राष्‍ट्रपति ओबामा ने कहा इस्‍लाम के सही रास्‍ते के बारे में बात करें मुसलमान नेता

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने एक माह के अंदर दूसरी बार आईएसआईएस के खिलाफ दुनिया भर के मुस्लिम नेताओं से उनका रोल मजबूत करने की अपील की है। आतंकवाद और अमेरिका में गन लॉ को लेकर राष्‍ट्रपति ओबामा ने ओवल ऑफिस से राष्‍ट्र के नाम एक संदेश दिया। यह सिर्फ तीसरा मौका था जब उन्‍होंने ओवल ऑफिस से देश के नाम कोई संदेश दिया है।

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राष्‍ट्रपति ओबामा की एक अपील

राष्‍ट्रपति ओबामा ने दुनिया भर के मुसलमान नेताओं से अपने संदेश में क्‍या अपील की है। मुसलमान नेता आतंकी संगठन आईएसआईएस और इसकी विचारधारा के खिलाफ बोलें।

उन्‍होंने कहा कि मुसलमान नेता यह समझाएं कि आईएसआईएस इस्लाम की बात नहीं करता है। अमेरिका के लोगों से धर्म के आधार पर लोगों के खिलाफ भेदभाव न करने की अपील भी राष्‍ट्रपति ने की है।।राष्‍ट्रपति ओबामा ने कैलिफोर्निया की घटना एक आतंकवादी करतूत करार दिया।

अपने संदेश में उन्‍होंने पाकिस्तानी नागरिक ताशफीन मलिक और पति सैयद रिजवान फारूक का भी जिक्र किया। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इसका सबूत नहीं कि दोनों को किसी आतंकी संगठन ने घटना को अंजाम देने का निर्देश दिया था।

ओबामा ने कहा कि यह साफ है कि उन दोनों ने इस्लाम की एक गलत धारणा को अपनाया। इसके तहत दोनों ने कट्टरपंथ के रास्‍ते पर चलना शुरू कर दिया था। ओबाामा ने इससे पहले इजिप्‍ट मं जी-20 समिट के दौरान पेरिस आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए मुसलमानों से इसी तरह की अपील की थी।

क्‍या कहा इस्‍लाम के बारे में

  • कट्टरपंथ अमेरिका और पश्चिम देशों के खिलाफ युद्ध के लिए अपील करता है।
  • हमलावरों के पास असॉल्ट हथियार, गोला बारूद और पाइम बम थे।
  • ऐसे में इसे एक आतंकी कार्रवाई कहा जाता है।
  • दोनों का ही मकसद निर्दोष लोगों की हत्या करना था।
  • देशवासी इस युद्ध को अमेरिका और इस्लाम के बीच के युद्ध के तौर पर न देखें।
  • आईएसआईएस इस्लाम की बात नहीं करता।
  • वे ठग और हत्यारे हैं जो मौत के रास्‍ते का हिस्सा हैं।
  • आतंकी दुनिया में मौजूद एक अरब से भी से ज्‍यादा मुसलमानों का एक बहुत छोटा सा हिस्सा हैं।
  • विश्वभर के मुसलमानों में लाखों देशभक्त मुस्लिम-अमेरिकी भी हैं।
  • ये अमेरिका मुसलमान उनकि उनकी घृणास्पद विचारधारा को खारिज करते हैं।
  • आतंकवाद से पीड़ितों की बड़ी संख्या विश्व के मुसलमानों की ही है।
  • आतंकवाद को हराना है तो मुसलमानों को शक और घृणा की दृष्टि से देखना बंद करना होगा।
  • उन्हें हमारे कुछ सबसे मजबूत सहयोगियों में शामिल करना होगा।
  • हम यह मानने से इंकार नहीं कर सकते कि कट्टरपंथी विचारधारा कुछ मुस्लिम समुदायों में चुकी है।
  • यह एक वास्तविक समस्या है जिसका मुसलमानों को बिना कोई बहाना दिए सामना करना चाहिए।
  • यहां और विश्वभर में मुसलमान नेताओं को हमारे साथ मिलकर काम करना जारी रखना होगा।
  • उन्‍हें घृणास्पद विचारधारा को निर्णायक और साफ तरीके से खारिज करना होगा।
  • यह विचारधारा आईएसआईएस और अलकायदा जैसे संगठनों प्रोत्साहित करती है।
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