जानिए क्या है HIMARS जो अमेरिका यूक्रेन को देगा, आखिर क्यों है ये अबतक का सबसे खतरनाक फैसला

नई दिल्ली, 02 जून। यूक्रेन और रूस के बीच पिछले कई महीने से युद्ध चल रहा है। रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश मदद पहुंचा रहे हैं। यूक्रेन को हथियार, आर्थिक मदद भी कई देश मुहैया करा रहे हैं। इस बीच अमेरिका ने यूक्रेन के समर्थन में अबतक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। अमेरिका ने यूक्रे को हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम सप्लाई करने का ऐलान किया है। अमेरिका के राष्ट्पति जो बाइडेन के इस ऐलान के बाद माना जा रहा है कि रूस के खिलाफ यूक्रेन को युद्ध में काफी मदद मिलेगी।

 रूस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है हिमार्स

रूस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है हिमार्स

हिमार्स सिस्टम जरिए यूक्रेन शॉर्ट और लॉन्ग रेज की मिसाइल को दाग सकता है। इसकी मदद से यूक्रेन की सेना रूसी टैंकों को तहस-नहस कर सकती है। रूस के लिहाज से यह खबर अच्छी नहीं है। वहीं विशेषज्ञों की मानें तो रूस पहले ही इस युद्ध को हार चुका है। लेकिन बावजूद इसके युद्ध कैसे चल रहा है इसको लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। भारत के पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने कहा है कि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध हार चुका है और इस पूरे युद्ध में रूस का साथ देकर चीन ने एक बड़ी कूटनीतिक भूल की है। श्याम सरन जानेमाने कूटनीतिक हैं और काफी लंबे समय तक विदेश में देश के लिए अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

 क्यों अमेरिका दे रहा है हिमार्स

क्यों अमेरिका दे रहा है हिमार्स

एडवांस रॉकेट सिस्टम के जरिए यूक्रेन डोनबास को फिर से वापस लाने की कोशिश करेगा, ऐसे में रूस के लिए डोनबास इलाके को खुद के नियंत्रण में रखना आसान नहीं है। रूस आर्टिलरी गन के जरिए रूस यूक्रेन को काफी नुकसान पहुंचा रहा है। इसकी मदद से रूस एक-एक किलोमीटर आगे बढ़ रही है। रूस की इस रणनीति पर पलटवार करने के लिए ही अमेरिका ने यूक्रेन को हिमास सिस्टम देने का फैसला लिया है।

क्या है हिमास

क्या है हिमास

हिमार्स की बात करें तो इसके द्वारा लॉन्च की गई मिसाइल की रेंज तकरीबन 80 किलोमीटर तक है। वहीं रूस जो मिसाइल दाग रहा है उसकी रेंज इतनी नहीं है, लिहाजा यूक्रेन को इस मिसाइल के जरिए रूस का सामना करने में आसानी मिलेगी। रूस को इस मिसाइल को ट्रैक करने में काफी दिक्कत होगी। इतनी लंबी दूरी से आने वाली रॉकेट की लोकेशन को पहचानना रूस के लिए आसान नहीं होगा। बता दें कि कारगिल युद्ध में भारत ने भी इस तरह की मिसाइल का इस्तेमाल किया था जिसका नाम पिनाका था। इस युद्ध में पिनाका का काफी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था। इस मिसाइल के जरिए एकदम सटीक हमला किया जा सकता था।

अमेरिका का फैसला बड़े युद्ध की दावत!

अमेरिका का फैसला बड़े युद्ध की दावत!

लेकिन अमेरिका के द्वारा यूक्रेन के समर्थन में किया गया फैसला लंबे समय के लिए खतरनाक भी साबित हो सकता है। इस मिसाइल के द्वारा यूक्रेन की ओर से हमला किए जाने पर रूस कुछ बड़ा फैसला जरूर ले सकता है, इस संभावना से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है। रूस के पास 300 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल है। वहीं जो बाइडेन पहले ही यह कह चुके हैं कि वह यूक्रेन को 300 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल नहीं देंगे। इस बयान के 24 घंटे के बाद बाइडेन ने कहा था कि हम 300 किलोमीटर रेंज वाले रॉकेट देंगे।

रूस ने शुरू की न्यूक्लियर ड्रिल

रूस ने शुरू की न्यूक्लियर ड्रिल

ऐसे में अगर यूक्रेन लॉन्ग रेंज मिसाइल का इस्तेमाल कर सकता है तो निसंदेह रूस कुछ बड़ा कदम उठाएगा। अमेरिका द्वारा हिमास दिए जाने के ऐलान के बाद रूस ने एक बार फिर से न्यूक्लियर फोर्स ड्रिल को शुरू कर दिया है। यानि कि रूस ने साफ संकेत दे दिया है कि वह इस तरह के हमलों का जवाब देने से कतई नहीं चूकेगा। यह समझने वाली बात यह है कि रूस एक के बाद एक जिस तरह से दबाव को झेल रहा है उसके बाद रूस अपना संयम खो सकता है। रूस में लोग जिस तरह से सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं उससे साफ है कि वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी को खत्म करना चाहते हैं, ऐसे में संभव है कि रूस आने वाले समय में कुछ बड़ा कदम जरूर उठा सकता है।

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