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सऊदी अरब के खिलाफ आगबबूला हुआ अमेरिका, दी बुरा अंजाम भुगतने की धमकी, प्रिंस सलमान भी अड़े

सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज की सऊदी अरब के खिलाफ ये सख्त टिप्पणी इस बात का संकेत माना जा रहा है, कि शायद अब अमेरिका ने सऊदी अरब को सबक सिखाने के लिए अपनी नीति में परिवर्तन करने का फैसला लिया है।

Saudi arabia-America oil conflict: पिछले एक साल से अमेरिका और सऊदी अरब में बहुत कुछ गड़बड़ हो गया है और अमेरिकी अनुरोधों के बाद भी सऊदी अरब ने तेल उत्पादन में कटौती को इजाजत दे दी है, जिसके बाद सऊदी अरब से अमेरिका बुरी तरह से झल्लाया हुआ है। वहीं, अब अमेरिकी सांसदों ने सऊदी अरब को अंजाम भुगतने की धमकी दी है। राष्ट्रपति बाइडेन की पार्टी के कई सीनेटर्स ने सऊदी अरब को हथियारों की सप्लाई रोकने की मांग की है।

सऊदी अरब पर भड़का अमेरिका

सऊदी अरब पर भड़का अमेरिका

अमेरिका ने सऊदी अरब से बार-बार अनुरोध किया, कि सऊदी अरब के वास्तविक नेतृत्व वाले पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) सामूहिक तौर पर कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती नहीं करे, लेकिन सऊदी अरब ने अमेरिका की बातों को अनसुना कर दिया। तेल उत्पादन में सऊदी अरब कटौती ना करे, इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने खुद सऊदी का दौरा किया था, बावजूद इसके सऊदी अरब ने अमेरिका की बात नहीं मानी। लिहाजा अब व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट कर दिया है, कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती और तेल की कीमतों में वृद्धि से तीन परिणाम सामने आएंगे, जिन्हें वह अभी दुनिया के लिए असाधारण रूप से खतरनाक मानता है। अमेरिका ने कहा है कि, सऊदी अरब की जिद की वजह से ना सिर्फ दुनियाभर में महंगाई काफी ज्यादा बढ़ेगी, बल्कि रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए और धन मिलेंगे और दुनिया परमाणु युद्ध के और करीब आ जाएगी।

परिणाम भुगतने की धमकी

परिणाम भुगतने की धमकी

वहीं, अमेरिकी अनुरोधों को बार बार ठुकराने की वजह से सऊदी अरब के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस का विरोध सोमवार को तेजी से बढ़ गया है, और अमेरिका के एक शक्तिशाली डेमोक्रेटिक सीनेटर ने अमेरिका के हितों पर रूस का समर्थन करने के लिए सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री और सुरक्षा सहयोग को रोकने की धमकी दी है। आपको बता दें कि, सऊदी अरब के नेतृत्व में काम करने वाले ओपेक प्लस ने फैसला लिया है, कि वो हर दिन 2 मिलियन बैरल का उत्पादन कम करेगा, जिसके बाद अमेरिका में सऊदी अरब का विरोध काफी तेजी से बढ़ गया है। खासकर नवंबर महीने में अमेरिका में सीनेटर चुनाव होने वाले हैं, लिहाजा सऊदी अरब का ये फैसला बाइडेन प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और इससे सीनेटर चुनाव में नुकसान होने की संभावन है।

क्या सऊदी के खिलाफ नीति बनाएगा US?

क्या सऊदी के खिलाफ नीति बनाएगा US?

राष्ट्रपति जो बाइडेन की पार्टी के सीनेटर और बाइडेन प्रशासन में विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करने वाले सीनेटर रॉबर्ट मेनेंडेज की सऊदी अरब के खिलाफ ये सख्त टिप्पणी इस बात का संकेत माना जा रहा है, कि शायद अब अमेरिका ने सऊदी अरब को सबक सिखाने के लिए अपनी नीति में परिवर्तन करने का फैसला लिया है। सीनेटर मेनेंडेज ने ओपेक प्लस कार्टेल के जरिए सऊदी अरब पर रूस की मदद करने का आरोप लगाया है और उन्होंने सीधे तौर पर मोहम्मद बिन सलमान को आड़े हाथों लिया है और कहा कि, "इस संघर्ष में दोनों पक्षों की तरफ से खेलने के लिए कोई जगह नहीं है।" उन्होंने कहा कि, "मैं रियाद के साथ किसी भी सहयोग को हरी झंडी नहीं दूंगा, जब तक कि सऊदी किंगडम यूक्रेन में युद्ध के संबंध में अपनी स्थिति का पुनर्मूल्यांकन नहीं करता"। इसके साथ ही उन्होंने कहा, कि 'बस, अब बहुत हो गया।'

