What is a Cognitive test: अमेरिका के लोग जो बाइडेन का संज्ञानात्मक टेस्ट क्यों चाहते हैं? ये क्या होता है?
Joe Biden Cognitive test: अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं और हर बार चुनाव से पहले मुद्दों पर बहस होती थी, लेकिन इस बार बहस हो रही है राष्ट्रपति जो बाइडेन की उम्र पर। जो बाइडेन, राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की बात पर अड़े हुए हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने उनका खुलेआम विरोध शुरू कर दिया है।
इस बीच व्हाइट हाउस की रेस में बने रहने के लिए 81 साल के जो बाइडेन की फिटनेस पर उठते सवालों के बीच, राष्ट्रपति से उनकी मानसिक मजबूती के स्तर को निर्धारित करने के लिए 'संज्ञानात्मक टेस्ट' कराने की मांग की गई है।

जो बाइडेन, जिनके बारे में कई लोगों का मानना है, कि जो बाइ़डेन, दुनिया की सबसे कठिन नौकरी (राष्ट्रपति पद), जिसके लिए शारीरिक और मानसिक मजबूती की काफी ज्यादा जरूरत होनी चाहिए, उस पद पर फिर से बैठने के लिए फिट नहीं हैं। लोगों का कहना है, कि बाइडेन की उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है और अब वो इस पद के लिए फिट नहीं हैं।
लेकिन, उन्हें पद से हटाने के लिए लगातार बढ़ते अभियान के बावजूद बाइडेन जिद पर अड़े हुए हैं। वहीं, 27 जून को डोनाल्ड ट्रंप के साथ CNN बहस के दौरान बेहद खराब प्रदर्शन ने डेमोक्रेटिक पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सीएनएन बहस के दौरान बाइडेन को डोनाल्ड ट्रंप के सामने बेसुध देखा गया और बहस के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी लोकप्रियता और बढ़ा ली है। 27 जून की उस बहस में और हाल के भाषणों और इंटरव्यू में बाइडेन बार बार लड़खड़ा रहे हैं, बेसिरपैर की बात कह देते हैं, बात करते करते, क्या बात कर रहे हैं, वो भूल जाते हैं, उनकी आवाज रुक-रुक कर और कर्कश तरीके से आती है, और बात करते वक्त उनके चेहरे पर कोई उत्साह और कोई भाव नहीं होता है।
संज्ञानात्मक टेस्ट क्या है?
संज्ञानात्मक टेस्ट, लोगों की मानसिक अवस्था से जुड़ी समस्याओं की जांच करता है, जिसमें मस्तिष्क के कार्य जैसे सोचना, सीखना, याद रखना, फैसले लेना और भाषा का उपयोग करना शामिल है। अगर किसी इंसान में इन बातों को लेकर समस्या है, तो इसे संज्ञानात्मक समस्या कहा जाता है।
संज्ञानात्मक टेस्ट एक स्ट्रक्चर्ड और आजमाया हुआ मान्यताप्राप्त प्रक्रिया है, जो इंसानों के मस्तिष्क में होने वाले कमियों, इस समस्या के होने वाले वजहों और किसी विषय पर मस्तिष्क के सोचने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास करती है, जिन्हें ये समस्याएं प्रभावित करते हैं। परीक्षण के परिणामों के आधार पर, इस बात का उपचार किया जाता है, कि विषय में संज्ञानात्मक हानि, डिमेंशिया (मनोभ्रंश) या स्यूजो डिमेंशिया (छद्म मनोभ्रंश) है या नहीं?
यह परीक्षण किसके लिए अनुशंसित है?
जिन लोगों को याददाश्त की समस्या है, या हो गई है, या जिन्हें लगता है कि वे याददाश्त खो रहे हैं या भूलने की समस्या के शिकार हो रहे हैं, या जिन्हें ध्यान केंद्रित करने या फैसले लेने में कठिनाई होती है, या जिनका दिमाग उस तरह से काम नहीं कर रहा है, जैसा उन्हें लगता है कि उसे काम करना चाहिए, उन्हें यह परीक्षण करवाना चाहिए।
डिमेंशिया और स्यूडो डिमेंशिया के बीच अंतर करने और संज्ञानात्मक पुनर्वास के लिए हस्तक्षेप का सुझाव देने के लिए डॉक्टर अक्सर यह परीक्षण करवाते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में न्यूरोलॉजी के प्रमुख डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. प्रवीण गुप्ता ने कहा, कि "हमारे लिए संज्ञानात्मक कार्य परीक्षण करना एक बहुत ही नियमित बात है।"
क्या यह परीक्षण खास तौर पर वृद्ध लोगों के लिए है?
संज्ञानात्मक गिरावट में उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है। 60 की उम्र के बाद हर दशक में डिमेंशिया का जोखिम बढ़ सकता है, और 75 वर्ष की आयु के बाद डिमेंशिया की समस्या काफी आम हो जाती है। डॉ. गुप्ता ने कहा, कि राष्ट्रपति बाइडेन की उम्र ऐसी है, जिस पर संज्ञानात्मक हानि का जोखिम विशेष रूप से ज्यादा है।
हालांकि, बाइडेन ने संज्ञानात्मक टेस्ट सहित किसी भी तरह की न्यूरोलॉजिकल जांच से गुजरने और परिणामों को जनता के सामने जारी करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा, कि राष्ट्रपति बनना और फिर से चुनाव लड़ना उनके अपने संज्ञानात्मक परीक्षण हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा, कि कुछ युवा लोग तनाव, ज्यादा काम और मल्टीटास्किंग के कारण भी ऐसे लक्षण दिखाते हैं। उन्होंने कहा, "वे लोग डिमेंशिया की शुरुआती लक्षण दिखने पर और संज्ञानात्मक हानि और छद्म मनोभ्रंश के बीच अंतर करने के लिए भी ये टेस्ट करवाते हैं।"
डिमेंशिया के लिए टेस्ट कैसे किया जाता है?
यह जांच मूलतः एक परीक्षा की तरह किया जाता है, जिसमें एक मनोवैज्ञानिक यादाश्त, कॉन्सेप्ट, भाषा पहचानने की क्षमता, गणना करने की क्षमता और कुछ काम करने की क्षमता जैसे कार्यों की जांच किया जाता है, ताकि मस्तिष्क के उन अलग-अलग हिस्सों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जा सके जो इन मानसिक कार्यों में से प्रत्येक के लिए जिम्मेदार हैं।












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