर कह चुके हैं, कि आने वाले महीने अमेरिका के लोगों के लिए भयावह साबित होंगे और नये साल पर मनाए जाने वाला जश्न इस भयावह आंकड़े की रफ्तार को मौत की रेखा तक पहुंचा देगा। एक्सपर्ट्स ने कहा है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट आने वाले दिनों में अमेरिका की चिकित्सा प्रणाली को बुरी तरह से प्रभावित करेगा वैज्ञानिक साक्ष्य के मुताबिक, उम्र के बढ़ते पड़ाव के साथ ओमिक्रॉन वेरिएंट लंबी बीमारी का कारण बन सकता है। हालांकि, जिन लोगों ने वैक्सीन की खुराक ले रखी है, उनके लिए ओमिक्रॉन ज्यादा खतरनाक नहीं है, लेकिन अमेरिका की सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि अभी भी करोड़ों लोग हैं, जो वैक्सीन लेना ही नहीं चाहते हैं और ऐसे वर्क का मानना है कि, साजिश की तहत वैक्सीन को लाया गया है, क्योंकि कोरोना वायरस असल में है ही नहीं।

वैक्सीन से क्यों भागते अमेरिकी?

वैक्सीन से क्यों भागते अमेरिकी?

आप हैरान हो सकते हैं, लेकिन अमेरिका में वैक्सीन को लेकर जो राजनीति हो रही है, वो भारत की तुलना में अलग स्तर का है। भारत में तो जिन लोगों ने वैक्सीन पर राजनीति की थी, वो खुद अब वैक्सीन की खुराक इई में कोरोना से मची तबाही के बाद लगवा चुके हैं, लेकिन अमेरिका में करीब 9 करोड़ ऐसे लोग हैं, जिन्होंने वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ली है। इनमें से ऐसे लोग भी हैं, जो अभी वैक्सीन लेने की तय उम्र में नहीं पहुंचे हैं, लेकिन एक बड़ा वर्ग है, जो वैक्सीन पर राजनीति करता है और इसीलिए वैक्सीन नहीं ले रहा है। ये वर्ग कोरोना वायरस को अमेरिका की सत्ता पक्ष की साजिश करार देता है और यही वजह है कि, न्यू जर्सी जैसे प्रांत की सरकार बार बार चेतावनी के बाद भी कोविड प्रतिबंध लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।

अस्पतालों में 200% मरीजों की ज्यादा भर्ती

अस्पतालों में 200% मरीजों की ज्यादा भर्ती

वहीं, जॉर्जिया में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 200 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है और ज्यादातर अस्पतालों में क्षमता से कई गुना ज्यादा मरीजों को भर्ती किया गया है। देश भर के अस्पतालों में हड़पंच मचने की खबर है और न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क से अर्कांसस और शिकागो तक में रिकॉर्ड संख्या में मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिल रही है और अस्पतालों की क्षमता पर काफी ज्यादा बोझ पड़ने से हेल्थ सिस्टम के चरमराने की आशंका बन गई है। वहीं, लुइसियाना में, कोविड-19 अस्पताल में पिछले दो हफ्तों में मरीजों की संख्या तीन गुना ज्यादा बढ़ गई है और राज्य के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ कैथरीन ओ'नील ने कहा कि, अस्पतालों पर बोझ लगातार बढ़ता ही जा रही है।

चीन में सबसे ज्यादा सख्त लॉकडाउन

चीन में सबसे ज्यादा सख्त लॉकडाउन

चीन की सरकार वुहान में कोविड संक्रमण को रोकने में पूरी तरह से कामयाब हो चुकी थी, लेकिन ज़ीरो कोविड पॉलिसी को लेकर चलने वाली चीन की सरकार ने देश में इतनी सख्ती बढ़ा दी है, कि लोगों को घर से बाहर निकलने में भी डर सताता है। चीन की सरकार ने शीआन शहर में विश्व का सबसे ज्यादा सख्त लॉकडाउन लगा रखा है, जहां की एक करोड़ 30 लाख की आबादी को घरो में कैद होकर रहना पड़ रहा है। शीआन शहर में तो वैसे सिर्फ 100 के करीब मामले मिले हैं, लेकिन पूरे शहर में भयानक सख्ती है और अब स्थिति ये है कि, लोगों के सामने ने का संकट पैदा हो गया है और चीन के अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार भी किया है। चीन के शीआन शहर में रहने वाले लोगों का गुस्सा अब चीन की सरकार पर फूट पड़ा है।

भूखे रहने पर मजबूर शीआन शहर के लोग

भूखे रहने पर मजबूर शीआन शहर के लोग

चीन ने शून्य कोविड पॉलिसी के तहत 1.3 करोड़ लोगों को अपने उत्तरी शहर शीआन में कैद करके रखा हुआ और उनके खिलाफ काफी ज्यादा कड़े प्रतिबंध लगाए गये है। लेकिन, वो कोरोना को कंट्रोल करने में नाकाम रही है। एक तरफ जहां शीआन शहर का बहुत बुरा हाल वहीं, चीन के कुछ अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि, आवश्यक खाद्य आपूर्ति प्रदान करने मेंपरेशानी हुई है। एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि, 'शीआन में दैनिकआवश्यकताओं की कुल आपूर्ति अपर्याप्त है'।

निवाले के लिए तरसते लोग

निवाले के लिए तरसते लोग

वहीं एक निवासी उपनाम वांग ने कहा कि, 'मैं जीवितरहने के लिए हर दिन एक कटोरी दलिया खाता हूं।उन्होंने कहा कि,'मैंने सुना है कि दूसरे जिलों मेंदोस्तों ने अपना खाना पहुंचाया, लेकिन यहां वेयांग जिले में नहीं।' वहीं, एक महिला ने कहा कि, 'मुझे कोई खाना नहीं दिया गया। मैं दो दिन पहले स्टोर से कुछ सामान लाने में कामयाब रही थी, लेकिनआज नहीं।'उन्होंने कहा कि, "मेरे पास घर पर सिर्फ चावल और अंडा है''। वहीं, एक महिला ने अपनानाम नहीं बताते हुए कहा कि, वो किसी तरह कम्युनिटी मैनेजर की मदद से सुपरमार्केट से खाने कासामान लाने में कामयाब रही है।

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