What Is ICT Court: क्या है ICT, जिसने हसीना को सुनाई मौत की सजा? 1971 के युद्ध में सुनाया था अहम फैसला?
What Is ICT Court: बांग्लादेश में सोमवार, 17 नवंबर को एक बड़ा राजनीतिक और न्यायिक भूचाल आ गया, जब इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुना दी।
यह फैसला पूरे देश में लाइव प्रसारित किया गया, जिसके बाद राजधानी ढाका समेत कई शहरों में तनाव की स्थिति बन गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उनके खिलाफ 1971 के युद्ध से जुड़े प्रदर्शन और अत्याचारों में पर्याप्त और मजबूत सबूत मौजूद हैं, इसलिए उन्हें यह सजा दी गई है।

इस फैसले ने देश-विदेशों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं-सबसे प्रमुख सवाल यह कि आखिर यह ICT कोर्ट है क्या? और यह सुप्रीम कोर्ट से कैसे अलग है, जो किसी पूर्व प्रधानमंत्री को फांसी की सजा सुनाने में सक्षम है?
क्या है ICT?
बांग्लादेश की न्याय व्यवस्था दो प्रमुख स्तंभों-सुप्रीम कोर्ट और इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT)-पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत है, जहां नागरिक, आपराधिक और संवैधानिक मामलों की अंतिम सुनवाई होती है। इसके फैसले पूरे देश पर बाध्यकारी होते हैं और यह रोजमर्रा के विवादों से लेकर बड़े संवैधानिक मामलों तक सभी प्रकार के मामलों को निपटाती है।
वहीं, ICT एक विशेष उद्देश्य के लिए गठित अदालत है, जिसका दायरा बेहद सीमित लेकिन अत्यंत गंभीर है। यह अदालत केवल युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों की कानूनी जांच और दोषियों को सजा दिलाने के लिए इस अदालत की स्थापना की गई थी।
कैसे काम करता है ICT?
विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट और ICT के बीच यह अंतर बेहद अहम है, क्योंकि दोनों का अधिकार क्षेत्र और कामकाज पूरी तरह अलग है। सुप्रीम कोर्ट जहां सामान्य अपराधों और संवैधानिक विवादों पर निर्णय देता है, वहीं ICT सिर्फ ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत गिने जाने वाले गंभीर अपराधों को देखता है। ICT द्वारा सुनाए गए फैसलों के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में की जा सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी होती है। खासकर किसी बड़े राजनीतिक व्यक्ति को ICT में दोषी साबित करना और सबूतों के आधार पर मौत की सजा तक पहुंचना आसान नहीं माना जाता, क्योंकि यह अदालत केवल बेहद ठोस और निर्णायक प्रमाणों पर ही कठोरतम फैसला देती है।
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT Bangladesh) की स्थापना 1973 में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल एक्ट के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य था- 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराध, नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और सामूहिक अत्याचारों की सुनवाई करना।
ICT आम नागरिक मामलों या राजनीतिक विवादों को नहीं देखता। यह अदालत केवल उन मामलों में दखल देती है, जिनमें नरसंहार, सामूहिक हत्या, मानवता के खिलाफ अपराध, बलात्कार, यातना, युद्ध अपराध जैसे गंभीर आरोप शामिल हों। इस अदालत में विशेष न्यायाधीश होते हैं, जो युद्ध इतिहास, अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ माने जाते हैं।
ICT के बड़े केस जिसने बटोरी सुर्खियां?
ICT बांग्लादेश ने 1971 के युद्ध अपराधों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की है, जिनमें गोलाम अजम, दिलावर हुसैन सईदी, कादिर मुल्ला, कमरुज्जमान, मोजाहिद, सलाउद्दीन क्वादर चौधरी और मीर कासेम अली जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन मामलों में कई आरोपियों को अदालत ने दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई, और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्षों में लगभग 100 लोगों को मृत्युदंड दिया जा चुका है।
हालांकि इस अदालत को लेकर समय-समय पर यह आरोप भी उठते रहे हैं कि इसे राजनीतिक टकरावों में इस्तेमाल किया गया, लेकिन सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि ICT केवल ठोस सबूतों के आधार पर ही अपने फैसले देती है और इसकी प्रक्रिया पूरी तरह न्यायिक मानकों पर आधारित होती है।
1971 के युद्ध में ICT की आवश्यकता क्यों पड़ी?
बांग्लादेश ने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ एक भीषण युद्ध के बाद स्वतंत्रता हासिल की थी। इस युद्ध के दौरान लाखों लोगों की हत्या, बलात्कार और उत्पीड़न की घटनाएँ हुई थीं। इन्हीं ऐतिहासिक अत्याचारों को न्याय दिलाने के लिए ICT की स्थापना की गई, ताकि अपराध में शामिल लोगों की पहचान हो जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके और उन अपराधों का रिकॉर्ड इतिहास में दर्ज किया जा सके। ICT का अधिकार क्षेत्र 25 मार्च 1971 से 16 दिसंबर 1971 तक की घटनाओं तक सीमित है।
शेख हसीना का मामला इतना बड़ा कैसे बन गया?
शेख हसीना पर आरोप है कि उनके शासनकाल में कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बर कार्रवाई की गई, जिसके गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के प्रमाण ICT के अनुसार पर्याप्त मिले। अदालत ने इन्हीं सबूतों को आधार बनाते हुए सजा सुनाई। इस फैसले के बाद देशभर में तनाव है, और सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया गया है। ढाका में इंटरनेट पर निगरानी बढ़ा दी गई है, और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अलर्ट पर पूरी सुरक्षा मशीनरी है।
इस फैसले के बाद बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल आना तय माना जा रहा है। जहां सुप्रीम कोर्ट संविधान और दैनिक मामलों का अंतिम दरवाजा है, वहीं ICT इतिहास के सबसे गंभीर अपराधों के लिए बनी विशेष अदालत है, जो कठोरतम सजा सुनाने का अधिकार रखती है।
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