ताइवान पर हमला करने वाला है चीन? अमेरिका ने हथियारों के साथ वारशिप को भेजा, क्या होने वाली है जंग?

चीन के पास हर तरह के सैनिकों को मिलाने के बाद करीब 20 लाख 35 हजार एक्टिव सैनिक हो जाते हैं। जबकि, ताइवान के पास सिर्फ 1.63 लाख ही सक्रिय सैनिक हैं। यानि, ताइवान के मुकाबले चीन के पास करीब 12 गुना ज्यादा सैनिक हैं।

US warship sails in Taiwan Strait

US Sends warship in Taiwan Strait: ताइवान को लेकर तनाव काफी बढ़ गया है और चीन के भीषण युद्धाभ्यास के बीच अमेरिका ने अपने वॉरशिप्स को ताइवान स्ट्रेट में भेज दिया है।

माना जा रहा है, कि अमेरिकी वॉरशिप्स के ताइवान स्ट्रेट में आने के बाद चीन की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया दी जाएगी, क्योंकि चीन पहले ही चेतावनी दे चुका है, कि अगर ताइवान के क्षेत्र में अमेरिका आता है, तो फिर चीन की तरफ से मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं, कि क्या अब चीन, अमेरिकी वारशिप पर हमला करेगा?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने ताइवान जलडमरूमध्य के माध्यम से एक युद्धपोत रवाना किया है और ये युद्धपोत उस वक्त ताइवान स्ट्रेट में पहुंचा है, जब चीन ने स्व-शासित ताइवान को घेरकर रखा हुआ है।

यूएस सेवेंथ फ्लीट ने कहा है, कि रविवार को यूएसएस मिलियस का ताइवान स्ट्रेट में पहुंचना रूटीन का हिस्सा है। बयान में कहा गया है, कि ये युद्धपोत "जलडमरूमध्य में एक गलियारे से होकर गुजरा है, जो किसी भी तटीय राज्य के क्षेत्रीय समुद्र से परे है।"

चीन की क्या प्रतिक्रिया होगी?

चीन ने इस महीने की शुरुआत से ही बौखलाया हुआ है, जब ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने अमेरिका का दौरा किया था और इस दौरान उन्होंने अमेरिकी संसद के स्पीकर केविन मैककार्थी से मुलाकात की थी।

इसके बाद से ही आगबबूला हुआ चीन, लगातार ताइवान स्ट्रेट में खतरनाक युद्धाभ्यास कर रहा है। एक वक्त तो चीन ने ताइवान द्वीप को चारों तरफ से घेर लिया था।

वहीं, चीन ने बुधवार को कहा है, कि ताइवान को घेरने का अनुकरण करने वाले हवाई और समुद्री अभ्यास का उद्देश्य स्वशासी द्वीप पर स्वतंत्रता-समर्थक राजनेताओं और उनके विदेशी समर्थकों को "गंभीर चेतावनी" देना था।

चीन ने रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी सहित अमेरिका में त्साई की यात्रा से जुड़े संगठनों को भी बैन कर दिया है, जहां मैक्कार्थी और कांग्रेस के अन्य सदस्यों के साथ उनकी बैठक हुई थी।

वहीं, रविवार को, चीन ने एक उपग्रह ले जाने वाला एक रॉकेट लॉन्च किया, जिसका मलबा ताइवान की राजधानी ताइपे के उत्तर में पानी में गिरा है। जबकि इस सैटेलाइट प्रक्षेपण का कोई स्पष्ट सैन्य उद्देश्य नहीं था। इस सैटेलाइट की वजह से ताइवान में कई फ्लाइट्स की उड़ानें बाधित हुई हैं।

ताइवान और चीन में विवाद क्या है?

करीब सात दशक पहले, जब चीन में गृहयुद्ध चल रहा था, उस वक्त कम्युनिस्ट पार्टी ने लोकतांत्रिक पार्टियों को हरा दिया था और पराजित लोकतांत्रिक नेता भागकर ताइवान द्वीप भाग गये थे।

1990 के दशक में ताइवान सत्तावादी शासन से एक लोकतंत्र में परिवर्तित हो गया और अब उसे अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संगठन फ्रीडम हाउस द्वारा एशिया में सबसे मुक्त न्यायालयों में से एक का दर्जा दिया गया है।

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    हालांकि, चीन की सत्तावादी कम्युनिस्ट पार्टी लगातार ताइवान पर अपना दावा करती है और चीन का कहना है, कि ताइवान चीन का ही हिस्सा है और ताइवान को चीन में मिलाने के लिए अगर उसे ताकत का इस्तेमाल करना पड़ता है, तो वो इससे पीछे नहीं हटेगा।

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