जो बाइडेन का सबसे बड़ा U-Turn! पाकिस्तान के दोस्त को बेचेंगे F-35 फाइटर जेट, पहले रूस की वजह से दिखाए थे नखरे
F-35 Fighter Jet: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन का एकमात्र कार्यकाल उनकी विदेश नीति को लेकर कनफ्यूजन और अपने ही फैसले को लेकर बार बार लिए गये उनके यूटर्न की वजह से जाना जाएगा। अफगानिस्तान, इजराइल और सऊदी अरब के बाद जो बाइडेन ने एक और यूटर्न लिया है।
जो बाइडेन के प्रशासन ने तुर्की को एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने का फैसला लिया है, जबकि राष्ट्रपति बनने के फौरन बाद उन्होंने कसम खाई थी, कि वो NATO सदस्य तुर्की को किसी भी हाल में ये अत्याधुनिक फाइटर जेट नहीं देंगे।

लेकिन, कई वर्षों की अनिश्चितता और कूटनीतिक बाधाओं के बाद, अब लगने लगा है, कि अमेरिका, तुर्की को एफ-35 लड़ाकू बेचने के लिए तैयार हो गया है। 26 नवंबर को, तुर्की के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री यासर गुलर ने तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली के योजना और बजट आयोग के एक सत्र के दौरान इसका खुलासा किया है। उन्होंने देश को बताया है, कि "अमेरिका तुर्की को F-35 जेट देने के लिए तैयार हो सकता है।",
गुलर ने F-35 लड़ाकू विमान को हासिल करने के लिए तुर्की की कोशिशों को लेकर कहा, कि "हमारे पास पहले से ही छह F-35 हैं।" तुर्की ने ये विमान पहले ही खरीद लिया था, लेकिन 2021 में जो बाइडेन के प्रशासन ने तुर्की को और एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने से मना कर दिया था, क्योंकि तुर्की ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सौदा किया था।
तुर्की के विदेश मंत्री गुलर ने कहा, कि अमेरिका अपने पुराने फैसले पर फिर से विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, कि "अब जब उन्होंने KAAN (तुर्की का पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट) को लेकर हमारी डेवलपमेंट देखी, तो उनका रुख बदलता हुआ दिख रहा है। वे संकेत दे रहे हैं, कि वे उन्हें (एफ-35 लड़ाकू विमान) देने के लिए तैयार हो सकते हैं। हमने आधिकारिक तौर पर F-35 खरीदने के लिए अपना प्रस्ताव फिर से प्रस्तुत किया है।"
F-35 लड़ाकू विमान खरीदने की कोशिश करता रहा है तुर्की
तुर्की लंबे वक्त से F-35 विमान खरीदने की कोशिश करता रहा है और वो 2007 में अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, नीदरलैंड और अन्य NATO सदस्यों के साथ F-35 कार्यक्रम में शामिल हुआ था। उस समय, अंकारा ने 100 लॉकहीड मार्टिन F-35A लाइटनिंग II विमान खरीदने की योजना बनाई थी। हालांकि, 2019 में तुर्की ने रूस के साथ S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए बातचीत शुरू की थी, जिससे उसका अमेरिका से विवाद शुरू हो गया और वो इस कार्यक्रम से बाहर निकल गया।
F-35 फाइटर जेट प्रोजेक्ट से बाहर निकलने के बाद उसने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बनाने के लिए KAAN प्रोजेक्ट शुरू किया, जिसमें उसने कामयाबी हासिल कर ली है।
हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि आशावादी संकेतों के बावजूद, जियो-पॉलिटिकल फैक्टर्स की वजह से तुर्की के F-35 कार्यक्रम में पूरी तरह से वापस आने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है। लेकिन, गुलर ने पुष्टि की है, कि अमेरिका के साथ चर्चा चल रही है।
लिहाजा यह देखना बाकी है, कि तुर्की F-35 कार्यक्रम में सफलतापूर्वक फिर से शामिल हो पाता है या KAAN लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट पर ही निर्भर रहता है।
इस बीच, तुर्की ने संयुक्त राज्य अमेरिका से F-16 लड़ाकू जेट खरीदने की अपनी 23 बिलियन डॉलर की योजना को भी वापस ले लिया है। उसने अमेरिका से अपने एयरफोर्स के लिए 79 फाइटर जेट खरीदने की योजना बनाई थी।
इस साल की शुरुआत में, तुर्की ने लंबी बातचीत प्रक्रिया के बाद 40 F-16 लड़ाकू जेट और 79 आधुनिकीकरण किट खरीदने का सौदा हासिल किया था। और अब गुलर ने खुलासा किया, कि आधुनिकीकरण किट, जो मूल रूप से तुर्की के पुराने F-16 को अपग्रेड करने के लिए थे, वो अब नहीं खरीदे जाएंगे।
उन्होंने बताया कि तुर्की अपने तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (TUSAS) संयंत्रों में आधुनिकीकरण कार्य करने में सक्षम है।

बाइडेन प्रशासन ने तुर्की के ऊपर लगे प्रतिबंध को हटाया
इसके अलावा, गुलर ने तुर्की की एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के संवेदनशील मुद्दे को भी संबोधित किया, जो अंकारा और वाशिंगटन के बीच विवाद का विषय है। मंत्री के अनुसार, अमेरिका ने तुर्की द्वारा एस-400 प्रणाली के उपयोग पर अपनी आपत्तियां हटा ली हैं।
गुलर ने कहा, "हमारी हाल की बैठकों (अमेरिकियों के साथ) के दौरान, हमने एस-400 के संदर्भ में जो कुछ भी वे हमसे चाहते थे, उसे खारिज कर दिया। अब, अमेरिकियों को इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं है।"
अगर गुलर सही बोल रहे हैं, तो यह अमेरिका-तुर्की रक्षा संबंधों में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। अमेरिका ने पहले तुर्की पर एस-400 प्रणाली को छोड़ने का दबाव डाला था, यहां तक कि वैकल्पिक समाधान भी पेश किए थे। कुछ रिपोर्टों ने सुझाव दिया है, कि तुर्की का F-35 कार्यक्रम में वापस आना S-400 को सक्रिय न करने या उन्हें किसी तीसरे पक्ष को ट्रांसफर करने पर निर्भर हो सकता है।
दूसरी ओर, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने तुर्की को लगातार याद दिलाया है कि एस-400 के लिए हथियार कॉन्ट्रैक्ट में किसी और देश को उसे सौंपना शामिल नहीं है।
जबकि, गुलर ने बताया, कि तुर्की ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम इसलिए खरीदा, क्योंकि किसी और देश ने इस तरह के शक्तिशालि एयर डिफेंस सिस्टम को बेचने के लिए उसके अनुरोधों पर कोई ध्यान नहीं दिया था। गुलर ने कहा, कि S-400 सिस्टम तैनाती के लिए तैयार हैं और यदि जरूरी हो, तो सिर्फ 12 घंटे के भीतर इसे एक्टिवेट कर दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने ये भी कहा, कि तुर्की सिर्फ "बहुत उच्च स्तर के खतरे" की स्थिति में ही एस-400 का इस्तेमाल करेगा।












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