भारतवंशी सांसदों के जरिए दवाब बना रहा अमेरिका? यूक्रेन युद्ध में रूस की निंदा करने की मांग तेज
इससे पहले भारतीय मूल के एक और अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने भी यूनाइटेड नेशंस में वोटिंग से भारत के गैर-हाजिर रहने को लेकर भारत के रवैये से निराशा जताई थी।
वॉशिंगटन, मार्च 19: यूक्रेन युद्ध में भारत ने न्यूट्रल रूख अपना रखा है, लेकिन भारत की ये पॉलिसी पश्चिमी देशों को पच नहीं पा रही है, लिहाजा अमेरिका और पश्चिमी देश अलग अलग तरह से भारत के खिलाफ प्रेशर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की तरफ से पहले भारत को 'केबल' भेजा गया और अब भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने रूस के खिलाफ भारत से कदम उठाने की मांग की है।

भारतीय मूल के सांसदों की अपील
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने भारत सरकार से यूक्रेन युद्ध में रूस के खिलाफ आवाज उठाने की मांग की है। अमेरिका के सांसद जो विल्सन और भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना के नेतृत्व में सांसदों ने अमेरिका में भारत के शीर्ष दूत तरनजीत सिंह संधू के साथ टेलीफोन पर बात की है और उनसे यूक्रेन संकट पर बात की है। इस बातचीत के बाद भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने ट्वीट करते हुए कहा कि, "राजदूत संधू के साथ द्विदलीय कॉल में विल्सन के साथ शामिल होने के अवसर की सराहना करता हूं। हमने भारत से आग्रह किया है कि, युद्ध में निशाना बनाकर यूक्रेनियनों को मारने के खिलाफ वो रूस क खिलाफ बोले।' वहीं रो खन्ना ने आगे लिखा है कि, ''हमने भारत से अपील की है, कि रूस के साथ दोस्ती का इस्तेमाल करते हुए युद्ध में शांति स्थापित करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे''।
रूस की निंदा करने की मांग
वहीं, अमेरिका के एक और सांसद विल्सन ने ट्वीट करते हुए भारत सरकार से यूक्रेन पर हमला करने के लिए रूस की निंदा करने की मांग की। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 'अमेरिका में भारत के राजदूत के साथ द्विदलीय कॉल में मेरे सहयोगी के साथ शामिल होने के लिए आभारी हूं। यह महत्वपूर्ण है कि, विश्व के नेता यूक्रेन में पुतिन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों की निंदा करें।" पिछले तीन दिनों में ये दूसरी बार है, जब अमेरिकी सांसदों ने यूक्रेन में हमला करने के लिए भारत से रूस की निंदा करने का आग्रह किया है। दो दिन पहले दो और अमेरिकी सांसद टेड डब्ल्यू लियु और टॉम मलिनोवस्की ने भी भारत से रूस की निंदा करने का आग्रह किया था।

भारत पर क्यों दवाब बना रहा अमेरिका?
दो दिन पहले अमेरिकी सांसदों ने अमेरिकी राजदूत को लिखी चिट्ठी में कहा था कि, 'हालांकि हम रूस के साथ भारत के संबंधों को समझते हैं, लेकिन हम संयुक्त राष्ट्र महासभा के 2 मार्च को होने वाले मतदान से दूर रहने के आपकी सरकार (भारत सरकार) के फैसले से निराश हैं।" इससे पहले भारतीय मूल के एक और अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने भी यूनाइटेड नेशंस में वोटिंग से भारत के गैर-हाजिर रहने को लेकर भारत के रवैये से निराशा जताई थी। उन्होंने लिखा था कि, ''यहां तक कि भारत अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए काफी ज्यादा छूट पर रूस से तेल खरीद रहा है और रूसी हमले को नई जिंदगी दे रहा है और ये काफी ज्यादा निराशाजनक है।''

कूटनीतिक ग्रुप में शामिल होगा भारत
अमेरिकी सांसद भले ही भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश करे, लेकिन भारत यूक्रेन को लेकर अपने रूख पर कायम है औऱ यूनाइटेड नेशंस में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने गुरुवार को कहा है, संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि, यूक्रेन संकट में लाखों लोगों के जीवन पर 'गंभीर भय' पैदा हो गया है। और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर कहा है कि, यूक्रेन संकट को खत्म करने के लिए कूटनीतिक और बातचीत के अलावा कोई और रास्ता नहीं है। टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि, "हम आने वाले दिनों में सुरक्षा परिषद के साथ-साथ पक्षों (संघर्ष के लिए) में इन उद्देश्यों को जारी रखने के लिए तैयार हैं।" आपको बता दें कि, पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की दोनों से बात की है और उनसे सीधी बातचीत करने का आग्रह किया है।
UN में भारत सरकार ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र आपात बैठक के दौरान यूनाइटेड नेशंस में भारत सरकार के स्थाई प्रतिनिधि तिरुमूर्ति ने कहा कि, ''भारत लगातार यूक्रेन को दवाइयों के साथ साथ मानवीय संकट के समय जरूरी सामानों की आपूर्ति कर रहा है और इस संबंध में भारत की तरफ से मदद जारी रहेगा। भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि, "यूक्रेन में गंभीर मानवीय स्थिति के अनुरूप, भारत आने वाले दिनों में और आपूर्ति भेजने की प्रक्रिया में है।












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