विवेक रामास्वामी बनाम डोनाल्ड ट्रंप... अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की रेस में कौन मार रहा है बाजी?
Donald Trump Vs Vivek Ramaswamy: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा स्थिति ये है, कि डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से जो बाइडेन का फिर से राष्ट्रपत चुनाव में खड़ा होना तय है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी में करीब दर्जन भर उम्मीदवार दावेदारी पेश कर रहे हैं।
लेकिन, इन उम्मीदवारों में तीन नाम, जो सबसे आगे हैं, वो हैं डोनाल्ड ट्रंप, विवेक रामास्वानी और रॉन डिसेंटिंस। डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके हैं, रॉन डिसेंटिस दूसरी बार फ्लोरिडा के गवर्नर बने हैं, जो पहले ट्रंप के समर्थक थे और अब ट्रंप के कट्टर विरोधी हैं, वहीं विवेक रामास्वामी, जो अरबपति कारोबारी हैं और खुद को ट्रंप का कट्टर समर्थक मानते हैं।

लेकिन, ताजा स्थिति ये है, कि रॉन डिसेंटिस तीसरे नंबर पर जा चुके हैं और रिपब्लिकन पार्टी के अंदर टिकट पाने की मुख्य लड़ाई डोनाल्ड ट्रंप और विवेक रामास्वामी के बीच शुरू हो गई है।
लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि डोनाल्ड ट्रंप और विवेक रामास्वामी में किसकी स्थिति ज्यादा मजबूत है।
डोनाल्ड ट्रंप बनाम विवेक रामास्वामी
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का चुनावी अभियान कहता है, कि पिछले हफ्ते जॉर्जिया में चुनाव परिणाम पलटने की कोशिश के आरोप में करीब 20 मिनट तक जेल में बिताने वाले डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में जोरदार इजाफा हुआ है और जेल जाने के बाद उनके कैम्पेन को करीब 70 लाख डॉलर (करीब साढ़े 58 करोड़) का फंड मिला है।
डोनाल्ड ट्रंप के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने एक्स पर कहा, कि गुरुवार को अपना जेल जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के डोनेशन में भारी इजाफा हुआ है।
चेउंग ने कहा, कि अकेले शुक्रवार को, ट्रम्प 4.18 मिलियन डॉलर लाए, जिससे यह उनके अभियान का अब तक का सबसे अधिक कमाई वाला दिन बन गया।
यानि, जिस तरह से ट्रंप को डोनेशन मिल रहे हैं, वो बता रहा है, कि भले ही ट्रंप कानूनी परेशानियों में घिरे हों, उनकी लोकप्रियता में लगातार इजाफा ही हो रहा है।
और पार्टी के अंदर डोनाल्ड ट्रंप नंबर-दो पर आ गये विवेक रामास्वामी को कम से कम 30 प्वाइंट से हरा रहे हैं, लिहाजा इस बात की संभावना ना के बराबर है, कि डोनाल्ड ट्रंप के मैदान में रहते, विवेक रामास्वामी उन्हें हरा सकें।

