अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन क्या है, जो डोनाल्ड ट्रंप को लड़ने नहीं देगा चुनाव.. अगले साल US में गृहयुद्ध?
US Presidential Election: 2024 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अपनी कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आपराधिक अदालती मामले, प्राथमिक प्रतिद्वंद्वी और फिर से राष्ट्रपति पद संभालने की उनकी पात्रता के रास्ते में संवैधानिक चुनौतियां।
कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने 19 दिसंबर 2023 को फैसला सुनाते हुए डोनाल्ड ट्रंप के राज्य से उम्मीदवारी को अयोग्य घोषित कर दिया है। कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, कि ट्रम्प 6 जनवरी 2021 के विद्रोह में शामिल होने के कारण कोलोराडो के 2024 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवारी नहीं जता सकते हैं।

कोलोराडो राज्य के बाद मेन राज्य में भी डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया गया है, और ऐसी आशंका है, कि डेमोक्रेट्स के बहुमत वाले कई और राज्यों में डोनाल्ड ट्रंप को अयोग्य ठहराया जा सकता है, जिसे ट्रंप की टीम ने अलोकतांत्रिक कहा है।
कई एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है, कि डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव लड़ने से अयोग्य साबित करने की कोशिश अमेरिका को आखिरकार गृहयुद्ध की तरफ धकेल सकती है और ट्रंप के मतदादा, जो वोट करके बाइडेन से 'बदला' लेना चाहते हैं, वो डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदवारी रद्द होने की स्थिति में देश को अराजक स्थिति में धकेलने से पीछे नहीं हटेंगे।
अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप को अयोग्य घोषित करने का कारण संविधान में किया गया 14वां संशोधन है, जिसे गृह युद्ध समाप्त होने के तीन साल बाद 1868 में अनुमोदित किया गया था।
उस संशोधन की धारा 3 ने संविधान में वह सिद्धांत लिखा, जो राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने गृहयुद्ध में पहली गोली चलने के ठीक तीन महीने बाद निर्धारित किया था।
4 जुलाई 1861 को, उन्होंने कांग्रेस को संबोधित करते हुए घोषणा की थी, कि "जब मतपत्र निष्पक्ष और संवैधानिक रूप से निर्णय लेते हैं, तो फिर गोलियों के साथ कोई खड़ा नहीं होता है।"
अमेरिकी संविधान का संशोधन 14 कहता है,
"कोई भी व्यक्ति कांग्रेस में सीनेटर या प्रतिनिधि नहीं होगा, या राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के काबिल नहीं होगा, या संयुक्त राज्य अमेरिका या किसी भी राज्य के तहत कोई भी नागरिक या सैन्य कार्यालय के काबिल नहीं होगा, जिसने कांग्रेस के सदस्य के रूप में, या संयुक्त राज्य अमेरिका के एक अधिकारी के रूप में, या किसी भी राज्य विधायिका के सदस्य के रूप में, या किसी भी राज्य के कार्यकारी या न्यायिक अधिकारी के रूप में शपथ ली हो, और वो
संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के खिलाफ विद्रोह या विद्रोह की मदद करने वालों ही सहायता में शामिल रहा हो।"
कोलोराडो राज्य के सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के इसी संशोधन के तहत डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई है और उन्हें 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी कांग्रेस पर हुए हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
अमेरिकी कांग्रेस और सीनेट में बड़ी संख्या में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट इस बात पर सहमत हैं, कि डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 जनवरी 2021 की घटनाओं से ठीक पहले, उसके दौरान और तुरंत बाद अपने पद की शपथ का उल्लंघन किया।
कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने भी यह पाया, कि ट्रम्प "विद्रोह में लगे हुए थे", लिहाजा कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के वोट देने पर भी रोक लगा दी है।
लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप जितनी लोकप्रियता के साथ आगे बढ़ रहे हैं और उनके समर्थक जितने कट्टर हो चुके हैं, उससे आशंका इस बात की बनती है, कि डोनाल्ड ट्रंप को चुनावी रास्ते से हटाना अमेरिका के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

क्या अमेरिका में विद्रोह करेंगे ट्रंप समर्थक?
अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि मेन राज्य ने 6 जनवरी, 2021 को यूएस कैपिटल दंगे के बाद डोनाल्ड ट्रम्प को मतदान से बाहर करने वाला दूसरा राज्य बनकर 2024 के चुनाव को गहरी अराजकता और संवैधानिक भ्रम में डाल दिया है।
बढ़ती अनिश्चितता को तत्काल समाधान की आवश्यकता है, क्योंकि आयोवा राज्य, 15 जनवरी को रिपब्लिकन नामांकन दौड़ में मतदान शुरू करने के लिए तैयार है और अन्य प्रमुख मतदान की समय सीमा भी नजदीक आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी अयोग्यता के बीच आशंका ये है, कि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ 'बदले की यह कार्रवाई' उनके खिलाफ उल्टा भी पड़ सकता है।
ट्रम्प जिन कई आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं, उससे आधार मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता में वृद्धि हुई है, भले ही 2020 में उनका जंगली अलोकतांत्रिक आचरण उनकी अयोग्यता की वजह बना है।
रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार क्रिस क्रिस्टी ने शुक्रवार को "सीएनएन दिस मॉर्निंग" को बताया, कि कोलोराडो और मेन राज्य में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जो कार्रवाई की गई है, वो पूर्व राष्ट्रपति को "शहीद" बनाती हैं।
उन्होंने कहा, कि "हो सकता है, कि ये लोकतंत्र के लिए अच्छा ना हो, लेकिन सच यही है, कि अमेरिकी लोकतंत्र के लिए यही अच्छा होगा, कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव में ही उन्हें हराया जाना चाहिए, ट्रंप की सच्चाई को लेकर जनता के बीच जाना चाहिए और डोनाल्ड ट्रंप की भाग्य का फैसला जनता की अदालत में होना चाहिए।"
कुल मिलाकर स्थिति ये बन रही है, कि अमेरिका एक नाजुक रास्ते पर आकर खड़ा हो गया है और अगले साल, देश अराजक माहौल में भी जा सकता है और अमेरिका, जो दूसरे देशों में लोकतंत्र की दुहाई देता रहता है, वो खुद लोकतांत्रिक संकट में फंस सकता है।












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