S-400: रूसी 'दिव्यास्त्र' कैसे खींचेंगा भारत की सुरक्षा में लक्ष्मण रेखा? जानिए मिसाइल की खासियत
एस-400 ट्रायम्फ, जिसे नाटो देश एसए-21 ग्रोलर कहता है, वो रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमएलआर-एसएएम प्रणाली है।
नई दिल्ली, नवंबर 14: रूस ने एस-400 मिसाइलों की डिलीवरी भारत को शुरू कर दी है और रूस से मिले इस दिव्यास्त्र ने भारत के सुरक्षा चक्र को काफी ज्यादा मजबूत कर दिया है। इस वक्त जब चीन और पाकिस्तान...दोनों ही तरफ से भारत को चुनौतियां मिल रही हैं, उस वक्त भारत के लिए एस-400 मिसाइल सिस्टम की काफी जरूरत महसूस हो रही थी। ऐसे में आईये जानते हैं कि, एस-400 मिसाइल भारत के लिए कितना उपयोगी है और भारत के लिए ये कितना अहम साबित होने वाला है?

क्या है रूसी एस-400 मिसाइल?
एस-400 ट्रायम्फ, जिसे नाटो देश एसए-21 ग्रोलर कहता है, वो रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमएलआर-एसएएम प्रणाली है। पहली बार 2007 में इस्तेमाल किया गया एस-400 मिसाइल मॉस्को की रक्षा के लिए तैनात किया गया था और ये मिसाइल सिस्टम एस-300 मिसाइल सिस्टम श्रृंखला का अपग्रेड वर्जन है। भारत और रूस 2015 से एस-400 ट्रायम्फ की खरीददारी को लेकर चर्चा कर रहे थे और कई देशों ने एस-400 मिसाइल खरीदने को लेकर रूचि दिखाई थी, जिसे अमेरिकी टीएचएएडी (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) प्रणाली से काफी आगे माना जाता है, हालांकि दोनों अलग-अलग हथियार सिस्टम हैं।

क्या करता है एस-400 मिसाइल सिस्टम
आसान शब्दों में समझें तो एस-400 मिसाइल प्रणाली सिस्टम कई क्षमताओं वाला रडार है, जिसके जरिए मिसाइलों को ट्रैक और हिट किया जा सकता है और ये लक्ष्य को आसानी से हिट कर सकता है। इसके साथ ही एस-400 मिसाइल सिस्टम से युद्धक विमानों को भी आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। इस मिसाइल सिस्टम में लांचर, कमांड और नियंत्रण सिस्टम भी लगे हुए हैं। इस मिसाइल सिस्टम के जरिए तीन प्रकार की मिसाइलों को दागने की क्षमता है। इसके साथ ही एस-400 मिसाइल सिस्टम सभी प्रकार के हवाई लक्ष्यों जैसे कि विमान, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी), जो 400 किलोमीटर के अंदर 30 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर मार करने में सक्षम है।

एस-400 मिसाइल की बेमिसाल क्षमता
रूस निर्मित एस-400 मिसाइल सिस्टम की खासियत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, यह अमेरिका की खतरनाक एफ-35 सुपर लड़ाकू विमानों के साथ साथ 100 अलग अलग हवाई लक्ष्यों को भी निशाना बनाकर मार करने में सक्षम है और एक साथ 6 निशानों को व्यस्त कर सकता है। सबसे खास बात ये है कि पिछले रूसी वायु रक्षा प्रणालियों की तुलना में ये दो गुना ज्यादा प्रभावी है और इसे सिर्फ पांच अंदर तैनात किया जा सकता है। इसके साथ ही एस-400 मिसाइल सिस्टम रूस के पुराने एस-300 पीएमयू सिस्टम के अलावा चार और नये प्रकारों के मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करने के लिए सक्षम है। इसके साथ ही ये मिसाइल रक्षा प्रणाली 92एन6ई रडार 600 किमी की दूरी के भीतर विमान, रोटरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल, निर्देशित मिसाइल, ड्रोन और बैलिस्टिक रॉकेट का पता लगा सकता है और ट्रैक कर सकता है।

क्यों हैं एस-400 मिसाइल सिस्टम की जरूरत?
दरअसल, भारत के लिए चीन और पाकिस्तानी मिसाइलों को रोकने के लिए किसी भी हालत में क्षमता विकसित करने की जरूरत थी। भारत से पहले बीजिंग ने 2015 में मास्को के साथ एस-400 प्रणाली की छह बटालियन खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, और डिलीवरी जनवरी 2018 में शुरू हुई। जबकि चीनी अधिग्रहण को इस क्षेत्र में "गेमचेंजर" के रूप में देखा गया है और ये भारत के लिए काफी चिंता की बात है। हालांकि, दो मोर्चों पर युद्ध की स्थिति में एस-400 अहम भूमिका निभा सकता है। लिहाजा भारत को एक ऐसे मिसाइल सिस्टम की जरूरत थी, जो सीमा की रक्षा कर सके और उस लिहाज से एस-400 मिसाइल सिस्टम की अत्यंत जरूरत थी।

एस-500 मिसाइल सिस्टम का ऑफर
रूस ने एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी तो शुरू कर दी है, लेकिन इसके साथ ही एस-500 मिसाइस सिस्टम का भी ऑफर भारत को दिया है। रूस ने दावा किया है कि, एस-500 मिसाइल सिस्टम दुनिया का सबसे ताकतवर मिसाइल सिस्टम है और इसके जरिए हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी मार गिराया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि इस साल दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान एस-500 और एस-550 मिसाइल सिस्टम पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि, "लेकिन सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बातचीत की मेज पर क्या होगा।"












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