विवेक रामास्वामी की क्या है स्थिति
पिछले हफ्ते ही रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के दावेदारों के बीच पहले राउंड की बहस हुई है, जिसमें विवेक रामास्वामी बाजी मार गये और बहस के बाद एक घंटे में ही उन्हें करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला।
बहस के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने खुद विवेक रामास्वामी की प्रशंसा की और उन्हें बहस का विजेता घोषित कर दिया। जिससे पता चलता है, कि प्रतिद्वंदी होने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप विवेक रामास्वामी को पंसद कर रहे हैं, खासकर रॉन डिसेंटिस के साथ जिस तरह से उनका छत्तीस का मुकाबला है, वो विवेक रामास्वामी के लिए वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि 56 प्रतिशत ट्रंप समर्थकों का कहना है, कि अगर ट्रंप को टिकट नहीं मिलता है, तो वो विवेक रामास्वामी को वोट करेंगे और अमेरिका में ट्रंप समर्थकों की कमी नहीं है।
वहीं, विवेक रामास्वामी ने बहस के दौरान भी और truth सोशल मीडिया पर कहा, कि उनका मानना है, कि 'डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के 21वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रपति हैं।'
जबकि, टकर कार्लसन को दिए गये इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को राजनीति में आया नया और अच्छा उम्मीदवार बताया।
बहस के दौरान विवेक रामास्वामी ने मंच से कहा, कि अगर वो राष्ट्रपति बनते हैं, तो वो डोनाल्ड ट्रंप को सभी मामलों से माफी दे देंगे, क्योंकि उनके खिलाफ लगाए गये सभी आरोप फर्जी हैं।
यानि, प्रतिद्वंदी होने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप और विवेक रामास्वामी एक दूसरे की लगातार तारीफें कर रहे हैं। तो फिर सवाल ये उठता है, कि 'ये रिश्ता क्या कहलाता है?'
उपराष्ट्रपति बनने को राजी हैं विवेक रामास्वामी?
विवेक रामास्वामी ने हालिया इंटरव्यू के दौरान संकेत दिया है, कि टिकट ना मिलने की स्थिति में वो डोनाल्ड ट्रंप के जूनियर बनकर, यानि उप-राष्ट्रपति बनकर कामकाज करने के लिए तैयार हैं।
38 साल के राजनीतिक ग्रीनहॉर्न विवेक रामास्वामी ने दो दिन पहले कहा है, कि 'बहस के बाद अब रिपब्लिकन पार्टी में सिर्फ दो उम्मीदवार बचे हैं।'
जब विवेक से पूछा गया, कि क्या वो डोनाल्ड ट्रंप के उप-राष्ट्रपति बनना पसंद करेंगे, तो उन्होंने कहा, कि "देखिए, यह मेरे बारे में नहीं है। अगर यह मेरे बारे में होता है, तो निश्चित रूप से, मेरी उम्र के लोगों के लिए यह एक अच्छी स्थिति है।"
यानि, इस बात की संभावना बन सकती है, कि विवेक रामास्वामी, डोनाल्ड ट्रंप के उप-राष्ट्रपति बन सकते है, वो इस संभावना को खारिज नहीं करते हैं।
यदि रामास्वामी को उपराष्ट्रपति के रूप में चुना जाता है, और उनका चुनाव बाद में किया जाता है, तो वह जॉन ब्रेकिनरिज के बाद इस भूमिका में सेवा करने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के व्यक्ति होंगे, जिन्होंने केवल 36 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति जेम्स बुकानन के दूसरे कमांड के रूप में कार्य किया था। ब्रेकिनरिज ने 1857 से 1861 तक सेवा की थी।
हालांकि, फॉक्स न्यूज से बात करते हुए, रामास्वामी ने पहले स्पष्ट रूप से कहा था, कि वह उप- राष्ट्रपति का पद स्वीकार करने से इंकार कर देंगे, क्योंकि वह एक "अमेरिकी क्रांति" लाना चाहते हैं, जो केवल तभी हो सकती है जब वह अगले राष्ट्रपति हों।

विवेक रामास्वामी ने कहा था, कि उन्हें राष्ट्रपति के अलावा किसी अन्य पद में "रुचि नहीं" है। उन्होंने फॉक्स न्यूज को बताया, कि "मुझे सरकार में किसी अलग पद में कोई दिलचस्पी नहीं है। सच कहूं तो, मैं संघीय सरकार में नंबर दो या तीन बनने की जगह, निजी क्षेत्र के माध्यम से बदलाव लाऊंगा।"
यानि, चुनाव धीरे धीरे अपने अपने पीक तरफ बढ़ता जा रहा है और अगले साल मार्च में ही पता चल पाएगा, कि रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप और विवेक रामास्वामी में से किसे राष्ट्रपति चुनाव के लिए टिकट मिलता है।












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