Explained: एयरक्राफ्ट कैरियर से लेकर फाइटर जेट्स तक, इजराइल की रक्षा के लिए कैसी तैयारी कर रहा अमेरिका?

Israel-Iran war: अमेरिका और इजराइल के अधिकारियों का मानना है, कि अगले एक हफ्ते के अंदर कभी भी ईरान, इजराइल के ऊपर हमला कर सकता है और इस बार का हमला, एक बड़े पैमाने पर होने वाला है। रिपोर्ट ये भी है, कि रूस ने भारी संख्या में एयर डिफेंस सिस्टम ईरान को सप्लाई की है।

बेरूत में हिज्बुल्लाह कमांडर फुआद शुकर की हत्या और तेहरान में हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया की हत्या के बाद मिडिल ईस्ट युद्ध एक दोतरफा युद्ध के मुहाने पर खड़ा है और इसे देखते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका ने पूर्वी भूमध्य सागर में एक नौसैनिक हमला समूह तैनात कर दिया है।

Israel-Iran war

हमास और हिज्बुल्लाह कमांडर की हत्याएं 30 और 31 जुलाई को हुई थी और ईरान ने बदला लेने की कसम खाई है।

अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर और फाइटर जेट्स की तैनाती, रविवार को अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन और इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के बीच ईरान के जवाबी हमले की आशंका को लेकर हुई बातचीत के बाद की है। पेंटागन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि लॉयड ऑस्टिन ने "इजराइल की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने की संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराया और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के मद्देनजर, पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बल की स्थिति और क्षमताओं को मजबूत करने का जिक्र किया।"

इजराइल-ईरान तनाव में दांव पर क्या है?

एक्सपर्ट्स को चिंता इस बात की है, कि ईरान या उसके सहयोगी हिज्बुल्लाह की ओर से दोनों हत्याओं का कोई भी प्रतिशोध, एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को जन्म दे सकता है और संभावित रूप से अमेरिका को अपने सहयोगी इजराइल के समर्थन में युद्ध में शामिल होने पर मजबूर कर सकता है।

अमेरिकी समाचार चैनल सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्राइक फोर्स की तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी प्रशासन के आलोचक इसे युद्ध विराम लागू करने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करने के लिए कह रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी गाजा में इजराइली युद्ध की आलोचना की है। फरवरी में गाजा एन्क्लेव में इजराइल के ऑपरेशन को "अत्यधिक" बताया और बार-बार कहा है, कि "बहुत अधिक" नागरिक मारे गए थे। हालांकि, इसके बाद भी इजराइल लगातार गाजा में हमले कर रहा है और अमेरिका ने भी पिछले हफ्ते इजराइल को 3 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियारों की सप्लाई को मंजूरी दी है।

सऊदी अरब, तुर्की, जॉर्डन और कई पश्चिमी देशों समेत कई देशों ने अपने नागरिकों से लेबनान छोड़ने की अपील की है, क्योंकि उन्हें डर है, कि अगर इजराइल ने सीधे हमला किया, तो देश पर भारी हमला हो सकता है। इसके साथ ही, कई एयरलाइनों ने इजराइल, जॉर्डन और लेबनान के लिए उड़ानें निलंबित कर दी हैं।

नेवल टास्क फोर्स की तैनाती से अमेरिका क्या उम्मीद कर रहा है?

प्रोफेसर और पूर्व अमेरिकी राजदूत गॉर्डन ग्रे के मुताबिक, अमेरिकी "एयरक्राफ्ट कैरियर हमला समूह की तैनाती की घोषणा का मकसद, ईरान को रोकना है।"

पिछले साल अक्टूबर में बाइडेन ने पूर्वी भूमध्य सागर में इसी तरह की तैनाती का आदेश दिया था, जब दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से एक, यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड, इस क्षेत्र में पहुंचा था, और इस बेड़े में यूनाइटेड किंगडम के जहाज और जासूसी विमान भी शामिल हुए थे। उस समय, अमेरिकी अधिकारियों ने इस तैनाती को हिज्बुल्लाह और ईरान को गाजा पर इजराइल के युद्ध का "फायदा उठाने" से रोकने के प्रयास के रूप में देखा था। हालांकि, उस वक्त ये युद्ध अपने शुरुआती दौर में था, लेकिन उसके बाद से इस युद्ध में अब तक 40,000 से ज्यादा फिलीस्तीनी मारे गये हैं।

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के फेलो उमर रहमान ने कहा है, कि उनका मानना ​​है कि "अमेरिका ईरान को स्पष्ट रूप से संकेत दे रहा है, कि (वह) आगे की किसी भी लड़ाई का हिस्सा होगा, ताकि ईरान को इजरायल के खिलाफ महत्वपूर्ण जवाबी कार्रवाई करने से रोका जा सके।"

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अमेरिका ने किन जहाजों की तैनाती की है?

