हेडली के कुबूलनामे के बाद अमेरिका ने भारत से किया मदद का वादा
वाशिंगटन। लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकी डेविड हेडली के 26/11 के मुंबई हमले किए जाने की बात कबूले जाने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया आ गई है। अमेरिका ने कहा है कि वह मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे में लाने के लिए भारत की मदद करेगा। हालांकि अमेरिका हर बार मदद की बात करता है और कभी भी ठोस नतीजे भारत को हासिल नहीं हो पाते हैं।

अमेरिका करेगा मदद
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने मीडिया को बताया कि हमले के जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे तक लाने में भारत सरकार की मदद करने के लिए अमेरिका अपने देश के कानून के तहत जो कुछ कर सकता है, उसके लिए वह प्रतिबद्ध है।
किर्बी के मुताबिक निश्चित तौर पर यह हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे तक लाना सुनिश्चित करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता का संकेत है।
हेडली के बारे में जानता था अमेरिका, फिर भी रहा चुप
उनका कहना है कि एकबार फिर यह भारत के साथ अमेरिका के करीबी संबंध का भी संकेत है। यह करीबी संबंध कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में तो हैं ही लेकिन अन्य सभी क्षेत्रों में भी है।
हेडली ने बताई पाक की करतूत
किर्बी हेडली की गवाही से जुड़े सवालों के जवाब दे रहे थे। हेडली ने मुंबई की स्पेशल कोर्ट को बताया है कि किस तरह लश्कर-ए-तैयबा ने 26/11 हमलों की साजिश रची थी।
भारत के लिए हेडली का कुबूलनामा सिर्फ औपचारिकता
किस तरह आतंकियों ने दो विफल प्रयासों के बाद इसे अंजाम दिया था। इसके साथ ही हेडली ने आईएसआई के तीन अधिकारियों का नाम लेते हुए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की भूमिका की जानकारी दी।
अमेरिका और भारत का रिश्ता मजबूत
मुंबई हमलों में भूमिका के चलते अमेरिका में 35 साल कारावास की सजा काट रहे हेडली ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद, लश्कर-ए-तैयबा के अन्य कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी और संगठन में अपने आका साजिद मीर की भूमिका पर भी बात की।
किर्बी ने कहा कि यह एक फैसला था और इसका प्रबंध न्याय विभाग ने किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत के साथ विभिन्न स्तरों पर एक मजबूत रिश्ता है और कानून प्रवर्तन उनमें से एक है।












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