कोरोना से भी खतरनाक होगा चिकन से फैलने वाला ये वायरस, आधी दुनिया खत्म हो सकती है

नई दिल्ली- अमेरिका के एक मशहूर वैज्ञानिक ने चेतावनी दी है कि चिकन फार्म से पैदा होने वाला जानलेवा वायरस कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक होगा, जो दुनिया की आधी आबादी को खत्म कर सकता है। अमेरिका के मशहूर न्यूट्रिशनिस्ट माइकल ग्रेगर ने इस तरह के वायरस का जिक्र अपनी आने वाली नई किताब में किया है। बता दें कि हाल में चीन के वुहान स्थित विवादित वायरोलॉजी लैब की डिप्टी डायरेक्टर शी झेंगली जिन्हें लोग बैट वुमेन के नाम से भी जानते हैं, ने भी दावा किया था कि नोवल कोरोना वायरस तो कुछ भी नहीं है, जीवों में इतने खतरनाक वायरस मौजूद हैं, जो बहुत ही खतरनाक साबित हो सकते हैं।

चिकन वाले वायरस से दुनिया की आधी आबादी को खतरा

चिकन वाले वायरस से दुनिया की आधी आबादी को खतरा

एक जाने-माने अमेरिकी वैज्ञानिक ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर चिकन फार्मिंग की वजह से आने वाले वक्त में सारी मानवती खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा है कि चिकन फार्म से एक ऐसे खतरनाक वायरस के निकलने का खतरा है, जो दुनिया की आधी आबादी को साफ कर सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टर माइकल ग्रेगर का कहना है कि पोल्ट्री में पल रही ये बीमारी पूरी मानवता के लिए कोरोना वायरस से भी कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। बता दें कि चमगादड़ों से इंसानों में आया नोवल कोरोना वायरस अबतक दुनिया में करीब 3 लाख 65 लोगों की जान ले चुका है और लगभग 60 लोगों को संक्रमित कर चुका है, लेकिन फिर भी इसके प्रकोप के ठहरने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

नई किताब में माइकल ग्रेगर ने की भविष्यवाणी

नई किताब में माइकल ग्रेगर ने की भविष्यवाणी

पेशे से न्यूट्रिशनिस्ट माइकल ग्रेगर ने अपनी नई किताब 'How To Survive A Pandemic'में कहा है कि हम जानते हैं कि गहन मुर्गी पालन दुनिया के लिए और भी बड़ा खतरा हो सकता है। शाकाहारी खाना खाने को लेकर मुहिम चलाने वाले इस वैज्ञानिक ने कहा है कि हम जो मांस पर निर्भर हो चुके हैं, उससे नई महामारियों की आशंका बहुत ही ज्यादा बढ़ गई है। माइकल का मानना है कि इंसानों का जीवों के प्रति यह निर्भरता ही उनके अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में चीन के वुहान लैब की 'बैट वुमेन' शी झेंगली ने भी दावा किया था कि नोवल कोरोना वायरस तो कुछ भी नहीं है, उससे भी बहुत ज्यादा खतरनाक वायरस जंगली जानवरों में मौजूद हो सकते हैं, जिसपर अंतरराष्ट्रीय जगत को साथ मिलकर रिसर्च करना चाहिए।

प्रश्न सिर्फ ये है कि ऐसा कब होगा- वैज्ञानिक

प्रश्न सिर्फ ये है कि ऐसा कब होगा- वैज्ञानिक

माइकल ग्रेगर की इस भविष्यवाणी वाली रिपोर्ट डेली मेल ने छापी है। गौरतलब है कि चीन के वुहान स्थित वैट मार्केट से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की खबरों के बाद से दुनियाभर में ऐसे जंगली जीवों वाले बाजारों को बंद करने की मांग हो रही है। माइकल ने अपनी किताब में लिखा है कि 'अब प्रश्न ये नहीं है कि अगर ऐसा हुआ, प्रश्न सिर्फ ये है कि ऐसा कब होगा।'

मुर्गी पालन में गंदगी है सबसे बड़ा खतरा

मुर्गी पालन में गंदगी है सबसे बड़ा खतरा

हालांकि, अपनी किताब में उन्होंने मुर्गी पालन के तरीकों में सुधार करके किसी भी जानलेवा बीमारी के प्रकोप के जोखिम को कम करने का सुझाव भी दिया है। उनके मुताबिक बहुत कम जगह में ज्यादा मुर्गियों के रखे जाने से वो अपनी पंख भी पूरा नहीं फैला पातीं। यही नहीं अपनी खुद की गंदगियों में रहने की वजह से ही वहां पर आमोनिया का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जो गंभीर बीमारी के संक्रमण के लिए बिल्कुल अनुकूल माहौल पैदा कर देता है।

'पोल्ट्री के रहने तक वैश्विक महामारी'

'पोल्ट्री के रहने तक वैश्विक महामारी'

माइकल का कहना है कि जितनी ज्यादा संख्या में जानवर इकट्ठे रहेंगे, वायरस उनके बीच में घूमता रहेगा, और चिकन के मामले में यह उनके फेफड़ों में छिपा रह सकता है, जो कभी भी महामारी के रूप में विस्फोट हो सकता है। उनका कहना है कि पोल्ट्री को छोटे-छोटे हिस्सों बांट दिया जाय तो वह एक साथ ज्यादा नहीं रहेंगे और उन्हें ज्यादा स्वच्छ वातावरण मिलेगा, जिससे वायरस के फैलने के खतरे को कम किया जा सकता है। वैसे उनका कहना है कि अगर ऐसा हो भी जाय तो भी डिजास्टर को रोकने के लिए ये काफी नहीं है, क्योंकि इंसान और चिकन के बीच का वायरल लिंक जब तक बरकरार रहेगा, एक बहुत बड़ी महामारी की तलवार लटकी रहेगी। उन्होंने कहा है कि 'जब तक पोल्ट्री रहेगी, तब तक वैश्विव महामारी रहेगी।'

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