Israel-Hamas: गाजा पट्टी के लोग हमास को लेकर क्या सोचते हैं.. हथियारों से किया कंट्रोल या मिले हुए हैं दिल?
What Gaza think about Hamas: हमास ने 7 अक्टूबर की सुबह 5 हजार से ज्यादा रॉकेट 20 मिनट के भीतर दागकर इजराइल के खिलाफ जंग का ऐलान किया था और हमास के तीर तरफा हमले में इजराइल के कम से कम एक हजार से ज्यादा लोग मारे गये। जिसके बाद इजराइल ने हमास के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए गाजा पट्टी पर हमास के ठिकानों पर भारी बमबारी शुरू कर दी।
इजराइस के हमलों ने गाजा पट्टी पर कहर बरपा दिया है और फिलिस्तीन का दावा है, कि 3 हजार से ज्यादा लोग मारे गये हैं। यानि, एक सामान्य धारणा ये है, कि हमास के हमलों का खामियाजा गाजा के आम लोगों को उठाना पड़ रहा है, लिहाजा सवाल ये उठते हैं, कि आखिर हमास को लेकर गाजा के आम लोग क्या सोचते हैं? क्या गाजा के आम लोग हमास का समर्थन करते हैं या फिर हमास के हमलों को लेकर उनकी राय कुछ और है, आइये जानने की कोशिश करते हैं।

यहां आपके लिए ये जानना जरूरी है, कि 90 के दशक में फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (PLO), जिसने इजराइल के अस्तित्व को स्वीकार किया था और जो 2 नेशन थ्योरी के तहत शांति समझौते की तरफ बढ़ रही थी, वो गाजा पट्टी में हुए चुनाव में हार गई थी और गाजा के लोगों ने हमास के नेतृत्व को चुनाव में चुना था और उसके बाद हमास ने गाजा पट्टी पर पूरा कंट्रोल कर लिया।
The Conversation की एक रिपोर्ट में, मियामी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर नाथम फ्रेंच ने कहा है, कि "जिहादी-सलाफीवाद और इस्लामवाद पर अपने शोध में, मैंने पाया कि उग्रवादी आंदोलनों ने उत्पन्न अराजकता का फायदा उठाने के लिए सैन्य हस्तक्षेप को उकसाया है। इसके अलावा, ऐसे समूह अक्सर उन लोगों के "वैध" हितों में शासन करने का दावा करते हैं, जिन पर उनका प्रभुत्व है, भले ही वे आबादी उनके शासन को अस्वीकार कर दे।"

नेताओं का क्या कहना है?
संघर्ष को दोनों पक्षों ने अपने अपने हिसाब से सही ठहराने की कोशिश की है और युद्ध को 'वक्त की जरूरत' बताते हुए लोगों पर अपनी मनमर्जी थोपने की कोशिश की है। हमास के नेता लोगों के मन में इजराइल से नफरत करने की भावना तैयार करते हैं और उनका तगड़ा समर्थन हासिल करते हैं, इसीलिए गाजा पट्टी में पीएलओ को लेकर काफी कम समर्थन बचा है।
उदाहरण के लिए, हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रमुख इस्माइल हानियेह ने दावा किया, कि हमास के काम गाजा के लोगों और "संपूर्ण अरब मुस्लिम समुदाय" का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इस्माइल हानियेह लोगों से कहते हैं, कि वो फिलिस्तीन की तरफ से लड़ रहे हैं और अल-अक्सा मस्जिद को बचाने के लिए जंग लड़ रहे हैं। इसके लिए वो इस्लाम की मान्यताओं का इस्तेमाल करते हैं। इजराइली हमलों के पीड़ितों को सामने लाते हैं और इजराइल पर नये सिरे से हमले करते हैं और जवाबी कार्रवाई के बाद नये पीड़ित बनते हैं, जिनके जख्म उनके लिए जनमत संग्रह का काम करते हैं।
इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग कहते हैं, कि हमास के हमले के लिए गाजा के सभी नागरिक जिम्मेदारी निभाते हैं। और उन्होंने निष्कर्ष निकाला, कि "गाजा के लोगों से इजराइल अपनी रक्षा करेगा।"
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का ये मानना नहीं है। बाइडेन का कहना है, कि "फिलिस्तीनियों के भारी बहुमत का हमास के भयावह हमलों से कोई लेना-देना नहीं था, और वो हमास के हमलों के परिणाम में पीड़ित बन रहे हैं।"

गाजा के लोग क्या सोचते हैं?
गाजा के लोगों में स्वभाविक तौर पर इजराइली नाकेबंदी को लेकर गुस्सा और निराशा रहती है।
राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर और फिलिस्तीनी सेंटर फॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च के निदेशक खलील शिकाकी द्वारा जून 2023 में किए गए एक सर्वेक्षण से संकेत मिलता है, कि 79 प्रतिशत गाजा के रहने वाले लोगों ने इजराइल के खिलाफ सशस्त्र विरोध का समर्थन किया।
वहीं, जुलाई 2023 के वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के सर्वेक्षण में पाया गया, कि गाजा में रहने वाले 57 प्रतिशत लोग हमास को लेकर सकारात्मक रवैया रखते हैं।
इन सर्वेक्षणों में एक और बात ये पता चली, कि साल 2018 में गाजा पट्टी में रहने वाली 25 प्रतिशत महिलाओं के प्रसव के दौरान शिशुओं की मौत हो गई, जबकि 53 प्रतिशत गाजावासी गरीबी रेखा के नीे रहते हैं और उनके पास मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। वहीं, 50 प्रतिशत नागरिक ऐसे हैं, जो गाजा पट्टी छोड़कर निकलना चाहते हैं।
हालांकि, वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के सर्वे में 64 प्रतिशत गाजा वासियों ने ये भी कहा, कि हमास को प्रतिरोध के बजाए रोजगार, शिक्षा और गादा पट्टी की सामान्य भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
वहीं, 92 प्रतिशत लोगों ने अपनी वर्तमान स्थिति को लेकर भारी गुस्से का इजहार किया।

इसके अलावा, सर्वे में सबसे ज्यादा दिलचस्प बात ये निकलकर सामने आई, कि 73 प्रतिशत गाजावासी मानते हैं, कि हमास का प्रशासन काफी ज्यादा भ्रष्ट है, फिर भी गाजा का एक विशाल बहुमत हमास को ही चुनना चाहता है। गाजा के लोग हमास की जगह कोई और बदलाव नहीं चाहते हैं।
गाजा में साल 2006 के बाद कोई चुनाव नहीं हुए हैं, लिहाजा एक बड़ी आबादी ने पहली बार भी वोट नहीं डाला है। यानि, हमास के हमलों के बाद गाजा पट्टी के लोग इजराइल की जवाबी कार्रवाई से डरते जरूर हैं, लेकिन बावजूद इसके वो हमास का समर्थन करते हैं।












Click it and Unblock the Notifications