TikTok बैन मामले में भारत का फैसला अमेरिकी कोर्ट में बन सकता है नजीर, मोदी सरकार के नक्शे कदम पर बाइडेन!

TikTok Ban in USA: चीन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए अमेरिका भारत का सहारा ले सकता है। अमेरिका के फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (FCC) के कमिश्नर ब्रेंडन कैर ने कहा है, कि टिकटॉक के खिलाफ भारत का निर्णायक कदम, संयुक्त राज्य अमेरिका में कानूनी कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।

फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (FCC) के कमिश्नर ब्रेंडन कैर ने इकोनॉमिक टाइम्स को दिए गये एक इंटरव्यू में कहा है, कि भारत ने टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए जो कानून कदम उठाए हैं, उसका असर अमेरिका की अदालतों पर पड़ सकता है।

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ऐसा माना जा रहा है, कि अमेरिकी सीनेट से भी प्रतिबंध को मंजूरी मिलने के बाद अब जल्द ही टिकटॉक को अमेरिका में बैन किया जा सकता है, जिसके बाद चीनी स्वामित्व वाली कंपनी बाइटडांस, अपने वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी प्रतिबंध को चुनौती देने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है और FCC कोर्ट में भारत के कानूनी कदमों को बतौर दलील पेश कर सकता है।

अमेरिकी अदालत में भारत के फैसले का असर?

एफसीसी चीफ कैर की टिप्पणी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के लोकप्रिय ऐप टिकटॉक पर बैन लगने के हालिया निर्देश के बाद आई है। राष्ट्रपति बाइडेन ने एक विधेयक पर हस्ताक्षर किए है, जिसमें बाइटडांस को टिकटॉक को किसी अमेरिकी कंपनी को बेचने या अगले नौ से बारह महीनों के भीतर प्रतिबंध का सामना करने में से किसी एक विकल्प को चुनने का अवसर दिया है।

अमेरिका ने कहा है, कि या तो बाइटडांस टिकटॉक को किसी अमेरिकी कंपनी को बेच दे, या फिर प्रतिबंध का सामना करने के लिए तैयार हो जाए।

हालांकि, बाइटडांस ने कहा है, कि ऐप को बेचने की उसकी कोई योजना नहीं है। टिकटॉक के सीईओ शौ ज़ी च्यू ने इस बात पर जोर दिया है, कि तथ्य और अमेरिकी संविधान दोनों कंपनी की स्थिति का समर्थन करते हैं।

टिकटॉक अपनी चिंताओं के बारे में मुखर रहा है, उसने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट पर जोर देकर कहा है, कि अमेरिका में संभावित प्रतिबंध 170 मिलियन अमेरिकियों के फ्री स्पीच के अधिकारों का उल्लंघन करेगा।

कंपनी के अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के तहत कोर्ट में अपनी बात रखने की संभावना है, जो फ्री स्पीच, प्रेस, सभा की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है। हालांकि, कैर का मानना है कि यह तर्क अमेरिकी अदालतों को बाइटडांस के पक्ष में करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता है।

कैर का सुझाव है, कि टिकटॉक के खिलाफ भारत की कार्रवाई अमेरिका में कानूनी लड़ाई को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने अनुमान लगाया, कि टिकटॉक यह तर्क दे सकता है, कि अमेरिकी प्रतिबंध चीन के प्रति निराधार जुनून से उपजा है, जो कि अस्तित्वहीन खतरों का हवाला देता है।

हालांकि, कैर बताते हैं कि चीन के पड़ोसी देश भारत ने भी टिकटॉक के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की है, जो अमेरिका-चीन संबंधों से परे एक व्यापक चिंता का संकेत देता है।

कैर का मानना है, कि भारत का रुख अमेरिकी अदालती दाखिलों में प्रासंगिक हो सकता है, जो दर्शाता है, कि टिकटॉक के बारे में आशंकाएं अमेरिकी सीमाओं से परे तक फैली हुई हैं। उनका सुझाव है, कि भारत की त्वरित और पूर्वव्यापी कार्रवाई अमेरिका में टिकटॉक के प्रतिबंध के आसपास की कहानी को आकार दे सकती है, जो इस मुद्दे पर वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर जोर देती है।

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