अमेरिका ने इजराइल की रक्षा के मकसद से एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन को तैनात कर रहा है, जिसपर अमेरिका का फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट F-35 तैनात है, जो ईरान में किसी भी जगह पर, बिना रडार की पकड़ में आए हमला कर सकता है।

एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन पहले आराम से इस क्षेत्र की तरफ बढ़ रहा था, जहां इसे यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट एयरक्राफ्ट कैरियर की जगह लेना था, लेकिन अमेरिका के रक्षा मंत्री ने कहा, कि इसे तेजी से आगे बढ़ने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, भूमध्य सागर में पहले से मौजूद गाइडेड मिसाइलों को ले जाने वाली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी यूएसएस जॉर्जिया को भी इस क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है।

क्या ये युद्ध भड़कने की आशंका का संकेत है?

रॉयल यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट (RUSI) के एचए हेलियर का मानना ​​है, कि बल प्रदर्शन का मकसद युद्ध की आशंका को भड़कने से रोकना है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि अमेरिका का 'युद्ध में शामिल होने का संकेत' तेहरान पहुंच चुका है और ईरान, कम के कम इस युद्ध में अमेरिका से उलझने की हिमाकत नहीं करना चाहेगा। इसके अलावा अमेरिका, इजराइल को भी युद्ध भड़काने वाले किसी कदम को उठाने से रोक सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि बेंजामिन नेतन्याहू सारी सीमाओं को लांघ चुके हैं और अगर युद्ध शुरू होता है, तो इस बार इजराइल, ईरान को तबाह करने का मौका नहीं छोड़ेगा, और ये ईरान में बड़ी मानवीय तबाही ला सकता है।

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा संचार सलाहकार जॉन किर्बी ने सोमवार (स्थानीय समय) को मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच कहा है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका को इजरायल पर 'महत्वपूर्ण' हमलों के लिए तैयार रहना होगा, जो संभवतः इस सप्ताह हो सकते हैं।

जॉन किर्बी का ये बयान उस वक्त आया है, जब राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं के साथ बातचीत की है और उन्हें बताया है, कि अमेरिका मध्य पूर्व में तनाव को कम करने का लक्ष्य रखता है। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, जॉन किर्बी ने संवाददाताओं से कहा, कि "हम अपने इजराइली समकक्षों की तरह ही संभावित समय के संबंध में समान चिंताएं और अपेक्षाएं साझा करते हैं। यह इस सप्ताह हो सकता है।"

अमेरिका को किस तरह के हमलों की है आशंका?

जॉन किर्बी ने कहा, कि "हमें उन हमलों के लिए तैयार रहना होगा, जो बड़े पैमाने पर हो सकते हैं।"

किर्बी के मुताबिक, बाइडेन का वैश्विक नेताओं से बातचीत का मकसद "मुख्य रूप से सभी नेताओं से यह दोहराने के लिए था, कि उन्होंने इजरायल की रक्षा की पुष्टि के संदर्भ में पहले क्या कहा है" और साथ ही "एक मजबूत संदेश भेजें, कि हम हिंसा में कोई वृद्धि नहीं देखना चाहते हैं और ईरान या उसके सहयोगियों की तरफ से कोई हमला नहीं देखना चाहते हैं।"

सोमवार को एक संयुक्त बयान में, अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने यूके, फ्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं के साथ ईरान से इजराइल के खिलाफ सैन्य हमले की अपनी चल रही धमकियों को वापस लेने का आह्वान किया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, संयुक्त बयान में कहा गया है, कि "हमने ईरान से इजराइल के खिलाफ सैन्य हमले की अपनी चल रही धमकियों को वापस लेने का आह्वान किया और इस तरह के हमले की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर परिणामों पर चर्चा की।"

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