कौन हैं अनिल शर्मा ? जिनका मालवाहक जहाज 50,000 मीट्रिक टन गेहूं लेकर पहुंचा पाकिस्तान
एमवी लीला चेन्नई नाम का जो मालवाहक जहाज रूस से 50,000 मीट्रिक टन गेहूं लेकर पाकिस्तान पहुंचा है, उसका स्वामित्व भारतीय मूल के व्यक्ति के पास है। अनिल शर्मा मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं।

भूख से तड़पते पाकिस्तानियों को दोनों वक्त की रोटी मिल सके, इसके लिए आखिर एक भारतीय मूल का शख्स ही आगे आया है। इनका नाम है, मालवाहक जहाजों के कारोबार में दुनियाभर में एक मशहूर नाम अनिल शर्मा। यह मूलरूप से गुजरात के भावनगर के रहने वाले हैं, लेकिन आजकल दुबई में रह रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि गुजरात का लोथल सिंधु घाटी सभ्यता में प्रसिद्ध बंदरगाह था तो उसका प्रभाव आज भी गुजरात के बंदरगाहों पर नजर आता है। खुद अनिल शर्मा भी बड़े फक्र से अपने भावनगर में बिताए दिनों को याद करते हैं, जिसके चलते उन्होंने ऐसे कारोबार में कदम रखा, जो मुसीबत के समय दुश्मन मुल्क के भी काम आ रहा है।

एमवी लीला चेन्नई 50,000 मीट्रिक टन गेहूं लेकर पहुंचा पाकिस्तान
पाकिस्तान दिवालिया हो रहा है और वहां के लोग भूखों तड़प रहे हैं। संबंध सामान्य होते तो भारत बिना एक मिनट देर किए वहां राहत सामग्री भेज सकता था। अनाज के मामले में भारत ना सिर्फ आत्मनिर्भर है, बल्कि वह इसका निर्यात भी करता है। लेकिन, पाकिस्तान को दूर-देशों से गेहूं मंगवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि, फिर भी एक भारतीय मूल का व्यक्ति ही आखिरकार इस दयनीय स्थिति में उसके काम आया है। एमवी लीला चेन्नई नाम के जिस मालवाहक जहाज से रूस से 50,000 मीट्रिक टन गेहूं ग्वादर बंदरगाह पहुंचा है, वह भारतीय मूल के व्यक्ति के ही स्वामित्व वाला है। पाकिस्तान में मुद्रास्फीति 40% हो चुकी है और देश में अनाज संकट की वजह से वहां हाहाकार मचा हुआ है।

भारतीय मूल के व्यक्ति का है ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम
एमवी लीला चेन्नई गेहूं की जो खेप लेकर पाकिस्तान पहुंचा है, वह रूस से वहां भेजे जा रहे 4,50,000 मीट्रिक टन गेहूं का हिस्सा है। एमवी लीला चेन्नई उन 40 मालवाहक जहाजों में से एक है, जिसका स्वामित्व ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम (GMS Inc)के पास है। इसकी स्थापना भारतीय मूल के अनिल शर्मा ने की है। इसे दुनिया में जहाजों का सबसे बड़ा खरीदार और ऑफ्शोर ऐसेट्स को रीसाइकिल करने वाली कंपनी माना जाता है।

कौन हैं अनिल शर्मा ?
इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग की वेबसाइट के मुताबिक अनिल शर्मा ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम के संस्थापक और सीईओ हैं। भारतीय मूल के शर्मा बाद में अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स और डॉक्टरेट दोनों किया है। कारोबार जगत में आने के पहले 10 साल उन्होंने प्रोफेसर के तौर पर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया। फिर अमेरिकी यूनिवर्सिटी में बिजनेस डिपार्टमेंट के चेयरमैन बन गए। 1992 में उन्होंने ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम की स्थापना की और दुनिया में शिप रीसाइकलिंग के अगुवा बन गए। मैरीटाइम सेक्टर में उनके योगदान को देखते हुए लॉयड की लिस्ट में उनको लगातार 11 साल तक शिपिंग के दुनिया में 100 सबसे ज्यादा प्रभावशाली शख्सियतों में रखा। मौजूदा समय में वह दुबई में रहते हैं और वहीं अपना जहाजरानी कारोबार चला रहे हैं।

गुजरात के भावनगर से है कनेक्शन
अनिल शर्मा मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं। वे दिल्ली डायनमो के इंडियन सुपर लीग टीम (ओडिशा जाने के बाद इसका नाम ओडिशा एफसी कर दिया गया) के भी मालिक हैं। अपने बेटे रोहन की वजह से वे क्रिकेट के बजाय फुटबॉल में निवेश करना पसंद करते रहे हैं। एक मरीन जर्नल को दिए इंटरव्यू में शर्मा ने जहाजरानी क्षेत्र में अपनी दिलचस्पी का कारण गुजरात के भावनगर से अपने जुड़ाव को दिया था। क्योंकि, इसकी वजह से उन्हें शिपिंग रीसाइक्लिंग और स्टील उद्योग से जुड़े कारोबारी दोस्त मिले।
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शिपिंग कारोबार में है इसका बड़ा नाम
शिपिंग एंड मैरीन ट्रैकिंग रिकॉर्ड से पता चलता है कि एमवी लीला चेन्नई लाइबेरिया का झंडा लगाकर रूस के नोवोरोस्सिय्स्क बंदरगाह से 10 फरवरी को निकला और 1 मार्च को पाकिस्तान का ग्वादर बंदरगाह पहुंचा। रूस से गेहूं का ये खेप 9 जहाजों में पूरे मार्च तक यूं ही ग्वादर बंदरगाह पहुंचता रहेगा। उनकी कंपनी रूसी जहाजों की रीसाइक्लिंग से भी जुड़ी रही है। जीएमएस का कहना है कि मौजूदा समय में 40 जहाजों के मालिक होने के अलावा यह कंपनी रीसाइक्लिंग के लिए लगभग 4,000 जहाजों और अपतटीय इकाइयों के लिए बातचीत करने वाला विश्व का पहला और एकमात्र खरीदार है। (कुछ तस्वीरें सांकेतिक। अनिल शर्मा की तीसरी तस्वीर सौजन्य इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग और बाकी यूट्यूब वीडियो)












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