Alien News: आखिर कभी एलियंस पृथ्वी पर क्यों नहीं आते हैं? नोबेल विजेता वैज्ञानिक ने दिया परेशान करने वाला जवाब

एलियंस द्वारा मानवता का दौरा कभी क्यों नहीं किया गया (जिसे हम जानते हैं)? इस सवाल ने दशकों से वैज्ञानिकों को भ्रमित किया है, लेकिन दो वैज्ञानिकों ने रिसर्च के आधार पर बताने की कोशिश की है, कि एलियंस धरती पर क्यों नहीं...

वॉशिंगटन, मई 21: क्या धरती पर रहने वाले इंसान जितनी शिद्दत के साथ एलियंस के बारे में जानने, समझने और उन्हें देखने के लिए शिद्दत से इंतजार करते हैं, क्या एलियंस भी ऐसा करते होंगे? आखिर कभी एलियंस धरती का दौरा क्यों नहीं करत हैं? वैज्ञानिकों ने इन सवालों का परेशान करने वाले जवाब खोजे हैं और कुछ वैज्ञानिकों ने तो यहां तक कहा है, कि अगर एलियंस घरती पर आते हैं, तो या वो खुद ही बर्बाद हो जाएंगे, या फिर उनकी सभ्यता इतनी ज्यादा उन्नत होगी, कि वो इंसानों के अस्तित्व को ही मिटा देंगे।

पृथ्वी पर क्यों नहीं आते एलियंस?

पृथ्वी पर क्यों नहीं आते एलियंस?

एलियंस द्वारा मानवता का दौरा कभी क्यों नहीं किया गया (जिसे हम जानते हैं)? इस सवाल ने दशकों से वैज्ञानिकों को भ्रमित किया है, लेकिन दो वैज्ञानिकों ने रिसर्च के आधार पर बताने की कोशिश की है, आखिर एलियंस धरती पर क्यों नहीं आते हैं? नई परिकल्पना से पता चलता है कि, जैसे-जैसे अंतरिक्ष-सभ्यताएं बड़े पैमाने पर और तकनीकी विकास की तरफ बढ़ती जाती हैं, वे अंततः एक प्वाइंट पर पहुंच जाते हैं, जहां से उनका खात्मा होने लगता है और जहां पर इनोवेशन ऊर्जा की जरूरत के बीच का अंतर काफी ज्यादा बढ़ जाता है और फिर इससे आगे पतन हो जाता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि एकमात्र वैकल्पिक रास्ता संतुलन बनाए रखने के पक्ष में "निर्बाध विकास" के मॉडल को अस्वीकार करना है, लेकिन अलग अलग ग्रहों पर पहुंचने में किसी सभ्यता को जो कीमत चुकानी पड़ती है, वो काफी ज्यादा हो जाता है।

रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस पत्रिका में प्रकाशित

रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस पत्रिका में प्रकाशित

एलियंस को लेकर वैज्ञानिकों की ये रिपोर्ट 4 मई को रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस पत्रिका में प्रकाशित की गई है, जिसे फर्मी विरोधाभास कहा गया है। इस रिसर्च को नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने तैयार किया है, जिन्होंने ब्रह्मांड के विशाल दायरे और उम्र के बीच विरोधाभास की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया है। इस रिपोर्ट में वैज्ञानिक फर्मी ने सवाल उठाया है कि, विशालकाय ब्रह्मांड में एडवांस लाइफ को होना चाहिए, लेकिन हमारे पास वो टेक्नोलॉजी नहीं है, कि हम उन्हें देख सकें या उन्हें लेकर सबूत इकट्ठा कर सकें। तो फिर सवाल ये है, कि आखिर वो कहां हैं? नए अध्ययन के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके पास इसका जवाब हो सकता है।

क्या एलियंस के लिए भी विस्तार संभव नहीं है?

क्या एलियंस के लिए भी विस्तार संभव नहीं है?

कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट माइकल वोंग और कैलिफोर्निया के स्टुअर्ट बार्टलेट ने कहा कि, "सभ्यताएं या तो बर्नआउट से ढह जाती हैं या खुद को होमियोस्टेसिस को प्राथमिकता देने के लिए पुनर्निर्देशित करती हैं, यानि एक ऐसे प्वाइंट पर पहुंच जाना, जहां ब्रह्मांडीय विस्तार अब एक लक्ष्य नहीं रह जाता है और जिसके बारे में पता लगाना असंभव हो जाता है। प्रौद्योगिकी संस्थान, ने अध्ययन में लिखा है कि, 'एक प्वाइंट पर जाकर सभ्यताओं का पतन हो जाता है और हो सकता है कि एलियंस के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ हो'।

क्या एलियंस का हो चुका है विनाश?