अमेरिका में सऊदी के खिलाफ गुस्सा

अमेरिका में सऊदी के खिलाफ गुस्सा

वहीं, एक अन्य डेमोक्रेटिक सीनेटर और कांग्रेस के सदस्य, रिचर्ड ब्लूमेंथल और रो खन्ना ने पोलिटिको को दिए एक इंटरव्यू में भी इसी तरह की भावनाओं का इजहार किया है और उन्होंने सऊदी अरब पर अमेरिकी प्रयासों को कम करने और यूक्रेन पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आक्रमण को बढ़ावा देने में मदद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि, "सऊदी का फैसला अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन अमेरिका के पास भी जवाब देने का एक तरीका है। यह सऊदी के उत्सुक हाथों में अमेरिकी युद्ध टेक्नोलॉजी के बड़े पैमाने पर हस्तांतरण को तुरंत रोक सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि, "सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका को हमारे सबसे बड़े दुश्मन रूस के एक बड़े सहयोगी को रणनीतिक रक्षा प्रणालियों का अनलिमिटेड नियंत्रण प्रदान नहीं करना चाहिए।"

क्या अमेरिका पारित करा पाएगा फैसला?

क्या अमेरिका पारित करा पाएगा फैसला?

हालांकि, अमेरिका में सऊदी अरब के खिलाफ पहले भी इसी तरह के प्रस्ताव पारित करने की कोशिश की गई, लेकिन अतीत में ऐसे प्रस्ताव पारित नहीं हो पाए। वहीं, सीनेटर ब्लूमेंथल और सांसद रो खन्ना ने कहा कि, "रूस के साथ सऊदी की मिलीभगत अमेरिका के लिए तीव्र द्विदलीय झटका" है और इसका अर्थ है, कि "यह समय अलग है"। वहीं, अमेरिका के एक और डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने पिछले हफ्ते "सऊदी अरब के साथ अमेरिकी गठबंधन के थोक पुनर्मूल्यांकन" और न्यू जर्सी डेमोक्रेटिक कांग्रेस के टॉम मालिनोवस्की ने किंगडम और यूनाइटेड से अमेरिकी सैनिकों को वापस लेने के लिए कानून पेश किया। हालांकि, सीनेटर मेनेंडेज ने कहा कि, वो सऊदी अरब के खिलाफ पूर्ण प्रतिबंध लगाने के हिमायती तो नहीं हैं, लेकिन वो सऊदी अरब को पूरी तरह से अमेरिकी हथियारों की बिक्री रोक देने और किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी नहीं देने के पक्ष में हैं।

सऊदी से बाइडेन भी हैं नाराज

सऊदी से बाइडेन भी हैं नाराज

आपको बता दें कि, सऊदी अरब के 'मनमाने' रवैये को लेकर खुद राष्ट्रपति बाइडेन भी नाराज हैं और सीनेटर मेनेंडेज और दूसरे सीनेटर्स और सांसदों के बयानों से पता चलता है कि, कांग्रेस में डेमोक्रेट सऊदी अरब के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए तैयार हैं, क्योंकि व्हाइट हाउस ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह स्वीकार करने को तैयार है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहले यमन में सऊदी आक्रामक अभियानों के लिए सभी अमेरिकी समर्थन में कटौती करने की धमकी दी थी, लेकिन इस साल की शुरुआत में गवर्नमेंट अकाउंटिबिलिटी ऑफिस द्वारा जारी एक रिपोर्ट, जो कांग्रेस के प्रहरी के रूप में कार्य करती है, उसने पाया कि, हथियारों को आक्रामक के रूप में वर्गीकृत करने के लिए बाइडेन प्रशासन का कदम या तो रक्षात्मक साबित होगा, या काफी हद तक अर्थहीन साबित होगा।

इस लड़ाई का किस पर क्या प्रभाव?

इस लड़ाई का किस पर क्या प्रभाव?

अगर अमेरिका सऊदी अरब को हथियारों की सप्लाई रोक देता है, तो फिर हैती विद्रोहियों के हमले से बचना सऊदी अरब के लिए बचना काफी मुश्किल होगा, लेकिन सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। वहीं, खालिद अलजाबरी, जिनके पिता, एक निर्वासित वरिष्ठ सऊदी खुफिया अधिकारी हैं, उन्होंने कहा कि, सऊदी अरब ने तेल को हथियार की तरह इस्तेमाल किया है, जिसका सीधा प्रभाव अमेरिकी पेट्रोल और गैस पंपों पर पड़ेगा और अमेरिकी नागरिक इस प्रभाव को महसूस करना शुरू कर देंगे।

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