हसन नसरल्लाह का उत्तराधिकारी कौन होगा? हिज्बुल्लाह की सेकंड लाइन लीडरशिप में कौन कौन, कौन संभालेगा जिम्मा?

Hassan Nasrallah: हसन नसरल्लाह की मौत के बाद हिज्बुल्लाह के अंदर एक शून्य पैदा हो गया है और अब सवाल उठ रहे हैं, कि आखिर किसके हाथ में इस आतंकवादी संगठन की कमान आएगी। नसरल्लाह पिछले 35 सालों से ज्यादा वक्त से इस संगठन का मुखिया था, लिहाजा किसी और के लिए समूह के अंदर सभी को एक साथ लेकर चलना आसान नहीं होगा।

हिज्बुल्लाह के लिए दूसरी परेशानी ये है, कि पिछले कई महीनों से जारी इजराइली ऑपरेशंस में हिज्बुल्लाह की टॉप लीडरशिप के कई बड़े नेता पहले ही खत्म हो चुके हैं, लिहाजा अब इस आतंकवादी संगठन को किसी कम अनुभव वाले नेता पर विश्वास जताना होगा। हिज्बुल्लाह के समर्थकों का मानना है, कि नसरल्लाह की मौत न सिर्फ एक प्रमुख व्यक्ति के निधन का प्रतीक है, बल्कि लेबनानी शिया आंदोलन के लिए भी बहुत बड़ा झटका है।

Hezbollah s next leader

नसरल्लाह की कुर्सी पर कौन पर बैठेगा?

हसन नसरल्लाह 1992 में हिज्बुल्लाह के महासचिव बना था, जब उसकी उम्र सिर्फ 30 साल थी और उसके बाद से वो लगातार हिज्बुल्लाह का प्रमुख बना रहा, लिहाजा हिज्बुल्लाह के लिए उसके समान नेता खोजना मुश्किल होगा, क्योंकि जो अगला लीडर होगा, उसे ना सिर्फ संगठन को संभालना होगा, बल्कि उसे इजराइली हमलों से भी बचना होगा। खासकर उस वक्त, जब इजराइल की योजना दक्षिणी लेबनान में भी जमीनी सैन्य अभियान चलाने की हो सकती है।

ऐसे में आइये जानते हैं, कि हसन नसरल्लाह के मारे जाने के बाद हिब्जुल्लाह का अगला लीडर कौन हो सकता है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रेस में सबसे आगे दो शख्स चल रहे हैं, जिनमें से एक का नाम हाशेम सफीद्दीन और नईम कासिम हैं। आइये जानते हैं, कि ये दोनों कौन हैं?

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हाशेम सफीद्दीन

हाशेम सफीद्दीन, हिज्बुल्लाह की कार्यकारी परिषद का प्रमुख होने के साथ साथ नसरल्लाह का चचेरा भाई भी है। सफीद्दीन को व्यापक रूप से हिज्बुल्लाह के अगले महासचिव बनने की रेस में आगे माना जा रहा है।

1964 में टायर के पास डेयर कानून एन-नहर के दक्षिणी गांव में जन्मे सफीद्दीन ने शिया धार्मिक शिक्षा के दो मुख्य केंद्रों, इराकी शहर नजफ़ और ईरान के क़ोम में नसरल्लाह के साथ इस्लामी शिक्षा का अध्ययन किया। दोनों ही संगठन के शुरुआती दिनों में हिज़्बुल्लाह में शामिल हुए थे।

सफीद्दीन एक कट्टर मजहबी शिया परिवार से आता है और उसके परिवार से कई कट्टर मजहबी नेता और लेबनान के सांसद निकले हैं, जबकि उसका भाई अब्दुल्ला, ईरान में हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधि के रूप में काम करता है। सफीद्दीन के ईरान से अपने करीबी संबंध हैं, जबकि उसके बेटे, रेधा की शादी 2020 में अमेरिकी हमले में मारे गए शीर्ष ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की बेटी से हुई है।

कार्यकारी परिषद का नेतृत्व करने में उसकी भूमिका के साथ-साथ, सफीद्दीन समूह की शूरा परिषद का एक महत्वपूर्ण सदस्य और इसके जिहादी परिषद का प्रमुख भी है। इस महत्व ने उसे हिज्बुल्लाह के विदेशी विरोधियों का दुश्मन बना दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब ने सफीद्दीन को आतंकवादी घोषित किया है और उसकी संपत्तियां जब्त कर ली हैं।

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नईम कासिम

71 साल का नईम कासिम, हिज्बुल्लाह का उप महासचिव है और उसे अक्सर हिज्बुल्लाह का नंबर-2 माना जाता रहा है। उसका जन्म नबातिह गवर्नरेट के कफर किला में हुआ था, जो दक्षिणी लेबनान का एक गांव है। इस गांव पर पिछले साल अक्टूबर के बाद से इजराइल ने कई हमले किए हैं।

कासिम का शिया राजनीतिक सक्रियता में एक लंबा इतिहास रहा है। 1970 के दशक में, वह इमाम मूसा अल-सदर की तरफ से चलाए गये आंदोलन में शामिल हो गया था, जो अंत में लेबनान में एक शिया समूह, अमल आंदोलन का हिस्सा बन गया। बाद में उसने अमल छोड़ दिया और 1980 के दशक की शुरुआत में हिज्बुल्लाह की स्थापना में मदद की, और समूह के संस्थापक धार्मिक विद्वानों में से एक बन गया।

कासिम के धार्मिक गुरुओं में से एक कट्टर इस्लामिक विचारधारा को मानने वालवा अयातुल्ला मोहम्मद हुसैन फदलल्लाह था, वहीं कासिम ने बेरूत में दशकों तक इस्लामिक शिक्षा हासिल की, जिससे वो काफी कट्टर बन गया। हालांकि, हिज्बुल्लाह में उसकी क्या भूमिका है, ये एक रहस्य है। हिज्बुल्लाह के बड़े नेताओं की जानकारी हमेशा से काफी गुप्त रही है, इसलिए उसकी सभी भूमिकाओं की जानकारी नहीं है।

लेकिन एक वक्त वो हिज्बुल्लाह के शैक्षिक नेटवर्क के एक हिस्से की देखरेख की और समूह की संसदीय गतिविधियों की देखरेख में भी शामिल था। कासिम को 1991 में तत्कालीन महासचिव अब्बास अल-मुसावी के अधीन उप महासचिव चुना गया था, जिनकी भी इजराइल ने हत्या कर दी थी। कासिम ने भी वर्षों से हिज़्बुल्लाह में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक भूमिका निभाई है, और समूह की शूरा परिषद के सदस्य भी है।

उसने 2005 में हिज़्बुल्लाह, द स्टोरी फ्रॉम विदिन नामक एक किताब लिखी थी, जिसका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया।

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