क्या एलियंस का हो चुका है विनाश?

वैज्ञानिक माइकल वोंग और कैलिफोर्निया के स्टुअर्ट बार्टलेट ने अपनी थ्योरी को साबित करने के लिए, कि हो सकता है एलियंस की सभ्यता का पतन हो चुका हो, उन्होंने 'सुपरलाइनर' थ्योरी दिया है। इस परिकल्पना में उन्होंने कहा है कि, एक वक्त के बाद अत्यंत विकसित हो जाने वाले शहर के पास फैलाव का क्षमता खत्म हो जाता है, लेकिन उनकी जरूरतें काफी ज्यादा बढ़ चुकी होती हैं, क्योंकि आबादी बढ़ती जाती है, लेकिन शहर का बढ़ना बंद हो जाता है और उनकी ऊर्जा जरूरतें भी काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं, जो पूरे शहर को ही संकट में धकेलने लगता है और पूरा शहर ही दुर्घटना का शिकार हो जाता है। परिणामस्वरूप, अत्यंत विकसित हो चुकी सभ्यताओं का विनाश हो जाता है।

ज्यादा विकास क्यों बन जाता है विनाश?

ज्यादा विकास क्यों बन जाता है विनाश?

वैज्ञानिकों ने कहा कि, इसे इस तरह से समझिए, कि एक सभ्यता का विकास होता है और वो धीरे धीरे ग्लोबल सभ्यता के तौर पर विकसित हो जाते हैं और विकास की पराकाष्ठा इस हद तक पहुंच जाता है, कि सारे शहर आपस में जुड़ से जाते हैं और शहरों के पास फैलाव का जगह खत्म हो जाता है, लिहाजा एक प्वाइंट पर जाकर सभ्यता को 'एसिम्प्टोटिक बर्नआउट' का सामना करेगा, जहां तमाम इनोवेशन खत्म हो जाते हैं और सभ्यताओं का विनाश हो जाता है।

क्या ऐसी सभ्यताओं का पता चल पाएगा?

क्या ऐसी सभ्यताओं का पता चल पाएगा?

वैज्ञानिक माइकल वोंग और कैलिफोर्निया के स्टुअर्ट बार्टलेट ने सुझाव देते हुए कहा है कि, जब एक सभ्यता का विनाश होता है, तो वो काफी ज्यादा और बेतहाशा मात्रा में ऊर्जा का उस्तर्जन करते हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि इन खत्म होती सभ्यताओं का पता लगाना इंसानों के लिए सबसे आसान हो सकता है, क्योंकि वो बेतहाशा मात्रा में ऊर्जा को नष्ट करेंगे। शोधकर्ताओं ने लिखा, "यह इस संभावना को प्रस्तुत करता है कि मानवता के अलौकिक जीवन के शुरुआती कई अच्छे बुद्धिमान हो सकते हैं, हालांकि अभी तक बुद्धिमान नहीं हैं।"

क्या इसीलिए नहीं कर पाते हैं पृथ्वी से संपर्क?

क्या इसीलिए नहीं कर पाते हैं पृथ्वी से संपर्क?

शोधकर्ताओं का सुझाव है कि अपने विनाश को टालने के लिए, सभ्यताओं को "होमियोस्टैटिक जागृति" से गुजरना पड़ सकता है, जिसका मतलब ये है, कि वो अंधाधुंध विकास को रोककर न्यायसंगत विकास के रास्ते पर बढ़ा जाए और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता बनाया जाए। शोधकर्ताओं का कहना है कि, हालांकि ऐसी सभ्यताएं अंतरिक्ष अन्वेषण को पूरी तरह से नहीं छोड़ सकती हैं, लेकिन वे पृथ्वी के साथ संपर्क बनाने के लिए पर्याप्त पैमाने पर विस्तार नहीं कर पाएंगी। शोधकर्ताओं ने धरती का उदाहरण देते हुए कहा है कि, जैसे धरती पर ही परमाणु बम बनाने की रेस चली और करीब 70 हजार परमाणु हथियार बनाए गये। लेकिन फिर 'मिनी जागृति' आई और अब सिर्फ 14000 परमाणु बम ही बचे हैं। इसके साथ ही क्लोरोफ्लोरोकार्बन उत्सर्जन पर प्रतिबंध लगाकर पृथ्वी की ओजोन परत में एक बार बढ़ते छेद को रोकना। लिहाजा, वैज्ञानिकों का मानना है कि, या तो एलियंस का विनाश हो चुका है, इसीलिए वो धरती पर नहीं आ पाएंगे या फिर उन्होंने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अब खुद को समेटना शुरू कर दिया है, इसीलिए हो सकता है, कि अब उन्होंने किसी और सभ्यता की खोज करनी बंद कर दी हो।

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